मतभेद वैमनस्य लाता है.

हर धार्मिक मतों,शास्त्रों में मतभेद कम समानताएं ज्यादा हैं. हमें मतभेदों पर नहीं समानताओं पर विमर्श करके मतभेद कम करना चाहिए. समस्या तब पैदा होती है जब हम मतभेदों पर बहस करते हैं.यही बहस और मतभेद इंसान और इंसान के बीच दरार लाता है,खाईयां लाता है,वैमनस्य पैदा करता है. वेद भी पहले मनुष्य बनने पर बल देता है और बाईबल बैरियों से भी मुहब्बत करना सिखाता है. इस्लाम ईश्वर के प्रति वफादार बनना सिखाता है. हमें चाहिए कि हम समस्या नहीं बल्कि समाधान बनें.हर कर्म के पीछे कारण होता है. आध्यात्म में उसी कारण को ईश्वर कहा गया है. ईश्वर को किसी ने नहीं देखा पर ईश्वर कर्मों के द्वारा अपना वजूद जाहिर करता है. हमारे काम ऐसे होने चाहिए जिससे ईश्वर का स्वभाव झलके.

   इंसान का स्वभाव ही है कि ईर्ष्या करे,बैर करे,गलौच करे,बुराई करे पाप करे....मगर ईश्वरीय स्वभाव इसके उलट है.....

   हरेक इंसान का अंतिम लक्ष्य मोक्ष और उद्धार पाना है. आखिर मोक्ष है क्या..??

मोक्ष की तीन कड़ियाँ आपस में जुड़ी हैं. 

पहला मन का परिवर्तन, 

दूसरा स्वभाव का बदलना और

तीसरा आत्मा का परमात्मा से मिलन.

     हमारे स्वभाव का पिता के स्वभाव बदलकर परमेश्वर के स्वभाव में बदलाव आना ही मोक्ष प्राप्ति का पहला पड़ाव है.

     कौन है जो हमारे स्वभाव क़ो परमेश्वर के स्वभाव में बदले?कौन है जो हममें यह बदलाव लाये?

        इसलिए जरूरी यह है कि हम पहले मनुष्य बनें,प्रेम खीखें और ईश्वर के आज्ञाकारी संतान बनें क्योंकि. ईश्वर एक है.Published from Blogger Prime Android App

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