दमिश्क सीरिया पर बाईबल की भविष्यवाणी पूरी.

दमिश्क (अरबी: دمشق उच्चारण: दिमश्क़) सीरिया की राजधानी और सीरिया का सबसे बड़ा नगर है। देश के दक्षिण-पश्चिमी कोने में, लेबनॉन की सीमा के निकट बसा ये शहर ऐतिहासिक है, आज इसकी जनसंख्या ४५ लाख है। दमिश्क विश्व के प्राचीनतम नगरों में गिना जाता है और जहाँ आज भी लोग रह रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि दमिश्क में ८००० से १०००० ईसा पूर्व में लोगो ने रहना प्रारंभ कर दिया था।मेरे प्रिय भाई-बहने हमारा परमेश्वर कोई काल्पनिक परमेश्वर  या कोई कथा कहानीयो वाला परमेश्वर नही है, परमेश्वर सत्य है, परमेश्वर का वचन सत्य और अटल है, क्युन्कि परमेश्वर ने खुद कहा है-

👉मैं तुम लोगों से सच कहता हूँ − आकाश और पृथ्‍वी भले ही टल जाएँ, किन्‍तु व्‍यवस्‍था की एक मात्रा अथवा एक बिन्‍दु भी पूरा हुए बिना नहीं टलेगा ।
मत्ती 5:18

👉धन्य है वह जो इस भविष्यद्वाणी के वचन को पढ़ता है, और वे जो सुनते हैं और इस में लिखी हुई बातों को मानते हैं, क्योंकि समय निकट आया है॥
प्रकाशित वाक्य 1:30

दमिश्‍क के विषय में नबूवत : देखो दमिश्‍क नगर, अब नगर नहीं रह जाएगा, वह खण्‍डहरों का ढेर बन जाएगा।  सीरिया के नगर सदा के लिए उजड़ जाएंगे; वे केवल पशुओं के झुण्‍ड के लिए चरागाह बनेंगे। पशु उनपर निश्‍चिंत लेटेंगे, उनको वहाँ कोई डराएगा नहीं।  एफ्रइम राज्‍य का गढ़ और दमिश्‍क की राज्‍य-सत्ता विलुप्‍त हो जाएगी। सीरिया देश के बचे हुए लोगों का भविष्‍य और इस्राएलियों के वैभव का अन्‍त एक- जैसा है। स्‍वर्गिक सेनाओं के प्रभु का यही कथन है।
यशायाह 17:1‭-‬3

दोस्तों आप सब जानते हैं बीते दिनो सीरिया में क्या हुआ, इसके पतन की  भविष्यवाणी बाइबल में बहुत साल पहले ही की जा चुकी थी.....

हम सब इस घटना से बहुत दुखित है, जिस परिवार ने जो खोया है ये दर्द,आंसू हम देख सकते हैं महसूस कर सकते हैं.....लेकिन जो कुछ भी हुआ या हो रहा है, यह सब परमेश्वर दिखा रहे हैं कि देखो जो भी परमेश्वर के बार-बार समझाने पर भी लोग हमेशा परमेश्वर के विरोध में ही रहे हैं, जब परमेश्वर का क्रोध भड़कना शुरु होता है तो ऐसा होना निश्चित है.....

हम सब कहते हैं कि परमेश्वर प्रेम है, पर परमेश्वर का एक और रूप भी है जो जलन रखने वाला परमेश्वर कहलाता है....

जब हम किसी से बहुत प्रेम करते है और वो ही अगर आपको धोखा दे तो हमारा क्रोध भड़कता है क्योंकि हमारी भावना उसके साथ जुड़ी होती है...बहुत अत्याधिक प्रेम करने और मानने लगते हैं....

उसी प्रकार हमारा परमेश्वर भी है जो हमसे इतना प्रेम करता है जितनी भावनाओ के साथ हम संसार मे किसी दूसरे के साथ करते हैं....
 
इसलिए परमेश्वर के विरोध में कोई काम ना करे....

बाइबल काल्पनिक, कथा, कहानी, अश्लिलता, भरी नही है वो साफ़ साफ़ परमेश्वर के प्रेम, क्रोध, शाप,आशीष, दया, अनुग्रह, मनुष्य का पाप, परमेश्वर की क्षमा, परमेश्वर से रिश्ता, अनंत जीवन, भविष्यवानिया, आदि चिज़ो को दर्शाता है.....

जीवित हो तो मान लो उस परमेश्वर को
आज के समय में मनुष्य अपने पूरे जीवनकाल में एक ना एक बार किसी भी रूप में परमेश्वर का सुसमाचार उस तक पहुंचता ही है.....
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GOD BLESS U

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