चार वेद अपौरुषेय कैसे है??

निवर्तमान सद्गुरु भी जीवित वेद हैंं.सद्गुरु पूर्वाग्रह रहित ईश्वरीय वाणी कहता है.

           विज्ञान का अर्थ है विशेष ज्ञान. पांचों इंद्रियों से हम जो कुछ समझ सकते हैं वह ज्ञान है. जो समझ नहीं पाते, फिर भी उसका बोध किया जा सकता है उसे विशेष ज्ञान कहा जा सकता है. विज्ञान एक ऐसा तरीका है.जिसमे सिद्धता कंपल्सरी है.

         वेद का अर्थ ही ईश्वरीय ज्ञान है. ज्ञान नैमित्तिक है. इसे साधना और तप और अभ्यास से हासिल किया जा सकता है. हमारे पूर्वजों, ऋषियों नबियों पैगंबरों ने अपने साधना और अभ्यास से इसे हासिल किया और स्मृतियों में संग्रहित किया.लिपिबद्ध किया. इसका लाभ लोगों को लेना चाहिए. और पूर्वजों को शुक्रिया कहना चाहिए.

      ईश्वरीय ज्ञान हासिल करने के लिए किसी गुरुकुल या महाविद्यालय से डिग्रियां लेना जरूरी नहीं है. वेद चारों ओर बिखरे हुए हैं. बस बटोरने की योग्यता हासिल करनी है. वेद स्वानुभव से हासिल किया जा सकता है. हमारे पूर्वजों ने जो बताया है वह परानुभव है. इसमें हमारा अपना स्व अनुभव नहीं है.Published from Blogger Prime Android App



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