गाँधीजी और विदेशी समानों का बहिष्कार..
ये तस्वीर 1931 के दौर की है। जब भारत में महात्मा गाँधी के आह्वान पर विदेशी माल के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने के नारे खूब चल रहे थे। इस आह्वान का असर इंग्लैंड के कई उद्योगों पर पड़ रहा था क्योंकि भारत में उनके माल की खपत लगातार कम हो रही थी। महात्मा गांधी इंग्लैंड के दौरे पर थे। उन्हें वहां के कपड़ा मिल चलाने वाले डेविस घराने ने अपने यहां आमंत्रित किया। गांधी के विदेशी माल के बहिष्कार के आह्वान का असर डेविस घराने पर भी पड़ रहा था, उनकी हालत दिन प्रतिदिन बद से बद्तर हो रही थी। मिल की स्थिति इतनी खराब हो रही थी कि अब मजदूरों की छटनी होनी शुरू हो गई। डेविस घराना महात्मा गांधी को उन मजदूरों से मिलवाना चाहता था, जिनकी नौकरी गांधी जी के आह्वान के बाद खतरे में पड़ रही थी, ताकि गांधी जी अपने आह्वान को वापस ले और मिल व मजदूरों दोनो की हालत दुरुस्त हो।

मिल मालिक को लगा कि गांधी जी उन से मिलने नहीं आयेंगे, क्योंकि उन से मिल कर गांधी जी और उनके आंदोलन को कोई फायदा नहीं होना था। वो अगर "दुश्मन देश" के इन मजदूरों से नहीं भी मिलते तो, इस का असर गांधी की शख्सियत पर रत्ती भर भी नहीं पड़ता।
और सरकार को लगा कि अगर गांधी जी इन मजदूरों से मिलने आए तो उन्हे इनके विरोध का सामना करना पड़ेगा, जो कि गांधी जी की सुरक्षा के लिए भी खतरा साबित हो सकता है।
गाँधी तो गाँधी थे। वो मिल मजदूरों से मिलने भी गए और उनका विरोध भी नहीं हुआ। बल्कि सब के विचारों के उलट गाँधी जी का स्वागत करने वहां हजारों की भीड़ खड़ी थी। लोग एक बूढ़े हाड़ मांस के पुतले गांधी की बस एक नजर देखने लिए दूर दूर से आए थे। ये वो लोग थे जिनकी समस्याओं को वजह महत्मा गाँधी थे।
गाँधी ने उस इलाके में अगले दो दिन मजदूरों के साथ बिताए, उनकी हालत को जाना, उनके दर्द को बांटा। और दुनिया कि मीडिया को बुलाया और कहा कि "वे अपने विदेशी बहिस्कार के आंदोलन को खत्म नहीं करेंगे। मैं जानता हूं कि इन मजदूरों की हालत बहुत खराब हो गई है, ये हमारे आंदोलन की वजह से बहुत गरीबी झेल रहे है लेकिन - इन्होंने भारत की हालत और गरीबी नहीं देखी है।"
गाँधी के इस बयान के बाद भी लोगों ने उन पर फूल बरसाए, क्योंकि वो मजदूर गाँधी और उसके देश की स्थिति को समझ रहे थे।
(आज जब हम अपने नेताओं, मंत्रियों की सुरक्षा पर बहस कर रहे , उनकी सुरक्षा पर एक दिन में ही करोड़ों खर्च कर रहे है तो इतिहास पलट कर देखने की जरूरत है कि अपने लोगों से दूर हो कर कोई जरूर सुरक्षित हुआ हो लेकिन वो लोगों के प्यार, प्रेम, स्नेह और सम्मान से भी दूर हुआ है। लोग भी अपने नेता से प्यार करते है, उनकी एक नजर, एक स्पर्श उन्हें ताउम्र याद रहता है। आप लोगों की उस ताउम्र याद रहने वाली याद में शामिल नहीं हुए।)
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