सावरकर वीर या माफी वीर..??
सावरकर के मामले में कुछ बातें मोटे तौर पर जान लेनी चाहिए। वह योद्धा नहीं था, स्वतंत्रता आंदोलन में जेल नहीं गया था बल्कि कायर था, डरपोक था, हत्यारा था, भगोड़ा था। पहली बार कर्जन वईली की हत्या में उसका नाम आया, फिर 1910 में नासिक कलेक्टर की हत्या के मामले में लंदन में उसकी गिरफ्तारी हुई। गिरफ्तारी के बाद उसे पानी के रास्ते भारत लाया जा रहा था, लेकिन वो कपड़े उतारकर जहाज़ के शौचायल पोर्ट होल के रास्ते पानी में कूद गया। कूदने के बाद वो तैरकर तट पर पहुंचा, फिर भागने लगा। कुछ ही दूर जाने के बाद उसे चोर समझ के पकड़ लिया गया, नंगा सावरकर फ्रांस में पहुंच चुका था। अब फ्रांस के संप्रभुता का मामला था, मामला बहुराष्ट्रीय हो चुका था। फिर जैसे तैसे उसे भारत लाया गया। महाराष्ट्र में पेशी हुई, दो हत्याओं के मामले में उसे दोषी पाया गया, भगोड़ा साबित हुआ। कोर्ट ने दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई, प्रशासन ने उसके अतीत को देखते हुए सुरक्षित जेल चुना। अंडमान का जेल, कोठरी नंबर 52. अब 25+25 साल जेल में बिताने थे, लेकिन वो महज 9 साल में छूट गया। 11 जुलाई 1911 को सावरकर अंडमान पहुंचा और डेढ़ महीने के भीतर, 29 ...