तो फिर भगवान कौन है??

जवाब देनेवाले ने ठीक ठीक जवाब दिया है. लीजिए दयापंथियों के कुतर्कों और उनकी विद्वता का रस भी लें.
#समाजी सवाल:— भगवान (God) कौन है ? ईसाई:— जीसस है।
     जवाब ठीक ही है क्योंकि भारतीय दर्शन भी भगवान को इस प्रकार परिभाषित करती है जिसने पांचों इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली है तथा जिसकी पंचतत्वों पर पकड़ है उसे भगवान कहते हैं।वह व्यक्ति जो पूर्णत: मोक्ष को प्राप्त हो चुका है और जो जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर कहीं भी जन्म लेकर कुछ भी करने की क्षमता रखता है वह भगवान है।
सवाल:— क्या जीसस, मैरी का बेटा है ? ईसाई:— हां, जीजस मैरी का बेटा है. जोज़फ उसका संसारिक बाप है और परमेश्वर उसका आत्मिक पिता है.

#दयापंथी सवाल:— तो फिर मैरी को किसने बनाया ? ईसाई:— भगवान ने बनाया यह कहना गलत होगा.ईश्वर और भगवान में भेद है.

😊सवाल:— OK, तो फिर भगवान कौन है ? ईसाई:— जीसस है।
यह सवाल भगवान और ईश्वर के बीच भेद नहीं जानने का परिणाम है या फिर जानबूझकर दुराग्रह है.....

☺सवाल:— क्या जीसस का जन्म हुआ था ? ईसाई:— हां, हुआ था।
     बेशक हुआ था.
सवाल:— तो जीसस के पिता कोन हैं ? इसका जवाब ऊपर दिया जा चुका है.

☺सवाल:— तो फिर भगवान कोन है ? ईसाई:— जीसस है।
  यह सवाल फिर से दोहराया आपने....!!!
सवाल:— क्या जीसस भगवान का सेवक है ? ईसाई:— हाँ है।

😊सवाल:— क्या जीसस सूली पर मरे थे ? ईसाई:— हाँ, मरे थे।

☺सवाल:— जीसस को पुनर्जीवित किसने किया ? ईसाई:— भगवान ने किया।
     यहां फिर से जानबूझकर दुराग्रह कर है.भगवान नहीं ईश्वर ने.
             आर्य समाजियों की दुराग्रह और उनके अल्पज्ञान का रस लें......
😊सवाल:— क्या जीसस दूत (संदेशवाहक) थे? ईसाई:— हाँ, थे।
     सही है.
☺सवाल:— तो उनको पृथ्वी पर किसने भेजा था ? ईसाई:— भगवान ने भेजा।
  आप ईश्वर और भगवान को फिर से एक ही बता रहे हैं.
☺सवाल:— तो भगवान कौन है ? ईसाई:— जीसस है।
     
☺सवाल : - क्या जीसस चरवाहा है ? ईसाई - हा है ।
😊सवाल : - तो भगवान कौन है ? इसाई - जीसस है ।
😊सवाल:— क्या जीसस ने धरती पर किसी की पूजा की थी? ईसाई:— हाँ की थी।

😊सवाल:— किसकी पूजा की थी ? ईसाई:— भगवान की।
☺सवाल:— तो भगवान कौन है ? ईसाई:— जीसस है।
😊सवाल:— क्या भगवान का कोई प्रारम्भ है ? ईसाई:— नही है।
☺सवाल:— तो 25 दिसम्बर को कौन जन्मा था ? ईसाई:— जीसस जन्मे थे।
😊सवाल:— क्या जीसस ही भगवान है ? ईसाई:— हाँ, जीसस ही भगवान है।
☺सवाल:— भगवान कहाँ है ? ईसाई:— स्वर्ग में है।
😊सवाल:— स्वर्ग में कितने भगवान हैं ? ईसाई:— वहां सिर्फ एक ही भगवान है।
😊सवाल:—जीसस कहाँ है ?
ईसाई:— वो अपने पिता (भगवान) के दायीं तरफ विराजमान है।
☺सवाल:— तो स्वर्ग में कितने भगवान हैं ? ईसाई:— वहां सिर्फ एक ही भगवान है।
😊सवाल:— वहां पर कितनी कुर्सियां हैं ? ईसाई:— वहां सिर्फ एक कुर्सी है।
😊सवाल:— जीसस कहाँ है ?
ईसाई:— वे भगवान के पास बैठे हैं।
सवाल:— तो वे दोनों एक कुर्सी पर कैसे बैठ सकते हैं ? ईसाई:— भगवान पर इतने सवाल ? आपको शैतान ने गुमराह कर रखा है। भगवान के बारे में इतना गलत सिर्फ शैतान ही सोच सकता है । आप शैतान के जाल में फंसे हुए हैं।
यह साबित करने की जरूरत भी है???
😆😆😆😆😆😆
आर्य बंधुओं क्या यही आपकी विद्वता का स्तर है??पूर्वाग्रह ऐसा चश्मा है जिससे सत्य धुंधली नजर आती है. आपके साथ यही समस्या है..#देहधारी ईश्वर..
  की अवधारणा आप पूर्वाग्रह त्यागे बिना कैसे समझ पायेंगे....
    दुनिया में तमाम ऐसे लोग हुए जो अपने आप को ईश्वर बताते थे. लेकिन जो खुद को ईश्वर होने के दावे करते हैं और अपने दावे पर खरे नहीं उतरते और ईश्वरीय कार्य और स्वभाव प्रकट नहीं कर सकते वे सभी धोखेबाज हैं...
     ईसा पृथ्वी पर केवल परमेश्वर की अभिव्यक्ति ही नहीं बल्कि वह देहधारी महान आत्मा हैं जो मनुष्य के बीच रहकर ईश्वरीय स्वभाव और कार्य को प्रकट किया साथ ही बेहतर ढंग से परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करते हुए जीवन जीने की असाधारण कला, सत्य का मार्ग, गुनाहों से तौबा कर पश्चताप, दया, क्षमा,प्रेम और परोपकार सिखाया. उसने परमेश्वर का प्रेमपूर्ण दयावान स्वभाव दिखाया.
    परमेश्वर की दिव्यता आज पर्यंत किसी शरीरधारी में प्रकट नहीं हुआ इसीलिए मसीह जो सत्य दे सकता है ईश्वर का प्रतिरूप कहलाता है इसमें कुछ भी अतिसंयोक्ति नहीं है क्योंकि उसने परमेश्वर के सारतत्व को स्वयं धारण किया और अपने कार्यों में ईश्वरीय स्वभाव और ज्ञान को प्रकट किया. यह सब किसी सामान्य देहधारी के बस का नहीं है.
    उन्होंने कई चमत्कारों और कौतुक भरे कामों से ईश्वरीय दर्शन का अनावरण किया.. समुद्री आंधियों को खामोश करना, हजारों लोगों को चंद रोटियों से तृप्त करना, बीमारों को चंगा करना, मुर्दों को जिलाना जिनसे अलौकिक शक्ति और अधिकार प्रकाशित हुआ.
            अंत में धर्म की रक्षा और इंसान के पापों की मुक्ति दिलाने के लिए कुर्बानी देकर महायज्ञ पूर्ण किया. इसी से सिद्ध होता है ईसा के कार्य स्वयं परमेश्वर के कार्य हैं.
     परमेश्वर का देहधारण एक बड़ा रहस्य है. इसे पूर्वाग्रह छोड़कर सहजता से समझा जा सकता है. सत्य से प्रेम करनेवालों के लिए देहधारी परमेश्वर को स्वीकार करना आसान है सत्य से बैर रखने वाले देहधारी ईश्वरीय प्रतिरूप की निंदा और विरोध करते हैं... ईश्वर के खोजी ईश्वर की वाणी पहचानते हैं.Published from Blogger Prime Android App

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