प्रार्थना..

🌹प्रार्थना🌹

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जीवन की निजी समस्याएं ऐसी होती हैं जिसका हल केवल परम सत्ता के पास हैं दरअसल प्रार्थना वह कली है जो ईमान की पौधे पर अंतिम छोर पर खिलता है. इस पौधे को परोपकार के खाद और प्रेम के जल से सींचना होता है,वरना कली निष्फल मुरझा जायेगी.

         प्रार्थना अनन्य भावमुक्त ह्रदय से किया गया ऐसा अंतर्नाद है जिसका ब्यक्ति के अवचेतन मन पर तात्कालिक व सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 

        सच्चे और खेदित मन से, श्रद्धा, आस्था व निष्ठापूर्वक की गई प्रार्थना से ब्यक्ति के मन में आत्मविश्वास व इच्छाशक्ति का जागरण होता है.

प्रार्थना से अंत: स्थापित ब्यवधान,ब्याधियां,असाध्य रोग,चिंतायें भागने लगती है.

         दरअसल प्रार्थना पूजा पाठ का कोई विधी विधान नहीं,धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि नि:स्वार्थ प्रेम,त्याग और समर्पण से अभिभूत होकर सर्व जन हिताय यहां तक की बैरियों के लिए भीPublished from Blogger Prime Android App सुख की कामना, याचना के लिए उस सत्ता से तारतम्य स्थापित करने की विशुद्ध भावना है जिस विराट के ईशारे मात्र से प्रलय और रचना संभव है.

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