समस्या के गर्भ में ही समाधान है..

समस्या के गर्भ में ही समाधान है.।।

कुछ लोग थोड़ी विपरीत परिस्थितियों को समस्या की तरह देखते हैं.इनकी अशांति का कारण भी यही है. दरअसल प्रत्येक समस्या सगर्भा होती है और वह अपने गर्भ में समाधान को लिये रहती है. बस थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है, समस्या के उदर से ही समाधान निकलेगा. समस्या के लिए तमाम शिकवे हैं, कुड़कुड़ाहट है परंतु समाधान के लिए तनिक भी सब्र नहीं है. हमारे भीतर समाधान की प्यास जगानी होगी. समस्याओं में चिंता की नहीं चिंतन की जरूरत होती है मगर अफसोस हम चिंतन की जगह चिंता करते हैं और हाथ लगता है विषाद ही.

          अगर हम नेक और सही राह पर हैं तो परमात्मा भी हमारे साथ है. परंतु पुरूषार्थ तो हमें ही करना है. गुलाब के साथ कांटे हैं तो समस्या नहीं है बस देखने का नजरिया ठीक हो. हम देखें कि कांटों के बीच गुलाब कैसा मुस्कुरा रहा है.

         "आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।

तुम में कौन है, जो चिन्ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है

और वस्त्र के लिये क्यों चिन्ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।

तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे विभव में उन में से किसी के समान वस्त्र पहिने हुए न था।

इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा?Published from Blogger Prime Android App

इसलिये तुम चिन्ता करके यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे?"(मत्ती6:26-31)

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