क्रिशमस क्या है??

क्रिसमस की सच्चाई।।

        25 दिसम्बर ईसा की जन्म जयंती नहीं है.

क्रिसमस रोम के सम्राट कोंस्टेन्टाइन ने 336 A.D में क्रिसमस नाम का त्यौहार मनाने की शूरूआत की जिसमें प्रजा खुशियों को आपस में साझा करती,मिलबांट कर खाती थी और तारीख 25 दिसम्बर रखी। इसी त्यौहार को

रोमन कैथोलिक प्रधान पोप जूलियस प्रथम ने  यीशु के सांकेतिक जन्म दिन के रूप बदला.इसी दिन से ईसाई आपस में और समाज में ईसा के धरती पर आने का सुसमाचार, ईसा के दया, क्षमा,प्रेम और परोपकार को साझा करते हैं और एकदूसरे से हाथ मिलाकर, एकदूसरे के लिए, दुर्बलों, लाचारों, दीन दुखियों,बीमारों के लिए दुआ, प्रार्थना की जाती है                       रोम में 25 दिसम्बर को सूर्य देवता का जन्म दिन मनाया जाता था जिसे बाद में ईसा के सांकेतिक जन्म दिन के रूप में मनाया जाने लगा.

सबसे पहली बार क्रिसमस 354 A.D के बाद मनाया गया।

क्रिसमस यह नहीं कि एक {बूढ़ा आदमी सैंटा क्लॉस} लाल टोपी और कपड़े पहन के सबको गिफ्ट बांटे

क्रिसमस यह भी नहीं कि उस दिन हम खूब मदिरे पिए जायें और इंजॉय करें

तो फिर क्रिसमस है क्या

मत्ती 1:21

वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा.

हम क्रिसमस उन लोगों के साथ मनाएं जो निराश जो अनाथ और सड़कों पर ठंड से ठिठुर रहे हैं

मत्ती 25:35-36

[35]क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं पर देशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया।

[36]मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए।

फिलिप्पियों 2:4-5

[4]हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्ता करे।

[5]जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो।

जैसा आप लोगों के साथ बोते हैं वैसा ही आप अपने जीवन में भी काटेंगे

यदि आप लोगों के जीवन में प्रेम दया बोते हैं तो आप भी प्रेम और दया को काटेगा

मत्ती 5:7

धन्य हैं वे, जो दयावन्त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी।

अब कुछ लोग ऐसे हैं उनका सोचना है कि 25 तारीख को शैतान या किसी और की आराधना होती है जिसे लोगों ने ले लिया क्रिसमस के रूप में

तो इसीलिए जो लोग क्रिसमस को मनाते हैं वह इसके द्वारा उसी की पूजा करते हैं

इसके कारण से भी बहुत से लोग  क्रिसमस को नहीं मनाते हैं या नहीं मनाने की अपील करते हैं.

अब यह विचार बिल्कुल गलत है कैसे?

वैसे देखा जाए तो पूरा सप्ताह हर 1 दिन देवताओं के नाम पर रखा गया है

सोमवार मंगलवार गुरुवार शुक्रवार शनिवार इतवार यह सब देवताओं के नामों पर रखा गया है और इन सब की पूजा होती है

उदाहरण के लिए आपके कलीसिया में प्रार्थना सभा या उपवास प्रार्थना है और उसी दिन कहीं पर शैतान की आराधना हो रही है

तो क्या आप उस दिन उपवास प्रार्थना करने के द्वारा शैतान की आराधना कर रहे हैं ? नहीं ना

ठीक ऐसे ही दिन कोई भी हो लेकिन हमें उसे प्रभु के लिए मानना है

रोमियो 14:6

जो किसी दिन को मानता है, वह प्रभु के लिये मानता है:

    हम मसीहयो के लिए की लोगों को परमेश्वर का प्रेम बताएं कि कोई है जो उन से बहुत प्रेम करता है 

यही सुसमाचार है. यही सार है

सुसमाचार प्रचार के लिए कोई नियत तिथी या वार घोषित नहीं है.

   25 दिसम्बर को ईसा की सांकेतिक जयंती मानकर हर दिन की तरह उस दिन भी सुसमाचार और खुशियाँ बांटी जाती है तो कोई हर्ज नहीं।

 बाइबल बताती है अवसर को बहुमूल्य समझो)

क्रिसमस मनाना बुरा नहीं क्योंकि बाईबल बताती है 

1 कुरिन्थियों 10:31

सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महीमा के लिये करो।

यहां वचन लिखा है:जो कुछ अर्थात सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिए करो यदि हम परमेश्वर की महिमा के लिए   क्रिसमस को मनाते हैं तो इसमें कुछ भी बुरा नहीं

[गलातियों 5:22-23

[22]पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज,

[23]और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; {{ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं।}}

जिसके कान हो वह सुन ले]

सारी आदर महिमा हमारे प्रभु यीशु को मिले.दीन दुखियों को मदद करते हुए बेशक दिसंबर महीने के पच्चीसवें तारीख को ही क्यूँ हर दिन को क्रिशमश की तरह मनायें।।Published from Blogger Prime Android App

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