भीष्म पितामह और पुनर्जन्म के किस्से

#पुनर्जन्म_तथ्य_या_सत्य??

भाग :2

             महाभारत के युद्ध में शरशैय्या पर लेटे भीष्म पितामह का पिछले जन्म का दोष यह था कि उसने पूर्व जन्म में सर्प को कांटेदार झाडियों में फेंका था जिससे सर्प बड़ी पीड़ा के साथ मर गया था. भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर भीष्म पितामह ने उस घटना को शरशैया पर याद करने की कोशिश की मगर याद नहीं कर पाये. फिर उन्हें एक युग पीछे की घटनाओं को याद दिलाया गया. तब उन्हें यह घटना स्मृत हो पाया.....

     आईये जरा समीक्षा करें.

ध्यान रहे यह समीक्षा किसी के धार्मिक मान्यताओं पर आघात करने.के लिए नहीं बल्कि समीक्षा के तार्किक खंडन या मंडन के लिए प्रस्तुत है.

            आप अपने जीवन का प्रत्येक काम अपने शरीर के अंगों से करते हैं चाहे वह चलना हो, खाना हो, पीना हो, देखना हो अथवा मल त्याग करना। इन तमाम कामों में आपकी आत्मा का कोई हस्तक्षेप अथवा योगदान नहीं होता है। तो इतना और मान लीजिए कि जिस प्रकार आप अपने शरीर के अंगों द्वारा खाते-पीते और दैनिक कर्म करते हैं, उसी प्रकार अपनी जिंदगी की तमाम बातों को याद रखने का काम भी अपने शरीर के एक महत्वपूर्ण अंग दिमाग के द्वारा करते हैं। आपको पता ही होगा कि जो चीजें हम बार-बार देखते, सुनते अथवा पढते हैं, वह एक सूचना के रूप में हमारे अवचेतन मस्तिष्क में जमा हो जाती हैं और इस प्रकार हमारी स्मृति अथवा याददाश्त का निर्माण होता है।


यानी कि मैं क्या हूँ, मेरे माँ बाप कौन हैं, मेरी जाति क्या है जैसी असंख्य सूचनाएं मेरे शरीर के एक अंग मस्तिष्क में जमा होती रहती हैं। अब इतना तो आपको पता ही होगा कि जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो उसके साथ उसका मस्तिष्क भी मर जाता है। वह उसी शरीर के साथ जला दिया जाता है अथवा मिटटी में दफना दिया जाता है। फिर यह कैसे सम्भव है कि किसी एक के शरीर के दिमाग की कोई जानकारी दूसरे शरीर में चली जाए? अर्थात एक मोटी बुद्धि के अनुसार ऐसा होना असम्भव है। यानी की जब एक दिमाग की सूचना दूसरे दिमाग में जा ही नहीं सकती तो फिर कोई व्यक्ति किसी दूसरे शरीर के जीवन से सम्बंधित बातें कैसे जान सकता है? इससे यह साफ जाहिर है कि पुनर्जन्म जैसी परिघटना संभव ही नहीं है।

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