अंजीर के पेड़ को क्यों श्राप दिया?
Rajkumar Kumar जी ये आपकी जिज्ञासा है या दुराग्रह??
अगर जिज्ञासा है तो आपने शायद बाईबल पढ़ी हो तो पूरे अध्याय को पढ़ा होगा??
ध्यान दें ईसा अंजीर के पेड़ के पास बगैर फल के मौसम में गए और फल की आशा रखी.अब आप कहेंगे ईसा इतने बेवकूफ थे कि बिना मौसम के फल चाह रहे थे!??
ईसा दृष्टांत में अपनी बात कहते थे. यही उनकी शैली थी.बाईबल में नौ फल बताये गए हैं. ,प्रेम,आनंद शांति, धीरज कृपा भलाई...विश्वास नम्रता और संयम...
इंसानों में ये फल लगने चाहिए.
बाईबल में दृष्टांत है जो पेड़ फल नहीं लाते वे काट डाले जायेंगे....
यह विषय विस्तृत है. संक्षेप में इस वाकये से यह समझा जाता है कि ईसा लोगों के निष्फल होने पर क्रोधित हुए..
पेड़ो में सिर्फ हरियाली थी और पेड़ निष्फल थे.
नौ फल जो ऊपर बताया गया है वह हर इंसान में हर मौसम में लगे यही ईसा चाहते थे. इस अध्याय का सार यही है.
आप सत्यार्थप्रकाश की बेतुके अर्द्ध सत्य मिथक को पढ़कर ऐसे दुराग्रह करते हैं. आप स्वध्याय करें तो जवाब मिल जायेगा.
ईसा ने कहा मैं धर्म शास्त्रों की भविष्यवाणियों को पूरा करने आया हूँ. आप बाईबल की भविष्यवाणियाँ पढ़ें तो ऐसा सवाल नहीं करेंगे कि शब्द मात्र से सूली बर्बाद क्यों नहीं किया!!?
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