पुनर्जन्म कयासी अवधारणा मात्र है.
मरने के बाद आवागमन पुनर्जन्म
या हिसाब किताब??
चलिए हम पहली बात पर विचार करते है अगर मौत के बाद पुनर्जन्म होता है तो क्या होगा
पुनर्जन्म यानी आवागमन बार बार पैदा होना
और बार बार मरना
कहा जाता है कि चौरासी लाख योनी है, जिसमें मनुष्य को जन्म लेना होता है और कोई कहता है कि ये चौरासी लाख योनी मैं जन्म मनुष्य के कर्म के अनुसार होते हैं जिसके कर्म अच्छे होते हैं उसे अच्छी योनी में जन्म मिलता है
जबकि विज्ञान के अनुसार हजारों लाखों साल पहले दुनिया मैं बड़े बड़े जिव डायनासोर रहते थे
इस धरती पर मनुष्य से पहले जानवर आये जब मनुष्य थे ही नही फिर वह जानवर किस कर्म के अनुसार जानवर योनि में पैदा हुए थे?
फिर हम देख रहे हैं कि जैसे जैसे समय बीत रहा है मानव जाती कि जनसंख्या बढती जा रही है ,
तो फिर बाकी मानुष कहाँ से आ रहें है
जबकि पुनर्जन्म ही हो रहा है..
और कुछ तो ये कहते हैं कि ,
बहुत अच्छे कर्म करने वाला मनुष्य मुक्ति पा लेता है फिर वह पुनर्जन्म नहीं लेता। फिर ये मनुष्य की जनसख्या बढ़ती क्यों जा रही है बल्कि इस हिसाब से तो कम होनी चाहिए.
अगर कर्मों के आधार पर योनी में जन्म होता है
तो मनुष्य योनी सबसे अच्छी है
फिर इतने मनुष्यों कि जनसंख्या क्यों बड रही है ,
जबकि अभी कलयुग चल रहा है और इस युग मैं पापी ज्यादा है।
इस हिसाब से तो मनुष्यों कि जनसंख्या कम होनी चाहिए थी और दूसरे निम्न योनी वाले जंतु ज्यादा होने चाहिए थे
आप देखेंगे की जो बाहर देश या यूरोप वगैर के कुत्ते बिल्ली है वह बाकि जगहों के इंसानो से ज्यादा खुशहाल रहते है उन्हें जो खाने पिने के लिए मिलता है उन्हें जो सुविद्धा मिलती है मिलती है ऐस मौज में रहते है वह बाकि जगहों के इंसानो को नही मिलती है फिर वह किस पाप की सज़ा ऐस मौज़ करके काट रहे है ।
ईश्वर पूरी सृष्टि का करता धरता है और कहते हैं कि ईश्वर अन्याय नहीं करता है ईश्वर सबके साथ न्याय करेगा जो जैसा करेंगे उस को सजा जरूर देगा।
पुनर्जन्म भी न्याय करने कि एक प्रक्रिया मानी जाती है।
यानि जिसने बुरे काम किये उसे ईश्वर अगले जन्म मैं निम्न योनी मैं पैदा करता है ,
जिससे वह अपने कर्मों का फल भुगते ,
लेकिन उस बेचारे को तो सजा मिल रही है ,
पर उसे ये नहीं मालूम होता कि किस बात कि सजा मिल रही है।सजा देने का उद्देश्य सुधार होता है. फिर सवाल यह है कि बिना अपराध बोध के दण्ड या सजा देने से सुधार कैसे संभव होगा?
कभी कभी मानुष योनी में भी जब कोई विकलांग पैदा होता है या बाद में उस पर कोई मुसीबत आती है और वह विकलांग हो जाता है तो लोग कहते है इसके पिछले जन्म का पाप है।
अब ऐसे लोगो के साथ दया करें या घिर्णा क्यों की वो तो पिछले जन्म का पापी है
लेकिन बेचारे को ये नहीं मालूम होता है कि उसने पिछले जन्म मैं क्या पाप किये थे।
तो ये कैसा न्याय है कि ईश्वर उसे सजा देता है पर उसे नहीं मालूम कि उसे किस चीज कि सजा मिल रही है।
क्या ऐसी कोई अदालत है जो बिना जुर्म बताये सज़ा देती हो
दुनिया में किसी भी देश का ये कानून नहीं कि वह जब मुजरिम को सजा दे तो उसे नहीं बताये कि उसने क्या जुर्म किया।
दूसरी बात ये कि जिस पर जुल्म हुआ उसकी सजा जुल्म करने वाले को दी जा रही है कि नहीं ये भी जुल्म सहने वाले को पता नहीं।
अगर पुनर्जन्म को माने तो पाप करना अनिवार्य हो जाता है क्यों की जब तक पाप नही करेंगे पेड़ पौदा खनिज पदार्थ गाय भैस बकरी वगैरह में जन्म नही होगा और हम खाने पिने शौख सजावट के सामानों से वंचित रह जायेगे खाने पिने पर भी मुहाल हो जायेगा
यानि पाप करना अनिवार्य हो गया
आप ने देखा होगा हम पोलियो कुपोषण वगैरह का टिका लेते है यहाँ तक की गांव शहर स्कुल तक घुम घुम कर टिका दिया जाता है
ताकि बच्चा कुपोषण विक्लांक ना पैदा हो और जो पैदा हो चुके है उन्हें ये बीमारिया न हो और होता भी ऐसा ही है हम ऐसी बीमारियो से बच जाते है
यानि यहाँ पुनर्जन्म में पिछले जन्म की पापो की सजा देने पे रोक लगाया जा रहा है ईश्वर की निति को इंसानो द्वारा समाप्त किया जा रहा है
यहाँ भी इंसानो के सामने ईश्वर कमजोर लाचार मजबूर नज़र आ रहा है। आवागमन पुनर्जन्म को मानने के बाद मन में ऐसे आज़ारो सवाल आते है तर्क दलील बुद्धि से बिलकुल प्रे होता है
फिर ईश्वर ऐसा अन्याय क्यों करेगा
इस पुनर्जन्म वाले सिद्धांत मैं तो ये भी नहीं पता चलता कि ईश्वर ने ये दुनिया क्यों बनाई
कुछ कहते है लीला (खेल) करने के लिए
लेकिन ईश्वर ऐसा क्यों करेगा
ईश्वर को खेल खेलने की क्या आवशकता
2. चलिए अब दूसरे पहलु पर गौर करते है
मौत के बाद हिसाब किताब
ईश्वर ने मनुष्य को दुनिया में परीक्षा हेतु भेजा ताकि कि वह ये लोगों को बता दे कि कौन बुरा है और कौन अच्छा
इंसान जिस तरह अपनी जिंदगी में परिश्रम करता है जैसे वो पैदा होता है उसे चलने फिरने और खाने पीने में परिश्रम करना पड़ता है सीखने के लिए परिश्रम करना पड़ता है थोड़ा बड़ा होता है इल्म हासिल करने के लिए परिश्रम करना पड़ता है । किसी अच्छे मुकाम पर जाना हो या किसी छोटे मुकाम पर जाना हो उसे परिश्रम करना पड़ता है । उसे खाने का सामान जुटाने के लिए परिश्रम करना पड़ता है । उसे अगर अपने मोहल्ले में रहना है तो सब्र का इम्तेहान करना पड़ेगा ।
अल्लाह ने इंसान की जिंदगी और इस कायनात में निशानियां रखी है तो इंसान का यह व्यवहारिक परिश्रम परीक्षा भी इसी बात को दर्शाता है कि ये हमारा परिश्रम परीक्षा चल रहा है
जैसे की हमारे माता पिता हमे जन्म देते है फिर हमे इंजीनियर डॉक्टर मास्टर वगैरह बनाना चाहते है जिसके लिए हमे काफी परिश्रम करना पड़ता है बहुत सारे परीक्षा (इम्तेहान) देनी पड़ती है
जिसका फल भी हमे मिलता है
परीक्षा (इम्तेहान) में पास हुवे तो अच्छा फल
और अगर अपने माता पिता के आज्ञाओ को नकारते हुवे परीक्षा (इम्तेहान) में फेल हुवे तो
चोर डकैत गुंडा मवाली बनेगे जिसका बुरा फल भी हमे मिलता है
ईश्वर ने जो भी नियम हम मानवजाति के लिए बनाया है उसे दुनिया में भी हमारे ऊपर किसी ना किसी रूप में दर्शा दिया है बस देखने समझने सोचने की सही नजरिया होनी चाहिए
ईश्वर ने दुनिया में मनुष्य को खलीफा बना कर भेजा है मनुष्य की सारी जरुरतो की खाने पिने शौख मनोरंजन का सामान मुहैया कराया है
जैसे की फल फ्रूट खनिज पदार्थ जानवर पशू वगैरह जिनमे जिव तो है पर जीवन नही जिनका कोई हिसाब किताब भी नही
यहाँ परीक्षा मनुष्य का है हिसाब किताब भी मनुष्य का ही होगा
उनके द्वारा दुनिया में किये गए कर्मों के आधार पर होगा।
ईश्वर ने आमिर गरीब भी बनाया है ताकि एक दूसरे का कार्य कर सके एक दूसरे का मदद सहायता कर सके
अगर सब एक सामान रहते तो कौन किसका मदद करता
ईश्वर ने लाचार मजबूर भी बनाया है ताकि मनुष्य के दिल में एक दूसरे के प्रति दया करुणा अफ़सोस शुक्रगुजार जैसी चीजे भी कायम रहे
दूसरी तरफ ईश्वर ने ऐसे लोगो का मदद सहायता करने पे भी जोर दिया है आप के पास जो दौलत है उसमे गरीब मजबूर जरूरतमन्द लोगो का हिस्सा भी बताया है
और जो मनुष्य जिस आधार पर है उसका हिसाब किताब भी उसी आधार पर होगा
मनुष को दुनिया मैं एक बार मौका मिलता है ये साबित करने का कि वह अच्छा है या बुरा उसके बाद उसको मौत आ जाती है ,
फिर वह दुनिया मैं कभी जन्म नहीं लेता।
इसी प्रकार हजारों हजारों सालों से अलग अलग मनुष्य जन्म ले रहे है और दुनिया में जी कर अपने को अच्छा और बुरा साबित कर रहे हैं।
फिर ईश्वर इन सभी को एक दिन जीवित करेगा और इनका हिसाब किताब करेगा कि लोग जान जाएँ कि वह अच्छे है या बुरे जिसने अच्छे कर्म किये होंगे वह स्वर्ग मैं रहेंगे और जिन्होंने बुरे कर्म किये होंगे वह नर्क मैं रहेंगे।
और सबके साथ न्याय होगा जिनको नर्क मैं सजा मिलेगी वह ये जानते होंगे कि उनको ये सजा क्यों दी जा रही है और जो स्वर्ग मैं होंगे तो उनको पता होगा कि वह स्वर्ग मैं क्यों है।
आप ये भी सोच रहे होंगे कि सबका हिसाब किताब
एक ही दिन क्यों जब जो मरे उसे तभी उसके कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नर्क मैं डाल देना चाहिए।
तो ऐसा है कि मनुष्य अपने छोटे से जीवन मैं कुछ अच्छे और कुछ बुरे काम ऐसे कर जाता है जिसका प्रभाव उसके मरने के कई साल तक होता है।
तो जैसा प्रभाव होगा उसे वैसे पुन्य या पाप मिलते रहेगे मरने के बाद भी
जैसे किसी ने पेड़ लगाया, या हॉस्पिटल खोला अब जब तक लोग उनसे फायदा उठाएंगे तब तक उसे पुन्य मिलेगा।
वैसे ही किसी ने जुआखाना खोला या शराबखाना खोला और मर गया तो उसे जब तक पाप लगेगा जब तक ये चालू रहेंगे।
और किसी ने किसी के साथ ज्यादती कि दुनिया मैं तो उसे उस दिन सजा मिलेगी और ज्यादती सहने वाला ये देख लेगा कि उस पर ज्यादती करने वाले को ईश्वर ने सजा दी।
अब दोनों बातें आप लोगो के सामने है।
आप लोग खुद निर्णय लें

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