पहले गोमेध यज्ञ में गायों की बलि देने वाले ब्राम्हण को शर्मा (कसाई) कहते थे शर्मा शर्मन से बना है जिसका अर्थ काटना होता है। इन्हे ही शर्मा कहा जाता है।
पहले गोमेध यज्ञ में गायों की बलि देने वाले ब्राम्हण को शर्मा (कसाई) कहते थे शर्मा शर्मन से बना है जिसका अर्थ काटना होता है। इन्हे ही शर्मा कहा जाता है।
#आर्य समाजियों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवाल.. 🤔यहोवा ने भले बुरे ज्ञान के फल को आदम से झूठ बोलकर दूर क्यों रखा? 🤔ईसाइयों का ईश्वर सर्वज्ञ है,तो धूर्त शैतान को क्यों बनाया? 🤔वह पूर्व जन्म नहीं मानता तो बिना अपराध के शैतान को अपराधी क्यों ठहराया? 🤔शैतान को ईश्वर ने ही बनाया तो शैतानी कामों का भागीदार ईश्वर भी है. समाजी बंधुओं बाईबल समझने के लिए संपूर्ण बाईबल का अध्ययन आवश्यक है. खंडित आयतों से नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता. जिस तरह पके आम का स्वाद जानने के लिए आम के बौराने, फलने और पकने का इंतजार करना होगा. आम के बौर खा लेने से पके आम के स्वाद का अनुमान लगा पाना मुश्किल है. दयानंद जी ने यही हड़बड़ी की है. उन्होंने आम की पत्तियां चबाकर पके आम का स्वाद अनुमान और कयास बताया है. ईश्वर ने शैतान कभी नहीं बनाया ऐसे में यह कहना कि शैतान और उसके शैतानी कार्यों का भागीदार ईश्वर भी है. यह सर्वथा अनुचित है, गलत है. पूर्व जन्म मिथ्या है, कयास है अतः इस पर बातें करना ही समय जाया करना है.बाईबल के अनुसार ...
Rajkumar Kumar जी ये आपकी जिज्ञासा है या दुराग्रह?? अगर जिज्ञासा है तो आपने शायद बाईबल पढ़ी हो तो पूरे अध्याय को पढ़ा होगा?? ध्यान दें ईसा अंजीर के पेड़ के पास बगैर फल के मौसम में गए और फल की आशा रखी.अब आप कहेंगे ईसा इतने बेवकूफ थे कि बिना मौसम के फल चाह रहे थे!?? ईसा दृष्टांत में अपनी बात कहते थे. यही उनकी शैली थी.बाईबल में नौ फल बताये गए हैं. ,प्रेम,आनंद शांति, धीरज कृपा भलाई...विश्वास नम्रता और संयम... इंसानों में ये फल लगने चाहिए. बाईबल में दृष्टांत है जो पेड़ फल नहीं लाते वे काट डाले जायेंगे.... यह विषय विस्तृत है. संक्षेप में इस वाकये से यह समझा जाता है कि ईसा लोगों के निष्फल होने पर क्रोधित हुए.. पेड़ो में सिर्फ हरियाली थी और पेड़ निष्फल थे. नौ फल जो ऊपर बताया गया है वह हर इंसान में हर मौसम में लगे यही ईसा चाहते थे. इस अध्याय का सार यही है. आप सत्यार्थप्रकाश की बेतुके अर्द्ध सत्य मिथक को पढ़कर ऐसे दुराग्रह करते हैं. आप स्वध्याय करें तो जवाब मिल ...
यह मेरा प्रश्न नहीं है,लेकिन यह प्रश्न दो समूहों के बीच बहस के संदर्भ में आता है। मैं इस सबसे दिलचस्प धार्मिक विषय पर लिखना चाहता हूं, क्योंकि ये चर्चा करना बहुत आवश्यक है lइसे हाइलाइट करना अनिवार्य है, क्योंकि बहुत से महान व्यक्तियों ने या तो इसे बहुत दृढ़ता से विरोध किया या इसे अनुमोदित किया।यह चर्चा करना दिलचस्प है, क्योंकि इस मामले ने, कई लोगों को इस पर पूरे दिल से विश्वास करने के लिए आकर्षित किया है l यह मानव जाति तक पहुंचने के लिए ईश्वर का सबसे बड़ा प्रयास माना जाता है। यह चर्चा आवश्यक है, क्योंकि इस कहानी ने विश्वास करने के कारण दिए हैं।दूसरी ओर,कई लोग इसे अंधविश्वास के रूप में देखते हैं , इस कहानी को खारिज कर दिया,और निंदा की है।मैं सोशल मीडिया पर देखता हूं कि कई लोग इस कहानी पर विश्वास करने के कारण ईसाइयों के खिलाफ कठोर शब्द लिख रहे हैं। मेरा प्रयास दोनों पक्षों का विश्लेषण करना है, और पाठकों को अपना निर्णय लेने के लिए छोड़ देना है। सबसे पहले, देखते हैं कि विरोधी दल क्या कह रहा है। अदिति गर्ग, निम्नलिखित शब्दों में स्वामी दयानंद सरस्वती के विश्वास के बार...
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