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Showing posts from November, 2021

पुनर्जन्म सत्य या मिथ्या.. संवाद

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पुनर्जन्म तथ्य या मिथ्या?? भाग 3 नित नए विचारों का जन्म होता है ना कि आत्मा या शरीर का।      पुनर्जन्म थ्यौरी मिथ्या है सत्य नहीं. पुनर्जन्म से संबंधित तमाम ऐसे वीडियो,ऑडियो सामने आये जो जांच में झूठे साबित हुए हैं. जैसे 1:एक बालक पुनर्जन्म लेकर अपने हत्यारों को पकड़वाया.2:राजस्थान का एक बालक जिसे पिछले जन्म की सारी बातें याद हैं..वगैरह.ऐसे खबर जरूर सुर्खियों में रहे लेकिन अफवाह साबित हुए.         यादाश्त मस्तिष्क में संधारित होता है. व्यक्ति की मृत्यु के बाद मस्तिष्क भी खाक हो जाता है. माना पुनर्जन्म होता है आत्मा नए शरीर में प्रवेश करती है. यहाँ आत्मा का आना और जाना हुआ ना कि पुनर्जन्म. आत्मा जिस शरीर में प्रविष्ट हुई उसमें नया मस्तिष्क, नया ह्रदय और शरीर के तमाम इंद्रियां नई हैं ऐसे में पिछले जन्म की यादाश्त होना कतई संभव नहीं.आत्मा पिछले जन्म में राम पर थी अब रहीम की शरीर पर है. आत्मा पहले कीर्तन करती थी अब कलमा पढ़ती है...इसी संदर्भ में आर्य बंधु से चर्चाओं का हिस्सा प्रस्तुत है.. आर्य: हमारे आसपास जो कुत्ता-सुअर आदि पशु हैं वे नरक का जीवन जी रहे है...

एक कदम सत्य की ओर..

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  * एक_कदम_सत्य_की_ओर।। * * मनुष्य हजारों वर्षों से नैमित्तिक ज्ञानों के बल पर परमात्मा और आत्मा को समझने का प्रयास और प्रयोग करता आ रहा है. * * तमाम नजरिए हुए, दर्शन हुए, अनुभव साधना हुए,तमाम ज्ञान(वेद) हुए. कुछ नजरियों ने आत्मा को परमात्मा का अंश माना और शरीर की उपेक्षा कर दी.जिन कौमों ने ऐसा माना, उन्होंने ध्यान भक्ति का तो विकास किया लेकिन शरीर के लिए जरूरी औषध का विकास शिथिल रखा. तो कुछ शरीर को ही सबकुछ जानकर औषध का,योग कसरतों का खूब विकास किया.यहाँ आत्मा और आध्यात्म को तो माना मगर इसे शिथिल रखा गया. एक तबका ऐसा भी हुआ जिन्होंने आत्मा को तो माना मगर परमात्मा के अस्तित्व को नकार कर साबित ज्ञान(वेद)को ही अंतिम माना.यहाँ चार्वाक को भी स्थान मिला. *        * जबकि आत्मा और परमात्मा दोनों का वजूद है इसे आध्यात्म के प्रयोशाला में साबित किया जा सकता है. इस प्रयोग शाला का उत्पेरक धर्म,कर्म और विश्वास है.आत्मा और परमात्मा दोनों एक ही तंतु के दो छोर हैं. * * आत्मा शरीर धारी होकर परोक्ष रूप है जबकि परमात्मा अपरोक्षानुभूति का केंद्र है. *   ...

सर्व धर्म समाहारा..

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https://youtube.com/playlist?list=PLOc5eSY5TE-neOEm51dqLtv5x5ya21Nb- सभी मत बराबर हैं

गायत्रीमंत्र और दयानंद की अज्यानता लंगड़ा छंद..

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गायत्री मंत्र की छंद रचना में दोष बताने वाले हमें कई लोग मिले लेकिन इस विषय पर हमारा ध्यान प्रसिद्ध विद्वान डा. सुरेन्द्र कुमार शर्मा अज्ञात की लेखमाला ने प्रबल रूप से आकृष्ट किया। गायत्री मंत्र पर यह लेखमाला उनकी पुस्तक  ‘क्या बालू की भीत पर खड़ा है हिंदू धर्म ?‘  में प्रकाशित हुई और इसे निम्न पते से प्राप्त किया जा सकता है- प्रकाशकः विश्व विजय प्रा. लि., 12 कनॉट सरकस, नई दिल्ली, फ़ोन 011-23416313 व 011-41517890, ईमेलः mybook@vishvbook.com गायत्री मंत्र शुद्ध गायत्री छंद में नहीं हैः डा. सुरेन्द्र कुमार शर्मा अज्ञात डा. सुरेन्द्र कुमार शर्मा अज्ञात ने गायत्री मंत्र की आलोचना में जो कुछ कहा है और उनकी आलोचना पर आपत्ति करते हुए जो कुछ कहा गया है और फिर उन आपत्तियों के निराकरण में डा. अज्ञात ने जो कुछ कहा है, उससे गायत्री मंत्र के पक्ष-विपक्ष में सभी तर्क इस लेखमाला में एक जगह एकत्र हो गए हैं। इससे असल समस्या सबके सामने पूरी तरह आ जाएगी। इसके बाद हम अपना नज़रिया रखेंगे और बताएंगे कि इस समस्या का हल हक़ीक़त में क्या है ? डा. अज्ञात लिखते हैं कि जिस मंत्र को पकड़ कर रखा गया है, वह वास्त...

अंत समय में इंसान झूठ नहीं बोलता...

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अंत में झूठ का पर्दाफ़ाश हो जाता है स्वामी जी बताते हैं कि     ‘...चाहे कितनी भी चतुराई करे परन्तु अन्त में सच-सच और झूठ-झूठ हो जाता है।’ (सत्यार्थ प्रकाश,त्रयोदश.,पृ.349) अब स्वामी जी के इस सिद्धान्त के आधार पर स्वामी जी का अन्त देखते हैं। आप यह जान ही चुके हैं कि अन्तकाल में उनका हवन छूट चुका था। मृत्यु वाले दिन वह स्नान भी नहीं कर पाए थे। अब उनके बिल्कुल अन्तिम वाक्य देखिए। मृत्यु वाले दिन अर्थात 30 अक्तूबर 1883 ई. को शाम के 6 बजे स्वामी जी  पलंग पर सीधे लेटे हुए थे। उन्होंने कहा- ‘हे दयामय, हे सर्वशक्तिमान् ईश्वर, तेरी यही इच्छा है, तेरी यही इच्छा है, तेरी इच्छा पूर्ण हो, अहा! तैने अच्छी लीला की।’ (महर्षि दयानन्द स. का जीवन चरित्र, पृ.830) स्वामी जी ने अपने साहित्य में कहीं भी ईश्वर और सत्पुरूड्ढों के कर्मों को लीला नहीं कहा है लेकिन अन्तकाल आया तो जाते जाते वह ईश्वर के कर्म को भी ‘लीला’ कह गए। इससे समझा जा सकता है कि दुनिया से विदा होते समय उनके दिल में ईश्वर के प्रति किस प्रकार के भाव थे। स्वामी जी ने सत्यार्थप्रकाश में धूर्त, ठग और धोखेबाज़ों को ‘पोप’ की संज्ञा देकर ...

अंत के समय में आपका पछतावा क्या होगा??

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अंत समय में आप का रिग्रेट (पछतावा) क्या होगा ? ऑस्ट्रेलिया की ब्रोनी वेयर कई वर्षों तक कोई सार्थक काम तलाशती रहीं, लेकिन कोई फ़ॉर्मल ट्रेनिंग, क्वालिफ़िकेशन या अनुभव न होने के कारण बात नहीं बनी। फिर उन्होंने एक हॉस्पिटल की पैलिएटिव केयर यूनिट में काम करना शुरू किया। यह वो यूनिट होती है जिसमें टर्मिनली इल या लास्ट स्टेज वाले मरीज़ो को एडमिट किया जाता है। उसमें मृत्यु से जूझ रहे लाईलाज बीमारियों व असहनीय दर्द से पीड़ित  मरीज़ो की मेडिकल डोज़ धीरे-धीरे कम की जाती है और काउंसलिंग के माध्यम से उनकी स्पिरिचुअल और फ़ेथ हीलिंग की जाती है जिससे कि वे एक शांति पूर्ण मृत्यु की ओर उन्मुख हो सकें।  ब्रोनी वेयर ने ब्रिटेन और मिडिल ईस्ट में कई वर्षों तक मरीज़ो की काउंसलिंग करते हुए पाया कि मरते हुए लोगों को कोई न कोई रिग्रेट ज़रूर था। कई सालों तक सैकड़ों मरीजों की काउंसलिंग करने के बाद ब्रोनी वेयर ने मरते हुए मरीज़ो के सबसे बड़े पछतावे या रिग्रेट्स में एक कॉमन पैटर्न पाया। हम सब इस यूनिवर्सल ट्रुथ को जानते हैं कि मरता हुआ व्यक्ति हमेशा सच बोलता है, उसकी कही एक-एक बात इपिफ़नी (ईश्वर की वाणी) जैसी होती है...

विनाश का पुत्र:12

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@विनाश का पुत्र🔯:12 😈👹👹👹👹😈 ख्रीस्त विरोधी ईश निंदक विनाश के पुत्र के आने की तैयारियां कुछ इस तरह होंगी~~~ धार्मिक शिक्षाओं में कुछ धार्मिक प्रभावी तत्व महीन भ्रामक मिलावटें कर देंगे. युवा पीढ़ी अपना संयम और आत्मविश्वास खोने लगेगी, युवाओं में इंटरनेट, फेसबुक, व्हाट्सएप, लैपटॉप के प्रति रूझान बढ़ेगा. अपनी रचनात्मक कार्यों के बजाए इंटरनेट पर अपना अधिकतर समय खर्चेगा. वीडियो गेम और टून चैनलों के माध्यम से मानसिकता हैक होगी. हिंसक और कामुक बर्ताव को बढ़ावा देने के ईरादे से फिल्में म्यूजिक ईजाद होंगे. संयुक्त परिवार समाप्त होंगे, बुजुर्गों को तन्हा छोड़कर औलाद कमाई के लिए निकलेगी. मादक पदार्थों और फ्री सेक्स का चलन बढ़ेगा, लिव इन रिलेशनशिप,ट्रान्स जेंडर, पोर्न साहित्य,गेयसमाज और लिस्बन समाज को बढ़ावा दिया जायेगा बल्कि संसार होता हुआ भी दिख रहा है.......            विकासशील देशों ने आज समलैंगिकता को कानूनी करार किया है जिससे वैवाहिक संस्कार खेल और मजाक बन रहे हैं कुछ संस्थायें ऐसे अनैतिक प्रचलनों को संरक्षणऔर बढ़ावा दे रही हैं इनका उद्देश्य स्त्री पुरूष के पाक संबं...

भारतीय ब्यापक सागर हैं तालाब नहीं..

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हिंदुस्तान अपने विचारों के लिए सिरमौर था और आज भी है. उसके चिंतकों ने सिखाया था,चरैवेति चरैवेति क्योंकि ठहराव और मौत जुड़वा संतानें हैं. चिंतकों की विचारशाला में कई बड़े कद हुए. कर्णाद,पाणिनि, पतंजलि, चर्वाक,कौटिल्य, कबीर जैसे असाधारण चिंतक हुए बल्कि बाद में हमने कार्लमार्क्स, माओत्से, फ्रायड, नीत्शे, सावरकर, पेरियार, ओशो को भी सहिष्णुता से सुना है.        बौद्धिक और आध्यात्मिक कद के ये शीर्ष पुरूष अंधेरे में महासागर में डूबते उतरते इंसानी जहाजों के लिए लाईट हाऊस हैं. विवेकानंद जी ने अद्भुत वाक्य कहा था कि हिंदुस्तान की चिंतन परंपरा में बहिष्कार या खारिज जैसा शब्द नहीं है. यह देश विचारों के हर लकीर के मुकाबले बड़ी लकीर खींचता है.           अतीत के ज्ञान को भारतीय विचारकों ने कभी ठंडा, सड़ा या बासी नहीं कहा. उसे यादों और एहसासों के भंडार में रख लिया. वह पुस्तैनी परिचय हो गया. बुनियाद, दीवारें और भवन कायम रहे. पलस्तर तो झड़ता है फिर चढ़ भी जाता है. तुलसीदास को पढ़िये, वाल्मिकी को बांचिये, गीता को,वेद को या कुमार गंधर्व को सुन लीजिए. पूर्वाग्रह रखने की...

क्या माँसाहारी हिंदू नहीं हैं..?

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#क्या_मांसाहारी_हिंदू_नहीं??? मांसाहार विषय पर परस्पर विवाद कर हम आपस में सिर्फ विरोध उत्पन्न कर रहे हैं ! जब मनुष्य को कृषि का ज्ञान नहीं था तब मांसाहार उसकी प्राकृतिक विवशता थी ! उस समय निसर्गत:जो धर्म था वह एकमात्र सनातन धर्म ही था ! मनुस्मृति में श्राद्धकर्म में पितरों की तृप्ति हेतु जिन पशु,पक्षियों और मछलियों का मांस प्रशस्त कहा गया है वह अत्यंत स्पष्ट श्लोक हैं और कदापि प्रक्षिप्त नहीं हैं क्योंकि हिन्दुओं में अहिंसा का कांसेप्ट बौद्ध काल के पश्चात शामिल किया गया ! वह भी इसलिए कि बौद्ध मत में अहिंसा पर इतना जोर दिया गया कि उससे सारी हिन्दू मान्यताएं छिन्न भिन्न होने लगीं ! जिन लोगों ने मनुस्मृति का सूक्ष्मता से अध्ययन किया हो और मूल तथा प्रक्षिप्त श्लोकों में अंतर कर सकते हैं उन्हें बलि,श्राद्ध और आखेट के मांस के विषय में ज्ञान होना चाहिए ! वन में आखेट राजाओं,सामंतों का प्रिय खेल हुआ करता था और वह मांस उनकी पाकशालाओं में भोजन के निमित्त ही प्रयोग किया जाता था ! हिन्दू समाज का मांसाहार के प्रति घृणा का भाव रखना तो उचित है किन्तु यह भाव अब कायरता उत्पन्न कर रहा है ! मांसाहार यदि क...

तुम खास हो..

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#आप_आम_नहीं_खास_हैं।। अपने आप को पहचानो..... जी हाँ प्रभु में मेरे प्यारे भाईयों और  प्यारी प्यारी बहनों..क्या हमें खुद की खासियत का,शख्सियतों का इल्म है?हम परमेश्वर के लिए कितने खास हैं इस बात की जानकारी हमें है क्या??        आईये हम जानें कि हम परमेश्वर के लिए कितने खास हैं "तुमने मुझे नहीं चुना है मैंने तुझे चुना है"john15:16 इस वचन को पढ़कर आप कैसा फील करते हो?     हम सब जो प्रभु में हैं कोई साधारण या आम शख्सियत के मालिक नहीं जिन्हें परमेश्वर ने नाम ले लेकर चुनाव किया है चुनाव में बहुत सी भीड़ हमारे पीछे छूट गई है. इसलिए हम खास हैं, हमारे लिए रेड कार्पेट बिछी है,हमारे लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं, अधिकार सौंपे गए हैं         अक्सर यह देखा गया है कि इंसान के पास जरा भी अधिकार दे दिये जायें तो वह अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने लगता है एक बच्चा भी बाप से अगर खेलने जाने की अनुमति मांगे तो बाप नहीं अभी नहीं कहकर अपने अधिकार जता ही देता है जबकि बच्चे और बाप दोनों को ही यह पता है यह अपरिहार्य या बेवजह की नानुकुर है      ...

इल्युमिनाटी और विनाश का पुत्र.

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😈👹👹👹👹 तमाम ऐसी संस्थायें हैं जो विनाश के पुत्र(ख्रीस्त विरोधी)के आने की तैयारियों में गुप्त रूप से कार्य कर रही हैं इसका जिक्र पुख्ता तौर पर बाईबल में मिलता है उनका संक्षिप्त परिचय मैं पिछले इपिसोड में करता आ रहा हूँ आईये कुछ और संस्थाओं के बारे में जानें.. The united world Federalist:यह आधुनिक संस्था है इसकी स्थापना सन्1947में हुई. इस संस्था का ध्येय"हम एक विश्व सरकार बनाकर रहेंगे चाहे आप इसे स्वीकार करें या न करें"पर है.c.f.r. council on foreign relationship की भिन्न भिन्न शाखाएं हैं. इसे अमेरिका की "अदृश्य सरकार"भी कहा जाता है ये तमाम इन्स्टीट्यूट, कॉलेज भी चलाते हैं जहाँ छात्रों को सेडल् स्कालरशिप भी मुहैया कराई जाती है योग्य और प्रतिभाशाली नवजवान छात्रों को चुनकर उन्हें उच्च शिक्षा देकर एक विश्व सरकार के लिए कार्यकर्ता और प्रचारक तैयार किया जाता है. उन्हें ऐसी तालीम दी जाती है कि उनके विचार फिर कभी न बदल सके.आस्ट्रेलिया के प्रेसीडेंट बॉबहॉक जैसे महान राजनीतिज्ञ इसी संस्था ने तैयार किए. इस संस्था से आक्सफोर्ड के बुद्धिजीवी और ब्रिटिश सरकार में चोटी के प्रशा...

वर्तमान विज्ञान और बाईबल अंतिम दिन को कैसे देखता है??

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बाईबल और वर्तमान विज्ञान कयामत के दिन को कैसे देखता है?     विज्ञान की सृष्टि के अंत होने की तीन थ्यौरियों में से तीसरी और अंतिम थ्योरी #बिगक्रंच "है. हम जानते हैं ब्रहमांड निरंतर फैल रहा है. इस थ्योरी के अनुसार अंतिम चरण में ब्रहमांड का फैलाव रूक जायेगा और डार्क एनर्जी(ब्लैकहोल केन्द्र)के कमजोर पड़ते ही ग्रेविटी पुनः हावी हो जायेगी और सभी गैलेक्सीज एक दूसरे की ओर आकर्षित होकर एकदूसरे से टकराने लगेंगी और इसके आकार लगातार सिकुड़ते जायेंगे। मत्ती 24:29 [29]उन दिनों के क्लेश के बाद तुरन्त सूर्य अन्धियारा हो जाएगा, और चान्द का प्रकाश जाता रहेगा, और तारे आकाश से गिर पड़ेंगे और आकाश की शक्तियां हिलाई जाएंगी।           प्रलय(कयामत के दिन)से एक लाख साल पहले तक तापमान इतना बढ़ जायेगा जितना कई तारों की सतह का होता है. इस कंडीशन में एटम्स भी टूटकर बिखर जायेंगे और जगह जगह बने ब्लैकहोल्स द्वारा निगल लिये जायेंगे जो अपने आसपास का सारा मैटर निगल रहे होंगे। 2 पतरस 3:10 [10]परन्तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्द से जाता रहेगा, और तत्व ...