पुनर्जन्म तर्क पूर्ण अवधारणा नहीं है..

#पुनर्जन्म 

इसपे कई कहानियां लिखी गयी होंगी, कई फिल्में बनी होंगी और कम से कम भारत में तो यह कांसेप्ट बेहद जाना पहचाना है और इस पर यकीन करने वाले करोड़ों मिलेंगे लेकिन क्या यह वाकई होता है? आइये इसकी संभावना को टटोलते हैं।


वैसे तो कुछ लोग इसे यूं भी मानते हैं कि इंसान चौरासी लाख योनियों में जन्म लेता है तो हो सकता है कि आज जो इंसान था वह अगले जन्म में कुत्ता हो, या जो पिछले जन्म में बंदर था वह इस जन्म में इंसान हो गया, है तो यह भी पुनर्जन्म ही लेकिन टेक्निकली इसे इंसान के ही दोबारा जन्म लेने के बारे में कहा जाता है। अब किसी इंसान ने दुबारा जन्म लिया है यह कैसे साबित हो.. पिछले जन्म की कोई स्थापित पहचान ले कर तो पैदा होता नहीं तो इस बात को प्रमाणित करने के लिये कुछ ऐसे लोगों के उदाहरण प्रस्तुत किये जाते हैं जिन्हें पिछले जन्म के बारे में याद हो और उन्होंने उस बारे में बताया हो।


अब यहीं से टेक्निकल नजरिये से बात उलझ जाती है। याद क्या है.. पहले तो इसे समझें। हम बचपन से जो भी देखते, सुनते, समझते, महसूस करते हैं वह सब हमारी दिमाग रूपी हार्ड डिस्क में स्टोर होता जाता है और यह सारी इनफार्मेशन सिर्फ इसी दिमाग तक सीमित रहती है, यह ट्रैवल नहीं कर सकती। इसे दिमाग से अलग नहीं किया जा सकता। सर पे कोई चोट लग जाये और दिमाग सही से फंक्शन करना बंद कर दे तो भी सारी इनफार्मेशन करप्ट हो जाती है।


अब जब इंसान मरता है तो दिमाग तो शरीर के साथ ही खत्म हो जाता है, फिर उस दिमाग की इनफार्मेशन कैसे आगे कैरी हो सकती है? मतलब उस इंसान की यादें थीं वह उसके न्यूरान्स में समाई इनफार्मेशन थी जो दिमाग के डेड होते ही खत्म हो गयी.. अब इसके आगे सरकने की कोई गुंजाइश नहीं तो यह सब अगले जन्म में किसी को कैसे याद रह सकता है? जो भी जन्म लेता है वह एक फ्रेश बाॅडी और दिमाग के साथ जन्म लेता है फिर उस तक एक मरे हुए दिमाग की इनफार्मेशन कैसे पहुंच सकती है।


इसके पीछे कुछ लोगों के उदाहरण दिये जाते हैं जिन्होंने पिछले जन्म की बातें सही-सही बताई हों या अपने पिछले परिवार से मुलाकात की हो या अपने कातिल को पकड़वाया हो लेकिन इस बात का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि यह उदाहरण उसी देश और संस्कृति से सम्बंधित होते हैं जहाँ पुनर्जन्म के कांसेप्ट पर यकीन किया जाता है। अगर वाकई इसे सही मान भी लें तो चमत्कार को किनारे कर के इसका टेक्निकल कारण खोजना होगा जो प्रैक्टिकल हो.. और मुझे ऐसा कोई कारण समझ में नहीं आता। आपको आता हो तो बताइये।Published from Blogger Prime Android App

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