कश्मीरी पंडितों की सच्चाई??

काश्मीर और काश्मीरी पंडित

इस लेख को लिखने का आशय उस सच को सामने लाना है श संघ के लोग हर समय काश्मीरी पंडितों पर हुए अन्याय और कत्लेआम को शेष भारत के मुसलमानों के सामने रखकर उन्हें गालियाँ देना शुरु कर देते हैं जब भी कश्मीरियों पे जुल्म की बात होती है तो ये अमन के दुश्मन धर्म के नाम पर समाज में जहर घोलने वाले लोग कश्मीरी पंडितो की बात करके खून को खून से धोने की कोसिस करते है जब की हक़ीक़त यह है की कश्मीरी पण्डित आज भी सर्कार के पैसो पर पल रहे है 

दरअसल संघ ने  झूठ का सहारा लेकर और अपने समर्थकों के हृदय में यह भर दिया कि काश्मीर में मुसलमानों ने काश्मीरी पंडितों को वहाँ से भगा दिया जो इधर उधर भटक रहे हैं और काश्मीरी पंडितों की हत्याएं भी कर दी
जो विषय काश्मीर में एक समग्र आतंकवाद का था उसे हिन्दू और मुसलमानों में बांट कर काश्मीरी मुसलमानों को भारत से दूर कर दिया

कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानने वालों का खून उस वक़्त क्यों नही खौलता है जब कश्मीरीयो पर जुल्म होती है उनकी बहन बेटियो की इज़्ज़त को तार तार किया जाता है 
उस वक़्त हमें गुस्सा क्यों नहीं आता  हम मोमबत्तियां लेकर सड़कों पर विद्रोह करते नजर क्यों नहीं आते है

इस लेख को लिखने के लिए जब मैने तथ्यों की पड़ताल  किया तो हैरान रह गया देख कर कि काश्मीरी पंडितो की हत्या से संबंधित लगभग सैकड़ों भगवा वेबसाइट्स गलत आंकड़ों और तथ्यों के साथ किस तरह समाज में गलत तस्वीरें पैदा कर रही हैं और अधिकांश वेबसाइट एक ही लेखों और आंकड़ों के साथ झूठा प्रपंच फैला रही हैं , वेबसाइटों के नाम अलग अलग और उसपर उपलब्ध सामग्री सब एक जिसमें एक मात्रा का भी अंतर नहीं। 
उनके नामों से ही लगता है कि वह किस गिरोह की वेबसाइट्स हैं और किस उद्देश्य से हैं।

1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार भाजपा और वाम मोर्चा के सहयोग से बनती है और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद तब भारत के गृहमंत्री बन जाते हैं , उनकी बेटी डाक्टर रूबिया सईद का आतंकवादी अपहरण कर लेते हैं तब देश को काश्मीर के आतंकवाद का पता चलता है , गृहमंत्री की बेटी देश से महत्वपूर्ण साबित हुई और विश्वनाथ प्रताप सिंह की  सरकार काश्मीर के तब तक के सबसे बड़े पाँच आतंकवादियों को छोड़कर गृहमंत्री की लाडली की रिहाई कराती है।
फिर हजरत बल दरगाह पर कब्ज़ा करके पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने देश को काश्मीर के आतंकवाद की ओर ध्यान दिलाया 

संघ और भाजपा के दबाव में संघ के चहेते  जगमोहन को काश्मीर में राज्यपाल बनाकर भेजा गया और आतंकवाद प्रभावित काश्मीर को उन्होंने समग्र रूप से देखने की बजाए हिन्दू मुस्लिम के आधार पर विभाजित कर दिया ।

पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की चपेट में सब आए सब मारे गये , कहीं काश्मीरी पंडित तो कहीं काश्मीरी मुस्लिम , हिन्दू भी मरे तो मुस्लिम भी मरे पर जगमोहन ने दोगलापन दिखाते हुए काश्मीर की घाटी से केवल काश्मीरी पंडितों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया और संघ ने काश्मीरी पंडितों की लाशों को गिनना शुरु कर दिया जिससे पूरे भारत में बरगला कर ज़हर फैलाया जा सके।

मुस्लिम काश्मीरी वहीं आतंकवाद से मरने के लिए छोड़ दिये गये। दरअसल काश्मीर के आज की स्थिति के लिए जिम्मेदार  जगमोहन ही है जिसने मुसलमानों से नफरत के कारण घाटी को निर्दोष लोगों के खून से लाल कर दिया और यह आजतक होता आ रहा है।
 तक विकीपीडिया के अनुसार 47000 काश्मीरी मारे जा चुके हैं ( लिंक देखिए ) 

https://hi.m.wikipedia.org/wiki/भारत_में_आतंकवाद

और इस 47000 में काश्मीरी पंडितों की संख्या कुल 209 मात्र है जिसमें 7 काश्मीरी पंडित संग्रामपुरा 21-22 मार्च 1997 , 25 जनवरी 1998 को वंधमा में 23 काश्मीरी पंडित , और नदीमार्ग में 25 जनवरी 1998 को 24 काश्मीरी पंडित मारे गये , बाकी जो हैं वह अलग अलग घटनाओ में मारे गये।

http://archive.indianexpress.com/news/209-kashmiri-pandits-killed-since-1989-say-jk-cops-in-first-report/305457/

यह आंकड़े "दी हिन्दू" और "इकनॉमिक्स टाईम्स" के दिए आंकड़ों के अनुसार हैं कोई मनगढंत आंकड़े नहीं हैं हालाकि तब तक 46600 अन्य मुसलमानों के मारे जाने की कोई चर्चा कहीं नहीं होती।

http://www.thehindu.com/todays-paper/219-kashmiri-pandits-killed-by-militants-since-1989/article734089.ece 

काश्मीरी विस्थापितों के संगठन "काश्मीर पंडित संघर्ष समिति" के अध्यक्ष संजय टिकू के अनुसार इन 20-25 वर्षों में काश्मीरी पंडितों की 399 तो प्रमाणित हत्याएं हुईं और यदि अप्रामाणित को भी जोड़ दें तो अधिकतम 600 काश्मीरी पंडितों की आतंकवादियों ने हत्याएं की जबकि इतने वर्षों में कुल लगभग 47000  हत्याएं काश्मीर में हुईं तो 46400 लोग कौन थे जिनको मारा आतंकवादियों ने ? 

निश्चित रूप से मुस्लिम थे।टिक्कू काश्मीरी पंडितो के 3000 या 4000 की हत्या होने की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हैं ।( लिंक देखिए )।

http://articles.economictimes.indiatimes.com/2011-06-19/news/29676901_1_kashmiri-pandit-jammu-and-kashmir-photo-exhibition

दरअसल संघ की अफवाहबाज टीम ने ऐसा प्रचारित कर दिया कि काश्मीर में केवल काश्मीरी पंडित ही मारे गये और यह मुसलमानों ने किया कि घाटी खाली हो जाए तो जो 46400 लोग मारे गये वह किस लिए ? क्या खाली करने के लिए ? 
जम्मू कश्मीर की सरकार के अनुसार मृतक काश्मीरी पंडितों के 399 परिवारों को लगभग 40 करोड़ का मुआवजा दिया जा चुका है ( लिंक देखिए ) । 

http://www.bbc.com/hindi/india/2015/04/150416_kashmiri_pandit_resettlement_rd

जगमोहन ने मुसलमानों को आतंकवाद से मरने के लिए छोड़ कर एक लाख चालिस हजार जो काश्मीरी पंडितों को घाटी से निकाला , मुस्लमान और हिन्दुओं की अन्य जातियाँ और सिख भी वहाँ आतंकवाद से वैसे ही प्रभावित थे परन्तु उनकी आवाज़ आपने नहीं सुनी होगी। 

बस काश्मीरी पंडित सरकारी मदद मुआवजे और पुनर्वास का सरकारी लाभ और प्रति व्यक्ति ₹10000/= की सरकारी पेन्शन लेकर अपने अपने जगह पूरे भारत में या विदेशों में "सेट" हो गये हैं बाकी वहीं मर रहे हैं।

ध्यान रहे कि केन्द्र सरकार ने सैकड़ों करोड़ का धन केंद्रीय बजट में इनके लिए दिया है ।कभी सुना है गुजरात मेरठ मलियाना हाशिमपुरा मुजफ्फरपुर कानपुर मुम्बई सूरत के दंगों में मारे गये परिजनों के लिए बजट मे एलोकेशन ? या रणवीर सेना के द्वारा बाथे लक्षमणपुर में 60 दलितों की हत्या हुई उनके परिजनों के लिए कोई एलोकेशन ? तब तो एक तरफ दंगा चलता रहा दूसरी तरफ सैफई में माधुरी दीक्षित ठुमके लगाकर सबका मनोरंजन करती रहीं । 

यही है दोगलापन ध्यान दीजिये कि यदि देश सिर्फ काश्मीरी पंडितों के लिए रोता रहेगा और काश्मीर के अन्य लोगों को इग्नोर करता रहेगा तो हम कश्मीरियों को ना कभी अपना बना सकते हैं ना काश्मीर को बचा सकते हैं । 

काफी दिन पहले मेरा एक दोस्त बोर्डर पे था उससे बातो बातो में कश्मीर की जिक्र हुई तो उसने मुझसे बताया की काश्मीरी कहते है आप हिन्दू हो या मुस्लिम हम कश्मीरियों को फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हमारे घर से जब लाशें उठती हैं तो  हमारे साथ हिन्दुस्तान का हिन्दू जो बर्ताव करता है वही आप भी करते हो 

मेहरबानी करके मेरे सवालों के जवाब अब आगे कश्मीरी पंडितों का नाम लेकर मत दीजिएगा। कश्मीर में अब तक पिछले 30 साल में 1 लाख से अधिक लोग मारे गए हैं। उनमें से कितने कश्मीरी पंडित हैं ? 

अगर काश्मीरी पंडित काश्मीर को अपनी जमीन कहते हैं तो वहां जाएं, रहें और सामना करें जैसे वहाँ का मुसलमान अन्य हिन्दू सिख कर रहे है ।

आखरी में यही कहना चाहूँगा की काश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ वह दुखद है उनके साथ जितनी मदद हो किया जाए परन्तु शेष का क्या कसूर जो 1989 से आज तक प्रतिदिन काश्मीरी पंडितों जैसी घटनाओं को बर्दाश्त कर रहे हैं  मारे जा रहे है उनका क्या ?
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