वेद और विज्ञान

#वेद_और_विज्ञान◆◆◆
दरअसल जिसे वेद समझा गया है वह प्राचीन ऋषियों के निजी साधना अनुभवों, याचनाओं, प्रार्थनाओं, प्रवचनों आयुर्ज्ञानादि का काव्य संकलन मात्र है.हमारे देश के स्वघोष विद्वानों(दयापंथियों)को वेदों के बारे में बड़ी गलतफहमी है। स्वघोष विद्वान ये मानते हैं कि वेद विज्ञान के अक्षय भंडार हैं, परंतु हमें याद रखना चाहिए कि वेद लगभग साढ़े तीन हजार साल पहले की कृतियाँ हैं। इनमें उतना ही ज्ञान है जितना की तत्कालीन मानव समाज ने खोजा था। यदि यह मान भी लें कि वेदों में विज्ञान का अक्षय भंडार समाया हुआ है, तो यहाँ यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि अब तक हम क्या कर रहे थे? तो हमें यह भी मानना पड़ेगा कि अब तक वेदों के जो टीकाकार, भाष्यकार हुए वे सभी अज्ञानी थे!!!
 क्योंकि उनको विज्ञान के इस अक्षय भंडार के बारे में पता ही नहीं चला?! उन्होंने वेदों का अध्ययन करके कोई वैज्ञानिक आविष्कार किया ही नहीं? विज्ञान के जिस अक्षय भंडार को स्वयं आदि-शंकराचार्य, यास्क से सायणाचार्य तक के वेदज्ञ, आर्यभट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त और भास्कराचार्य जैसे गणितज्ञ-ज्योतिषी नहीं खोज पाए, उसको खोजने का दावा आधुनिक शंकराचार्य  कथित स्वामी, महर्षि और जनसामान्य करने लगे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी....
क्रमशःPublished from Blogger Prime Android App

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