कन्फ्यूज दयानंद

#सर्वे_ते_नरकं_यांति_दृष्टवा_कन्यां_रजस्वलाम●●

     उस रजस्वला को देखकर उसकी माता पिता भाई,मामा और बहन सब नर्क जाते हैं.

     【सत्यार्थप्रकाश चतुर्थ समुल्लास, पृष्ठ संख्या 56 संस्करण:अप्रैल 1989】

     इसी समुल्लास में परलोक के सुख मनुस्मृति के श्लोकों में बताये गए हैं. (पेज नं.73)

          दयानन्द ने परलोक शब्द लिखने के बाद #परजन्म लिखा है.#पुनर्जन्म नहीं. दयानन्द जानते थे कि वेदों में आवागमन नहीं है. बल्कि #स्वर्ग_नरक की बात है.

    कठोपनिषद १/१/१२ में भी ऐसा है.

#स्वर्गे_लोक_न_भयं......मोदते स्वर्गलोके।।

     स्वर्ग में ना भय है ना मृत्यु है और ना बुढ़ापा है. वहाँ भूखप्यास को पारकर शोक या दुख से निवृत्त होकर आनंद को प्राप्त करते हैं.

     अथर्ववेद १८/४/६४के भाष्य भी इसकी तस्दीक करते हैं लेकिन दयापंथी यहाँ भी चालाकी से डामेज कंट्रोल कर गए हैंPublished from Blogger Prime Android App

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