पुनर्जन्म और आवागमन पर कन्फ्यूज दयानंद

आम नीम का पर्यायवाची कैसे हो सकता है!!?

 

पुनर्विवाह, पुनर्निमाण, पुनर्जागरण वैसे ही पुनर्जन्म.चतुर्थ समुल्लास में दयानंद ने मनुस्मृति के कुछ श्लोकों द्वारा परलोक के सुख हेतु कुछ उपाय बताये हैं.यहाँ स्वामी ने परलोक और पुनर्जन्म दोनों को एक ही अर्थ में लिया है. मनुस्मृति के जो श्लोक उन्होंने उद्धृत किये हैं. वे परलोक की सफलता पर केंद्रित है न कि आवागमनीय पुनर्जन्म पर.स्वामी की धारणाओं और तथ्यों में विरोधाभास बहुत है.वेद विषयों में दयानन्द के संदिग्ध और अप्रमाणिक ज्ञान है. अंत में दयानन्द ने कह दिया. पुनर्जन्म अनुमान ही है. इसी अनुमान को सत्य मान लो...Published from Blogger Prime Android App

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