कन्वर्टिड कन्फ्यूज्ड दयानन्द...
#कन्वर्टेड_कन्फ्यूज्ड_दयानन्द●●●
दयानंद कई बार कन्वर्ट हुए....
यह उनके खुद के जीवन चरित्र आत्मकथा से स्पष्ट है. उसने बताया है एक संत मिले उससे प्रभावित होकर #अद्वैत वाद स्वीकारा पहले उनका परिवार पौराणिक मान्यताओं को मानता था. उसी संत ने मूलशंकर का नाम #शुद्धचेतन रखा.कपड़े बदलवाया.
पृष्ठ २७पर दयानंद ने लिखा है-"ब्रहमानंद आदि सत्पुरुषों ने मुझको पूरा पूरा विश्वास दिला दिया कि ब्रह्म अर्थात ईश्वर मुझसे भिन्न कोई पदार्थ नहीं है."
"जीव और ब्रह्म की एकता का निश्चय मुझे सम्यक् करा दिया, पहिले भी प्रायः मेरे मन में यह बात आती थी परन्तु आज इन महात्मा पुरुषों ने इस बात की मेरे मन में पूरे प्रकार से सिद्ध करके दिखा दिया और मुझे पूरा पूरा विश्वास हो गया कि #ब्रह्म_मैं_हूँ...
फिर परमानंद सरस्वती का पाँव पकड़ा और नाम रखा गया #दयानंद_सरस्वती◆
#मूलशंकर से #शुद्धचेतन...
#शुद्धचेतन से #दयानंद_सरस्वती.... फिर #स्वामी बने फिर #महर्षि.
आगे स्वामी के चेले उसे भगवान राम कृष्ण और सायणाचार्य आदि ऋषियों से भी ऊँचा बताकर भगवान बनाने में लगे हैं.
पहिले ब्रहमचारी संत के चेले शुद्धचेतन बने फिर ब्रह्मानंद आदि की संगति में उनको पूरा पूरा विश्वास हो गया "मैं ही ब्रह्म हूँ.
तदुपरान्त परमानंद सरस्वती अद्वैत वादी अर्थात शड्ंकरमत के सन्यासी के शरण में गये.लम्बे समय तक उसी मत के अनुयायी रहे और अपने को परमपूर्णब्रह्म समझते रहे.
इसके बाद फिर से गुरु बदला और परमविद्वान #विरजानंद को गुरु बना लिया.वह भी अद्वैत वादी थे.
आगे दयानंद बताते हैं किसी सत्पुरुष के समझाने पर अद्वैत वाद को झूठ मान लिया और द्वैत वादी में कन्वर्ट हुए.अब शंकराचार्य के मत का खण्डन करने लगे!
◆उसने कई रुप और मत बदला.!
जीवनपर्यंत गुरु विरजानंद को अपना परमगुरु और परमविद्वान बताते थे और फिर उन्हीं के मत को झूठा कहने लगे.!
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