सबके पूर्वज एक ही हैं..

जेन्दावेस्ता / अवेस्ता के बहुत से हिस्सो और अथर्ववेद के मंत्रों के बीच भाषा, उच्चारण और कथ्य की जबरजस्त समानताएं मौजूद हैं। जरथुस्त्र के पिता का नाम पौरुषास्प् और उनके काबिले का नाम स्पितामा( पितामह) था । अवेस्ताई देवताओं के नामो में भी आश्चर्यजनक समानता है जैसे इंद्र का आंद्र, मित्र( सूर्य) का मिथ्र आदि।


जेन्दावेस्ता उन लोगो की कृति है जो ईरानियों से भिन्न थें और कंही दूसरी जगह से आ कर बसे थें। 

पश्चिमी इतिहासकारो के अनुसार ईरान के पश्चिमी उत्तर में  वह जातीय समुदाय आ बसा था जो मिश्र / काला सागर के पश्चिम से आकर बसा था, जिसके कोई आधी सहस्राब्दि के जरथुस्त्र हुए थे। ईसा के करीब एक हजार से नौ सौ साल पहले जरथुस्त्र का होना बताया जाता है अर्थात वह समुदाय दूसरी सहस्राब्दि ईसापूर्व ईरान आया होगा ।

यह जातीय समुदाय मीडियन या मीडी था , अब्राहम के मिश्र की पत्नी के बेटे।ओल्ड टेस्टामेंट में मीडियन जातीय समुदाय का काफी जिक्र है । खुद मूसा ने मीडियानो के तांत्रिक नेता की बेटी से शादी की थी, मूसा ने अपने तंत्र या जादू से मिस्र के शासक को पराजित किया था।मीडियान अग्नि पूजक थें।


ओल्ड टेस्टामेंट में अनुसार मीडियानो को गिडियानो से युद्ध करना पड़ा था , जिसमें कानो में स्वर्ण कुंडल पहने  150000 मीडियन मारे गए थे और बचे हुए भाग के पश्चिमी ईरान चले गए थे। इतिहासकारो ने इस जाति समुदाय को काफी महत्व दिया है, इन्ही की दो शाखाएं एक इंडोयोरोपियन्स और दूसरी इंडोआर्यन्स।


मीडियानो के पूर्वपुरुष अब्राहम थे, जाहिर सी बात है कि जिन प्रतिकूल सांस्कृतिक और अप्राकृतिक परिस्थियों का   सामना उन्हें करना पड़ा था उनमे सबसे बड़ी जगह युद्ध घेरते हैं।ऋग्वेद में भी सबसे बड़ी जगह युद्ध घेरते हैं। जरथुस्त्र की अवेस्ताई और वेदों की भाषा लगभग एक सी हैं।

मीडियन का जो समूह भारत आया वह माध्यंदिनि शाखा कहलाया । अग्निपूजक अब्राहम के पूज्य थे यह्वेह /यहोवा यह भारत आके वैदिकों के यह्व: ( ब्रह्म का रूप) कहलाया ।


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