मारानाथा
*'मारानाथा' का मतलब क्या हैं ?*
मारानाथा एक अरामी शब्द है जिसका अर्थ है "प्रभु आ रहा हैं" या "आओ, हे प्रभु।" प्रारंभिक कलीसिया को बहुत ही उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था, और रोमन शासन के अधीन एक भी मसीह विश्वासी के लिए जीवन आसान नहीं था। रोमियों ने सभी को यह भी घोषित किया हुआ था कि सीज़र (केसर) ही ईश्वर हैं। प्रारंभिक मसीही जानते थे कि केवल एक ही ईश्वर हैं और वो एक प्रभु-यीशु मसीह है- और वे अपने सभी अच्छे विवेक में सीज़र को "प्रभु" नहीं कह सकते थे, इसलिए रोमियों ने उन्हें देशद्रोही के रूप में देखा, उन्हें सताया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
ऐसी ही प्रतिकूल परिस्थितियों में रहते हुए भी, विश्वासियों का मनोबल प्रभु के आने की आशा से झूम उठा था। "मारानाथा!" यहूदी अभिवादन शालोम ("शांति") के स्थान पर, उत्पीड़ित विश्वासियों का आम अभिवादन बन गया था। यीशु के अनुयायी जानते थे कि उन्हें कोई भी शांति नहीं दे सकता हैं क्योंकि यीशु ने उन्हें ऐसा बताया था (मत्ती 10:34; लूका 12:51)। लेकिन वे यह भी जानते थे कि प्रभु अपने राज्य को स्थापित करने के लिए लौटेंगे, और इस सच्चाई से उन्होंने बहुत सांत्वना प्राप्त होती थी। इसीलिए वे लगातार एक दूसरे को यह याद दिलाते रहते थे कि प्रभु आ रहे हैं (लूका 21:28; प्रकाशितवाक्य 22:12)। यीशु ने इसी विषय पर कई दृष्टान्तों के द्वारा उन्हें जागते रहने और प्रतीक्षा करने और उसकी वापसी के लिए तैयार होने के लिए सिखाया (मत्ती 25:1-13; लूका 12:35-40)।
आज, हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह में विश्वास करने वाले लोग अपने जीवन को इस ज्ञान के प्रकाश में जीते हैं कि वह किसी भी समय आ सकते हैं। उसकी बुलाहट आने पर हमें तैयार रहना होगा। हर दिन हमें उसके आने की उम्मीद करनी चाहिए, और हर दिन हमें उसके आने की लालसा करनी चाहिए। मारनाथा हमें याद दिलाता है कि हम अपनी आँखें आत्मा की शाश्वत बातों पर रखें। भौतिक वस्तुओं पर ध्यान देना निरंतर मानसिक उथल-पुथल में रहना है। नीचे देखने पर हम पृथ्वी को देखते हैं; और अपने चारों ओर देखने पर हम सांसारिक चीजें देखते हैं। परन्तु ऊपर देखने पर हम अपने प्रभु यीशु मसीह के शीघ्र आने की आशा को देखते हैं। उन लोगों के लिए जो आज निराश हैं, मारानाथा! जो आज चिंतित हैं, उनके लिए मारानाथा! उन लोगों के लिए जो अपनी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, मारानाथा! हमारा प्रभु आ रहा हैं!
"और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जाएगा l" (मत्ती 24:14)
बाइबिल में मसीह यीशु का अंतिम दर्ज किया गया संदेश उनकी वापसी के "समय" के संबंध में हमारे सभी प्रश्नों का निर्णायक उत्तर है। "निश्चय मैं शीघ्र आ रहा हूँ" (प्रकाशितवाक्य 22:20)। यह शब्द "निश्चित रूप से" हमें प्रोत्साहित करने के लिए है, और "शीघ्र ही" शब्द हमें चुनौती देने के लिए। कलीसियाओं को यह ध्यान देने की आवश्यकता हैं कि यीशु ने अपने संदेशों में अक्सर "जल्दी" शब्द का प्रयोग किया (प्रका 2:5, 16; 3:11; 22:7, 12)। दोस्तों पहली शताब्दी के मसीहों द्वारा सचमुच माना जाता था कि यीशु जल्दी वापिस आ रहा हैं। यही एक कारण था कि वे एक दूसरे को "मारानाथा" शब्द के साथ अभिवादन कर रहते थे, जो एक अरामी शब्द हैं जिसका अर्थ है, "हे प्रभु, आओ!" (1 कुरिं 16:22)
यदि पहली सदी के मसीही लोग हर पल-मसीह की वापसी की उम्मीद के साथ जीते रहते थे, तो आज हमारी अपेक्षा कितनी ज़्यादा होनी चाहिए! हालाँकि, बाइबल हमें उसके आगमन के सम्बन्ध में किसी भी तिथि-निर्धारण के उत्साहित नहीं करती है। अपने बिदाई के शब्दों में मसीह ने अपने शिष्यों से कहा, "उन समयों या ऋतुओं को जानना तुम्हारे लिए ज़रूरी नहीं है, जिन्हें पिता ने अपने अधिकार में रखा है" (प्रेरितों के काम 1:7)। उसने पहले उनसे बार-बार कहा था, "इसलिये जागते रहो, क्योंकि तुम न तो उस दिन को जानते हो, न वह घड़ी को जिसमें मनुष्य का पुत्र आएगा" (मत्ती 24:42; 25:13)। लेकिन मनुष्य हमेशा वह जानने के लिए उत्सुक रहता है जो उसे जानने की जरूरत नहीं है! जब मसीह कहता है कि वह स्वयं नहीं जानता कि वह कब लौटेगा, तो हमें इसके बारे में उत्सुक क्यों होना चाहिए? (मरकुस 13:32)।
एक बात हम सुनिश्चित कर सकते हैं। वह यह कि, हम इस पीढ़ी में पिछली पीढ़ियों की तुलना में मसीह के दूसरे आगमन के बहुत ही करीब हैं। जैसा कि रिवाइवलिस्ट लियोनार्ड रेवेनहिल (1907-1994) कहा करते थे, "हम अंतिम दिनों में नहीं बल्कि अंतिम क्षणों में जी रहे हैं!" मसीह की वापसी से पहले जो कुछ होने की भविष्यवाणी की गई थी, वह सब लगभग पूरी हो चुकी है। सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक अर्थात् दुनिया भर में प्रचार अपने अंतिम चरण में है, और कलीसिया के इतिहास में किसी भी समय की तुलना में काम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है (मत्ती 24:14)। पाप बड़े पैमाने पर है और "अधर्म का कटोरा" भी उमड़ रहा है (मत्ती 24:12)। हक़ीम खड़ा है "दरवाजे पर!" (याकूब 5:9)।
तिथि-निर्धारण के बजाय, आइए हम संपूर्ण विश्व के छुटकारे हेतु संपूर्ण सुसमाचार प्रचार के लिए लक्ष्य निर्धारित करें! (प्रेरितों 1:7, 8) उन चिन्हों, दर्शनों और आवाजों के पीछे मत जाओ जो मसीह के दूसरे आगमन के बारे में नए प्रकाशन देने का दावा करते हैं (मत्ती 24:23-26)। ज्वलंत बाइबिल प्रकाशन से संतुष्ट रहें और उन रहस्यों की खोज न करें जिनके बारे में बाइबल चुप है (व्यवस्था. 29:29)।
अनाथेमा एक शब्द अरामी है और जिसका अर्थ है "शापित" (1 कुरिं 12:3)। "मसीह से प्रेम न करने का अर्थ उस पर विश्वास नहीं करना है, और अविश्वासी शापित हैं।" (यूहन्ना 3:16-21)
मारानाथा शब्द ग्रीक है और इसका अर्थ है "हमारा प्रभु आता हैं" या (प्रार्थना के रूप में) "हे हमारे प्रभु, आओ!" (प्रका0वा0 22:20) "यदि कोई व्यक्ति यीशु मसीह से प्रेम रखता है, तो वह उसके प्रकट होने से भी प्रेम करेगा (2 तीमुथियुस 4:8)।"
1 Corinthians 12:3
“διο γνωριζω υμιν οτι ουδεις εν πνευματι θεου λαλων λεγει αναθεμα
ιησους και ουδεις δυναται ειπειν κυριος ιησους ει μη εν πνευματι αγιω.”
1 कुरिन्थियों 12:3
इसलिये मैं तुम्हें चितौनी देता हूं कि जो कोई परमेश्वर की आत्मा की अगुआई से बोलता है, वह कभी भी यीशु श्रापित नहीं कह सकता है; और न ही कोई पवित्र आत्मा के बिना यीशु को प्रभु कह सकता है॥
प्रभु आप सब को बहुतायत से आशीषित करें!
अपने प्रभु की सेवा में,
रा. रेव्ह. विनोद मैसी
बिशप हरियाणा एवं राजस्थान डाइसिस एवं

Comments
Post a Comment