आज का दुख काफी है..

#आज_के_लिए_आज_ही_का_दुख_काफी_है*◆◆◆

    *जीने के तीन आयाम हैं अतीत, भविष्य और वर्तमान. अतीतजीवी "क्यों"में फंसकर दु:ख को न्यौता देता है. भविष्य में जीने वाला संभावनाओं से चिंताग्रस्त होकर डर डरकर जीता है. सुखद जीवन जीने के लिए एक ही आयाम बचता है वर्तमान. वर्तमान में क्यों के लिए जगह नहीं बचता."कैसे" वर्तमान के लिए तात्कालिक योजना है. वर्तमान और भविष्य के चंगुल से निकलकर वर्तमान में जीने की प्रेरणा ली जा सकती है. मां बाप,भाई बहन,दोस्त, शिक्षक, अभिनेता,नेता, बिजनेस मैन हमारे प्रेरणास्रोत हो सकते हैं लेकिन ध्यान रहे अपनी तुलना प्रेरणास्रोतों से न हो.अपनी राह स्वयं बनायें.*

            *इसलिए मैं तुम से कहता हूँ, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएँगे, और क्या पीएँगे, और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहनेंगे, क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्त्र से बढ़कर नहीं? आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तो भी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उनको खिलाता है। क्या तुम उनसे अधिक मूल्य नहीं रखते? तुम में कौन है, जो चिन्ता करके अपने जीवनकाल में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? “और वस्त्र के लिये क्यों चिन्ता करते हो? सोसनों के फूलों पर ध्यान करो, कि वे कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न काटते हैं। तो भी मैं तुम से कहता हूँ, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उनमें से किसी के समान वस्त्र पहने हुए न था।*

मत्ती 6:25-29

*इसलिए जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्त्र पहनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्यों न पहनाएगा? “इसलिए तुम चिन्ता करके यह न कहना, कि हम क्या खाएँगे, या क्या पीएँगे, या क्या पहनेंगे? क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएँ चाहिए।अतः कल के लिये चिन्ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुःख बहुत है।*Published from Blogger Prime Android App

मत्ती 6:30-32, 34

   आपका भाई 

आलोक कुजूर🙏🙏

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