एक कदम सत्य की ओर..
*एक_कदम_सत्य_की_ओर।।*
*मनुष्य हजारों वर्षों से नैमित्तिक ज्ञानों के बल पर परमात्मा और आत्मा को समझने का प्रयास और प्रयोग करता आ रहा है.*
*तमाम नजरिए हुए, दर्शन हुए, अनुभव साधना हुए,तमाम ज्ञान(वेद) हुए. कुछ नजरियों ने आत्मा को परमात्मा का अंश माना और शरीर की उपेक्षा कर दी.जिन कौमों ने ऐसा माना, उन्होंने ध्यान भक्ति का तो विकास किया लेकिन शरीर के लिए जरूरी औषध का विकास शिथिल रखा. तो कुछ शरीर को ही सबकुछ जानकर औषध का,योग कसरतों का खूब विकास किया.यहाँ आत्मा और आध्यात्म को तो माना मगर इसे शिथिल रखा गया. एक तबका ऐसा भी हुआ जिन्होंने आत्मा को तो माना मगर परमात्मा के अस्तित्व को नकार कर साबित ज्ञान(वेद)को ही अंतिम माना.यहाँ चार्वाक को भी स्थान मिला.*
*जबकि आत्मा और परमात्मा दोनों का वजूद है इसे आध्यात्म के प्रयोशाला में साबित किया जा सकता है. इस प्रयोग शाला का उत्पेरक धर्म,कर्म और विश्वास है.आत्मा और परमात्मा दोनों एक ही तंतु के दो छोर हैं.* *आत्मा शरीर धारी होकर परोक्ष रूप है जबकि परमात्मा अपरोक्षानुभूति का केंद्र है.* *आत्मा और परमात्मा एक ही अस्तित्व की दो विभिन्न तरंग अवस्थाएं हैं. असल में आत्मा पर घटित होने वाली दैर्ध्य तरंगें परमात्मा तक पहुंचती हैं.*
*वेद सहज नैमित्तिक ज्ञान है.इसके कुछ आयुर चिकित्सिय ज्ञान पक्ष सार्वकालिक हैं इसके सिद्धांत और साधना अनुभव पक्ष सार्वभौमिक नहीं हैं. इसके मानवकल्याण कारी आदर्शों को व्यवहार में लाया जा सकता है. वेद प्राचीन ऋषियों के साधना उपलब्धि और निजी अनुभवों का संग्रह मात्र है.इसका लाभ इंसानों को लेना चाहिए. बाईबल, कुरान, गुरूग्रंथ, त्रिपिटक आदि इतिहासों को संजोते हुए.वेद(ज्ञान)की ही कड़ियों को जोड़ने का काम किया है. इसका लेटेस्ट बाईबल का नया विधान है. यहाँ आध्यात्मिक जीवन का चर्मोत्कर्ष है. यहाँ मोक्ष है,उद्धार है, क्षमा है,प्रायश्चित है, प्रेम है, बैरियों के लिए दुआ है. पड़ौसी के लिए खुदी की तरह मुहब्बत है.*
*यहाँ शांति है, अमन है, यहाँ अनोखा है, अद्भुत है, चमत्कार है.*
*यह नया विधान सार्वकालिक है,सार्वभौमिक है.*
*आस्तिकों को एकदूसरे से लड़ने के बजाय एकदूसरे को समझने का प्रयास कर एकदूसरे का सम्मान करना सीखना चाहिए. सभी धर्म शास्त्रों का सार एक ही है वह है धर्म और मोक्ष.इसलिए चाहिए कि धर्म शास्त्रों का समेकित समालोचनात्मक स्वध्याय हो.हर धर्म शास्त्रों में अच्छे और बड़े आदर्श हैं. स्वविवेक से उन आदर्शों को अपने जीवन में व्यवहार में लाना चाहिए.*
*पुरानी ब्यवस्थायें और विधान,तात्कालिक ज्ञान(वेद)ईश्वर तक पहुंचने का माध्यम हैं. सबक हैं, तालीम हैं.*
*आलोक कुजूर*
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