आरक्षण
वर्तमान सरकार Lateral entry के नाम पर धीरे धीरे आरक्षण खत्म कर रही है..
#आरक्षण ले लो..आरक्षण।।
आईये,जिन जिन को आरक्षण चाहिए,आईये और अपना अपना आरक्षण ले जाईए. आखिर तो रोटी एक ही है और उसका आकार भी वैसा ही है. इसके जितने टुकड़े आप कर सकें, कर लीजिए. हम तो कहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय 50प्रतिशत की अपनी लक्ष्मण रेखा भी मिटा दे.फिर तो सब कुछ सबके लिए आरक्षित हो जाये....
फिर आप पायेंगे कि आरक्षण के इस जादुई चिराग को रगड़ने से भी हाथ में कुछ नहीं आया. ना जीविका ना अजीविका!!!रोटी तो एक ही है और हममें से कोई नहीं चाहता कि रोटियां कई हों और उसका आकार भी बड़ा होता रहे ताकि आरक्षण की भीख मांगने की जरूरत ना हो.सब चाहते यही हैं कि जो है उसमें से"हमारा"हिस्सा आरक्षित हो जाये....
आरक्षण की व्यवस्था पहले एक विफल समाज के पश्चाताप का प्रतीक हुआ करता था. आज यह सरकारों की विफलताओं की घोषणा करता है. हर तरफ से उठ रही आरक्षण की मांग बताती है कि देश चलाने वाली तमाम सरकारें सामान्य सवैंधानिक मर्यादाओं में बंधकर ना तो देश चला सक रही है. ना बना पा रही है. जब हम अपने पांवों पर चल नहीं पाते हैं तभी बैशाखी की जरूरत होती है... विचार करें हम चूके कहाँ हैं??

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