मैं आग लगाने आया हूँ...

🔥आग🔥

येशू ने कहा , मैं आग़ लगाने आया हूं| 

मत्ती १०.३४-३५  में लिखा है ---यह ना समझो कि मैं प्रथ्वी पर , मिलाप कराने आया हूं ; मैं मिलाप कराने नहीं , पर तलवार चलवाने आया हूं|मैं तो आया हूं की , इंसान को उसके बाप से , और बेटी को उसकी माँ से और बहू को उसकी सास से अलग कर दूं| येशू ने इन अल्फाज़ों के द्वारा , अपने आने का उद्देश्य , स्पष्ट कर दिया था| ये वैचारिक युद्ध है| अलगाव का सिद्धांत उत्पति से चला आ रहा है| उत्पत्ति १.४ में लिखा है ---पर्मेश्वर ने रौशनी को अच्छा कहा, और उसने रौशनी को अन्धकार से अलग किया|

दरअसल  वचन का ज्ञान रखने वाले और इंसानी परम्पराओं को धर्म समझने वाले , साथ नहीं रह सकते| एक वो हैं जो अंधकार में चल रहे हैं , दूसरे वो हैं जो वचन और ईश्वरीय ज्ञान की रौशनी में जीते हैं| वैचारिक तलवार चलनी ही चाहिए| अंधकार को मिटाने के लिए ,जंग ज़रूरी है| लूका १२.४९ में येशू एक बहुत बड़ा दावा करता है –मैं ज़मीन पर आग़ लगाने आया हूं , और क्या चाहता हूं केवल यह कि अभी सुलग जायें

| येशू ने , शास्त्रियों,फ़रीसियों,मक्कारों, पाखंडियों,झूठे धर्म गुरुओं और याजकों से समझौता नहीं किया| जब भी इनके बीच टकराव आया तलवारें खिंच गईं,वचन के दोधारी तलवारों से येशू ने जम कर वार किया.ये घायल हुए, लहुलूहान हुए. आज वही आग सच्चे मसीहियों के अंदर होनी चाहिए , शोलों पर राख ना जमने पाए. येशू के अन्दर एक आग़ थी , जिसकी तपिश , उसके विरोधी साफ़ महसूस कर सकते थे,और आज भी  चिंगारी है.....धधकना बाकी है.बवाल खड़ी करना हमारी फितरतों में नहीं है. बस सूरत बदलनी चाहिए. जो आग मुझमें लगी है. वह तुममें भी लगनी चाहिए.🔥🔥🔥🔥Published from Blogger Prime Android App🔥🔥🔥🔥🔥🔥

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