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Showing posts from September, 2022

महर्षि का अनर्थ कामशास्त्र..

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#महा_ऋषि_का_अनर्थ_कामशास्त्र●●● मुखम्ँ सद्स्य शिर ऽ इत् सतेन जिह्वा पवित्रम् अश्विनासन्त् सरस्वती । चप्यं न पायुर् भिषग् अस्य वालो वस्तिर् न शेपो हरसा तरस्वी ॥ ~यजुर्वेद {१९/८८} दयानंद इसका अर्थ अपने यजुर्वेदभाष्य में यह लिखते हैं कि—“हे मनुष्यो! जैसे जिससे रस ग्रहण किया जाता है वह वाणी के समान स्त्री, इस पति के सुन्दर अवयवों से विभक्त शिर के साथ शिर करें तथा मुख के समीप पवित्र मुख करें इसी प्रकार गृहाश्रम के व्यवहार में व्याप्त स्त्री पुरूष दोनों ही वर्तें तथा जो इस रोग से रक्षक वैद्य और बालक के समान वास करने का हेतु पुरूष उपस्थेन्द्रिय (लिंग) को बल से करनेहारा होता है वह शान्ति करने के समान वर्तमान मे सन्तानोत्पत्ति का हेतु होवे उस सबको यथावत करे” लेकिन बाद में स्वामी जी ने सोचा होगा कि उनके नियोगी चैलें उनके इस अर्थ को समझ न सकेंगे इसलिए अपने शिष्यों के वास्ते अर्थ को थोड़ा और आसान बनाने के लिए स्वामी जी भावार्थ में यह लिखते हैं कि-- स्त्री पुरूष गर्भाधान के समय मे परस्पर मिलकर प्रेम से पूरित होकर मुख के साथ मुख, आँख के साथ आँख, मन के साथ मन, शरीर के साथ शरीर का अनुसंधान करके गर्भ का...

गिराये हुए दूतों और मनुष्य की पुत्रियों से संसर्ग और शूरवीर

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#ईसाइयों_से_पूछो●●●       👿ईसाइयों के ईश्वर का बेटा है तो उसकी पत्नी, सास,श्वसुर, साला और संबंधी कौन हैं.?      उत्पत्ति6:1-4 के संदर्भ में दुराग्रही तत्वों द्वारा अक्सर यही सवाल किये जाते हैं. बाईबल हरेक इंसान को ईश्वर की संतान बताती है.             और तुम्हारा पिता हूँगा, और तुम मेरे बेटे और बेटियाँ होंगे; यह सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर का वचन है।” (2 शमू. 7:14, यशा. 43:6, होशे 1:10) 2 कुरिन्थियों 6:18                 देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्‍वर की सन्तान कहलाएँ, और हम हैं भी; इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना। 1 यूहन्ना 3:1             बाईबल सारी मानव जाति को ईश्वर की संतान कहती है. इसका मतलब ये नहीं कि उसकी कोई बीवी है.या सैकड़ों वीवियां रही होंगी. हाँ संतानें बुरी या अच्छी हो सकती हैं. अच्छी संतानें पिता की कद्र जानती है और बुरी पिता के विरुद्ध चलती हैं.         उत्पति 6:1-4 परमेश्वर के पुत्र और मनुष्यों की पुत्रियों का उल्लेख करता है। परमेश्वर के पुत्र कौन थे? और क्यों उनकी सन्तानें जो मनुष्यों की पुत्रियों से उत्पन्न हुई. #...

मारानाथा

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*'मारानाथा' का मतलब क्या हैं ?*  मारानाथा एक अरामी शब्द है जिसका अर्थ है "प्रभु आ रहा हैं" या "आओ, हे प्रभु।" प्रारंभिक कलीसिया को बहुत ही उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था, और रोमन शासन के अधीन एक भी मसीह विश्वासी के लिए जीवन आसान नहीं था।  रोमियों ने सभी को यह भी घोषित किया हुआ था कि सीज़र (केसर) ही ईश्वर हैं। प्रारंभिक मसीही जानते थे कि केवल एक ही ईश्वर हैं और वो एक प्रभु-यीशु मसीह है- और वे अपने सभी अच्छे विवेक में  सीज़र को "प्रभु" नहीं कह सकते थे, इसलिए रोमियों ने उन्हें देशद्रोही के रूप में देखा, उन्हें सताया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। ऐसी ही प्रतिकूल परिस्थितियों में रहते हुए भी, विश्वासियों का मनोबल प्रभु के आने की आशा से झूम उठा था। "मारानाथा!" यहूदी अभिवादन शालोम ("शांति") के स्थान पर, उत्पीड़ित विश्वासियों का आम अभिवादन बन गया था।  यीशु के अनुयायी जानते थे कि उन्हें कोई भी शांति नहीं दे सकता हैं क्योंकि यीशु ने उन्हें ऐसा बताया था (मत्ती 10:34; लूका 12:51)। लेकिन वे यह भी जानते थे कि प्रभु अपने राज्य को स्थापित करन...

जीजस के खून में भी आदिपाप था!फिर जीजस निष्पाप निष्कलंक कैसे??

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#ईसाई_जीजस_को_निष्पाप_बताते_हैं_जबकि_आदिपाप_मरियम_से_होकर_जीजस_के_भी_खून_में_था !!!         आर्य बंधू, आपने बहुत अच्छा और सुन्दर तरीके से सवाल किया है. मसीहियत और बाईबल की सच्चाई से परिचित नहीं होने पर ही लोग ऐसे सवाल करते हैं.          बाईबल के अनुसार सच तो यह है कि जीजस पर ना मरियम का खून है ना ही किसी इंसान के वीर्य से उनका जन्म हुआ.     इब्रानि 10::5 से जैसा स्पष्ट है. उसके लिए पूर्व से ही देह तैयार था.अतः उस पर भी आदि पाप होने की बात सरासर गलत है अज्ञानता है.सामान्यतः संसार भर के सभी लोगों में वंश पिता से माना जाता है, इसीलिए लोग पुत्रों की इतनी लालसा रखते हैं - ताकि उनका वंश चलता रहे.किन्तु उत्पत्ति में परमेश्वर ने स्त्री के वंश की बात की अर्थात वह उद्धारकर्ता संसार की सामान्य रीति के अनुसार जन्म नहीं लेगा, उसके स्त्री के गर्भ में आने और जन्म लेने में किसी पुरुष का कोई कार्य नहीं होगा.साथ ही चूँकि उस जगत के उद्धारकर्ता को एक सामान्य मनुष्य के समान भी होना था, मनुष्यों के अनुभवों में से होकर निकलना था, और उन परिस्थितियों में भी अपने निष्पाप, पवित्र, निष्कलंक होने को कायम रखन...