बाईबल पर आत्मा के लिए ईशारे...
आत्मा” क्या है
अब आइए देखें कि बाइबल में शब्द “आत्मा” का इस्तेमाल किस अर्थ में किया गया है। कुछ लोग सोचते हैं कि “आत्मा,” “प्राण” के लिए ही इस्तेमाल होनेवाला दूसरा शब्द है। मगर यह सच नहीं है। बाइबल साफ दिखाती है कि “आत्मा” और “प्राण” शब्दों का अलग-अलग मतलब है। इन दोनों में क्या फर्क है?
सबसे बड़ा फर्क यह है कि बाइबल के लेखकों ने “आत्मा” के लिए, इब्रानी शब्द रूआख या यूनानी शब्द न्यूमा का इस्तेमाल किया था, न कि नीफेश और साइखी। बाइबल को जाँचने पर रूआखऔर न्यूमा का मतलब साफ समझ में आता है। मिसाल के लिए, भजन 104:29 कहता है: “तू [यहोवा] उनकी सांस [रूआख] ले लेता है, और उनके प्राण छूट जाते हैं और मिट्टी में फिर मिल जाते हैं।” और याकूब 2:26 कहता है: “देह आत्मा [न्यूमा] बिना मरी हुई है।” तो फिर, इन आयतों में शब्द “सांस” या “आत्मा” का मतलब वह चीज़ है जो शरीर को ज़िंदा रखती है। इसके बगैर शरीर मरा हुआ है। इसलिए, कई बाइबलों में शब्द रूआख का अनुवाद न सिर्फ “आत्मा” किया गया है बल्कि “जीवन का श्वास” या जीवन-शक्ति भी किया गया है। मिसाल के लिए, नूह के दिनों के जलप्रलय के बारे में परमेश्वर ने कहा: “मैं स्वयं आकाश के नीचे के सब प्राणियों को जिनमें जीवन का श्वास [रूआख] है नाश करने के लिए पृथ्वी पर जलप्रलय करने पर हूं।” (उत्पत्ति 6:17; 7:15,22, NHT) यह दिखाता है कि “आत्मा” कोई अदृश्य साया नहीं बल्कि ऐसी अनदेखी शक्ति (जीवन-ज्योति) है, जिससे सभी जीवित प्राणी ज़िंदा हैं और चलते-फिरते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो, जैसे रेडियो को काम करने के लिए बिजली की ज़रूरत होती है, उसी तरह शरीर के ज़िंदा रहने के लिए जीवन-शक्ति या आत्मा की ज़रूरत होती है। इस बात को और अच्छी तरह समझने के लिए एक ऐसे रेडियो की मिसाल लीजिए, जिसे आप कहीं भी ले जा सकते हैं। जब आप रेडियो में बैटरी डालते हैं और उसे चलाते हैं, तो बैटरियों में मौजूद बिजली से रेडियो में मानो जान आ जाती है, वह काम करने लगता है। मगर बैटरियों के बिना रेडियो बेजान होता है। या फिर, अगर रेडियो तक बिजली पहुँचानेवाले तार को प्लग से निकाल दिया जाए, तो रेडियो बंद हो जाता है। उसी तरह, आत्मा एक ऐसी जीवन-शक्ति है जिसके बल पर हमारा शरीर ज़िंदा रहता है। और जैसे बिजली की कोई भावनाएँ नहीं होतीं, वह खुद कुछ सोच नहीं सकती, वैसे ही आत्मा भी है। यह एक शक्ति है, कोई व्यक्ति नहीं। और जैसे भजनहार ने कहा था, इस जीवन-शक्ति के बिना हमारे “प्राण छूट जाते हैं और [हम] मिट्टी में फिर मिल जाते हैं।”
इंसान की मौत के बारे में सभोपदेशक 12:7 कहता है: “तब मिट्टी [उसकी देह] ज्यों की त्यों मिट्टी में मिल जाएगी, और आत्मा परमेश्वर के पास जिस ने उसे दिया लौट जाएगी।” जब शरीर से आत्मा या जीवन-शक्ति निकलती है, तो शरीर मर जाता है और वहीं लौट जाता है जहाँ से वह निकला था, यानी मिट्टी में। उसी तरह, जीवन-शक्ति भी वहीं लौट जाती है, जहाँ से यह आयी थी—परमेश्वर के पास। (अय्यूब 34:14,15; भजन 36:9) मगर, इसका यह मतलब नहीं कि हमारे अंदर से कोई अमर साया निकलकर सफर करता हुआ स्वर्ग जाता है। इसके बजाय, इस आयत का मतलब है कि जब एक इंसान मर जाता है तो वह भविष्य में दोबारा ज़िंदा होगा या नहीं, यह यहोवा पर निर्भर करता है। दूसरे शब्दों में कहें, तो उसकी ज़िंदगी परमेश्वर के हाथ में है। सिर्फ परमेश्वर की शक्ति से ही, उस इंसान में आत्मा या जीवन-शक्ति दोबारा डाली जा सकती है जिससे वह फिर से जी सकता है।
हमें इस बात से कितनी तसल्ली मिलती है कि परमेश्वर ठीक ऐसा ही करनेवाला है! आज जितने भी लोग “स्मारक कब्रों” में मौत की नींद सो रहे हैं, उन्हें वह दोबारा ज़िंदा करेगा। (यूहन्ना 5:28,29, NW) जब यहोवा उनका पुनरुत्थान करेगा, तब वह उनके लिए एक नया शरीर तैयार करेगा, और उनके अंदर जीवन-शक्ति डालकर उन्हें ज़िंदा करेगा। वह क्या ही खुशियों भरा दिन होगा!
बाइबल में “प्राण” और “आत्मा” शब्द का जिस तरह इस्तेमाल किया गया है, इस बारे में अगर आप ज़्यादा जानना चाहते हैं, तो आपको ब्रोशर मरने पर हमारा क्या होता है? (अँग्रेज़ी) में औररीज़निंग फ्रॉम द स्क्रिप्चर्स किताब के पेज 375-84 पर बढ़िया जानकारी मिलेगी। इन्हें यहोवा के साक्षियों ने प्रकाशित किया है।
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