Posts

Showing posts from June, 2021

ज्ञान की बातें ध्यान से सुनो..

Image
#जहाँ_भी_ज्ञान_की_दो_बातें_मिले_ध्या_से_सुनो●●● इसलिए विरोध न करो कि ज्ञान की बातें कहने वाला गैर मजहबी है, दूसरे धर्म से है।इसलिए असहज मत हों कि वो आपके शास्त्रों से इतर ज्ञान बताता है. ज्ञान शास्त्रों में कैद नहीं है. बड़े तजुर्बे कार ज्ञान का ताया है. उसकी सुनें.ज्ञान रखने की चीज नहीं, उसे ब्यवहार में लायें. जहाँ भी ज्ञान की दो बातें मिले गौर से सुनो.जरूरी नहीं कि वक्ता तुम्हारे अनूकूल कहे.उसके शब्दों से जहाँ आप घायल हुए समझो ज्ञान पा लिया. बुझदिली है उससे अदावत रखना.उसके पांव छू लो जिसने आपको शब्दों से घायल किया है और उन्हें उसी दिन से अपना गुरू मान लो.अदावत रखोगे या तो उसे मार दोगे या तिल तिल आप मरोगे. दुनिया में एक शख्सियत ऐसी भी हुई कि जिसने तलवार से नहीं बल्कि प्यार से दुनिया जीत ली.खौफ दिखाकर नहीं बल्कि क्षमा के बल से परचम लहराया. खून करके नहीं बल्कि खून देकर अमन का बादशाह हुआ.दुनिया उसे रब्बी गुरु बुलाती है. जहाँ भी ज्ञान की दो बातें मिले ध्यान से सुनें क्योंकि...लिखा है....नीतिवचन 2:2-4,9-11 और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगा कर सोचे; और प्रवीणता और समझ के ल...

नास्तिकों को जवाब..

Image
आत्मा कपोल कल्पित चीज है।न आत्मा नाम की कोई चीज है न इसका वजूद है। एक शरीर के मर जाने के बाद आंखें कुछ घंटों तक जीवित रहती हैं क्या आंख और शरीर के लिए अलग अलग आत्मा होती है?क्या शरीर से जुड़े जुड़वां बच्चों की आत्मा अलग अलग हैया एक?छिपकली की पूंछ कटने पर पूंछ अलग छटपटाती है क्या पूंछ मे एक और आत्मा है?क्लोन बनाकर और अंग प्रत्यर्पण की तकनीक विकसित कर वैज्ञानिक आत्मा होने के वजूद को झुठला दिया है।शरीर के किसी अंग के कट जाने पर आत्मा क्यों नहीं निकलती जबकि गर्दन कटते ही निकल जाती है?       आत्मा है तो प्रमाण क्या है? "नैनम् छिंदंति शसत्राणि,नैनम् दहति पावकः"        तो फिर नर्क मे किसे तला भूना जाता है?किसे आरी से काटा जाता है?ऐसे तमाम नास्तिक वादी सवाल आप जोड़ सकते हैं....।।                  अजी निश्चय आत्मा का वजूद है... आईये गौर करें।                   मानव शरीर के तीन लेयर्स हैं: १:शरीर(Body)सभी अंगों सहित। २:प्राण, दम,जान(breath vitality/life. ३:आत्मा(soul, spirit) ...

बोझ..

Image
बोझ●●● इंसान अपने अभिमान का बोझ ढोता फिर रहा है.जबकि लिखा है.अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा भजन संहिता 55:22         हम अपना बोझ छोड़ना नहीं चाहते. अहंकार,अभिमान घमंड,शिकवे,शिकायत, झूठ,झगड़े, ईर्ष्या डाह,घृणा...आदि आदि बुराईयों का बोझ हम ढोकर चल रहे हैं!!?श्रेय लेना किसको पसंद नहीं है?अभिमान और घमंड किस बात के लिए?? जान लें.. नाश होने से पहले मनुष्य के मन में घमण्ड, और महिमा पाने से पहले नम्रता होती है। नीतिवचन 18:12 नाम और शौहरत की चाहत सबको होती है. श्रेय के साथ #मैं जुड़ा होता है.. मैं दौलतमंद हूँ... मैं ताकतवर हूंँ.. मैं कामयाब हूँ. मैं दूसरों से बेहतर हूँ..  जहाँ मैं है वहाँ अहम् घमण्ड है.आज धार्मिक आध्यात्मिक क्षेत्रों में भी #मैं घुस आया है.  मैं धर्मी हूँ..  मैं दूसरों से ज़ियादा धर्म जानता हूँ.  मैं धर्म शास्त्रों का ज्ञाता हूँ.  जहाँ #मैं है वहाँ *मैं* [परमेश्वर] नहीं है. कैन ने एक शहर बसाया , और उसका नाम अपने बेटे के नाम पर रखा.उत्पत्ति 4:17 इसमें कोई बुराई नहीं है , हम भी आज ,घरों के नाम अपने नाम पर रखते हैं.मगर हम श्रेय क...

देहधारी ईश्वर..

Image
देहधारी ईश्वर         जो अपने आप को ईश्वर और मसीहा कहते हैं और फिर भी परमेश्वर के कार्य नहीं कर सकते वे सभी  धोखेबाज  हैं.            मसीह पृथ्वी पर केवल परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं है बल्कि वह देह है, जिसे धारण करके परमेश्वर लोगों के बीच रहकर कार्य पूर्ण करता है. यह वह देह नहीं, जो किसी भी मनुष्य के द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सके,बल्कि वह देह है जो परमेश्वर के कार्य को पृथ्वी पर बेहतर संपादित करता है. और परमेश्वर के स्वभाव को अभिव्यक्त करता है साथ ही अच्छी प्रकार से परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है. और मनुष्य के जीवन को एक रास्ता देता है जो मृत्यु के बाद भी भव्य बनाता है.परमेश्वर ने अपने वायदे के अनुसार मनुष्यों के बीच वास किया.उस समय बहुत सी जातियाँ यहोवा से मिल जाएँगी, और मेरी प्रजा हो जाएँगी; और मैं तेरे बीच में वास करूँगा, जकर्याह 2:11           मनुष्य कई युगों को जीता आया है. कलयुग के बाद आज जिस युग में मनुष्य जी रहा है वह #अनुग्रह का युग है. इसी अनुग्रह के युग के लिए आज से दो हजार साल पहले परमेश्वर ने मनुष्य के उद्धार और बुराई, पाप के छुटकारे के लिए मसीह के रूप में देहधारण किया...

ईसाईयों का परमेश्वर असर्वज्ञ है, वह परीक्षा लेता है. अय्यूब की उसने परीक्षा ली!!

Image
बुरे वक्त में इंसान ईश्वर की बुराई करने लगता है. अय्युब नेक और खरा इंसान था.वह बुरे वक्त में भी ईश्वर की स्तुति नहीं छोड़ा.         शैतान बुराई का पिता है. अय्युब शैतान के द्वारा परखा गया. परखने की इजाज़त ईश्वर से मिली.इसमें ईश्वर असर्वज्ञ कैसे हुआ बाईबल ईश्वर को सर्वज्ञ बताती है. चंद आयतों को लेकर नतीजे तक नहीं पहुँचा जा सकता. अर्थ का अनर्थ होगा. अय्युब अध्याय 2 में यही तथ्य समझाया गया है कि सच्चाई खराई और नेकी की जिंदगी बसर करनेवाला विपरीत परिस्थितियों में भी अपना धर्म नहीं खोता और अंत में पुरस्कृत होता है. विधर्मी दयापंथियों के आक्षेप इस प्रकार होते हैं👇  💥शैतान उसके भक्तों के सामने उसके भक्तों को दुख देता है. इसलिए ईश्वर असामर्थ्य वान कैसे हुआ?? अय्युब पूरे अध्याय पढ़ें तो स्पष्ट है  ईश्वर भक्त अय्युब जीत गया.शैतान हारा है. अय्युब के कथनों पर गौर करें. परमेश्वर बुद्धिमान और अति सामर्थी है: उसके विरोध में हठ करके कौन कभी प्रबल हुआ है? अय्यूब 9:4  “मनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता है, उसके दिन थोड़े और दुःख भरे है। वह फूल के समान खिलता, फिर तोड़ा जाता...

पुनर्जन्म सत्य है या मिथ्या??

Image
पुनर्जन्म तथ्य है या मिथ्या? #पुनर्जन्म तथ्य,सत्य या मिथ्या??? आवागमन लफ्ज़ कहाँ है वेदों में ? पुनर्जन्म लफ्ज़ लिखे श्लोको में आवागमन के कॉन्सेप्ट को फिट कर के मिलावट किसने की वेदों में ? पुनर्मनः पुनरायुर्म आगन् पुनः प्राणः पुनरात्मा म आगन् पुनश्चक्षुः पुनः श्रोत्रं म आगन्। वैश्वानरो अदब्धस्तनूपा अग्निर्नः पातु दुरितादवद्यात्॥3॥ -यजु॰ अ॰ 4। मं॰ 15॥ पुनर्मैत्विन्द्रियं पुनरात्मा द्रविणं ब्राह्मणं च। पुनरग्नयो धिष्ण्या यथास्थाम कल्पयन्तामि हैव॥4॥ -अथर्व॰ कां॰ 7। अनु॰ 6। व॰ 67। मं॰ 1॥ आ यो धर्माणि प्रथमः ससाद ततो वपूंषि कृणुषे पुरूणि। धास्युर्योनिं प्रथमः आ विवेशा यो वाचमनुदितां चिकेत॥5॥ -अथर्व॰ कां॰ 5। अनु॰ 1। व॰ 1। मं॰ 2॥ भाषार्थ - (पुनर्मनः पुनरात्मा॰) हे सर्वज्ञ ईश्वर! जब जब हम जन्म लेवें, तब तब हम को शुद्ध मन, पूर्ण आयु, आरोग्यता, प्राण कुशलतायुक्त जीवात्मा, उत्तम चक्षु और श्रोत्र प्राप्त हों। (वैश्वानरोऽदब्धः) जो विश्व में विराजमान ईश्वर है, वह सब जन्मों में हमारे शरीरों का पालन करे। (अग्निर्नः) सब पापों के नाश करनेवाले आप हम को (पातु दुरितादवद्यात्) बुरे कामों और सब दुःखों से पुनर्...

ईश्वर भगवान है तो दिखाई क्यों नहीं देता??

Image
भगवान दिखाईं क्यों नहीं देते? परमेश्वर ब्रह्माण्ड का जो संगठित रूप है.वही सारी सृष्टि का कर्त्ता है,सारी ऊर्जाओं और ज्ञान का स्रोत वही है. "मैं हूँ" ही ईश्वर है.बाईबल में ईश्वर ने अपना परिचय यही बताया है.(यदि वे मुझसे पूछें,'उसका क्या नाम है?'तब मैं क्या बताऊँ?'परमेश्वर ने मूसा से कहा-"मैं जो हूँ सो हूँ"फिर उसने कहा -"तू इस्राईलियों से यह कहना 'जिसका नाम "मैं हूँ"है.....निर्गमन3:13-14)  भारतीय दर्शनों में इसको अलग अंदाज में बयां किया गयाहै.ज्ञान को ही ईश्वर की वाणी बताया गया है. ज्ञान का स्रोत ईश्वर ही है. ज्ञान अर्थात वेद।।वेद अर्थात ईश्वर की वाणी. वेद में व्यवहारिक और औपचारिक ज्ञान और सहज ज्ञानों को भी ईश्वरीय ज्ञान बताया गया है.वेद का ज्ञान सांसारिक है इसे ब्यवहार में लाकर इंसान इंसान बन सकता है.यहाँ ज्ञान की महिमा है. ज्ञान के स्रोत का नहीं।स्तूति उसकी होनी चाहिए जो मूल हो,स्रोत हो. बाईबल उसी मूल शक्ति केंद्र,एक सर्वशक्तिमान सत्ता से उत्पन्न होने का अनुमान व विश्वास व सम्भावना और इतिहास को पुख्ता करता है. *अब यदि संसार में एक सर्वश...

Watch "क्या परमेश्वर ने 400 नबियों के द्वारा झूठ बुलावाया ? (1 राजा अध्याय 22) Can God lie ? (1 Kings 22)" on YouTube

Image
ईसाइयों_का_परमेश्वर_यहोवा_झूठा_है!!?? कई दुराग्रही दयापंथी यहोवा विरोधी उत्पत्ति के आयतों और पहला राजा22:20-23 को अंडरलाइन कर ऐसे आक्षेप करते हैं. जिसका जवाब हम  कई बार दे चुके हैं.... बाबु अमन कुमार की गुजारिश पर फिर से यह पोस्ट लेकर आना पड़ा... ईश्वर झूठ क्यों बोला कि इसे खाते ही तुम मर जाओगे?” को देखते हैं: फल को खाने से मर जाने बात उत्पत्ति 2:17 में लिखी गई है।  इसके लिए YLT का अनुवाद है – “and of the tree of knowledge of good and evil, thou dost not eat of it, for in the day of thine eating of it--dying thou dost die” – मूल इब्रानी भाषा में यह नहीं लिखा है कि “इसे खाते ही तुम मर जाओगे” या “तुम तुरंत ही मर जाओगे।” अंग्रजी भाषा के अन्य अनुवादों में भी यही आया है कि “you will surely die” अर्थात, “तुम निश्चय ही मर जाओगे”, न कि आम धारणा और समझ की बात “you will immediately die” अर्थात “तुम तुरंत ही मर जाओगे।” दोनों में बहुत अन्तर है। Immediately या तुरन्त का अर्थ है ‘उसी समय’; जबकि surely या निश्चय का अर्थ है कि यह अवश्यंभावी है कि तुम मर जाओगे – किन्तु यह कब होगा इसका कोई समय स...

ईसाईयों का परमेश्वर मनुष्यों को ज्ञान से दूर रखना चाहता था.!!

Image
ईसाइयों का परमेश्वर मनुष्यों को ज्ञान से वंचित रखना चाहता था!!?? ईश्वर क्यों नहीं चाहते थे कि आदम भले और बुरे का ज्ञान रखे..?  यह हम सभी के परिवारों में सामान्यतः देखा जाता है कि घर की प्रत्येक वस्तु, प्रत्येक सदस्य के लिए नहीं होती है, विशेषकर बच्चों के लिए तो बहुत सी वस्तुएँ वर्जित होती हैं। वे बच्चे घर के सदस्य हैं, उन वस्तुओं पर पैतृक संपत्ति के रूप में उनका अधिकार है, किन्तु एक आयु, समझ-बूझ और सामर्थ्य तक पहुँचने से पहले उन्हें उन वस्तुओं के प्रयोग की अनुमति नहीं होती है। उदाहरण के लिए रसोई में अत्यंत उपयोगी और दिन में अनेकों बार काम में ली जाने वाली चीज़ें जैसे कि छुरी-चाकू, या दियासलाई, या बिजली के उपकरण आदि; या, बड़ों के द्वारा चलाए जाने वाले मोटरसाईकिल, कार या अन्य कोई मशीन आदि। किन्तु जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उन वस्तुओं को संभाल कर उपयोग करना सीख लेते हैं, उन वस्तुओं के उचित-अनुचित उपयोग के बारे में समझने लगते हैं, उनके उपयोग के लिए आवश्यक सावधानियों को जान लेते हैं, तब उन्हें उन वस्तुओं के उपयोग करने की अनुमति भी मिल जाती है। आदम और हव्वा की सृष्टि व्यसक स्वरूप में हु...

स्वर्ग नर्क और पुनर्जन्म...

Image
स्वर्ग नरक कोई स्थान विशेष नहीं है: दयानंद स्वामी           या तो दयानंद जी कन्फ्यूजन में थे या आर्षग्रंथ झूठ बता रहे हैं.स्वर्ग नर्क का जिक्र वेदों समेत पुराणों, मनुस्मृति और तमाम पौराणिक ग्रंथों में है. ऐसे में दयानन्द स्वामी का अवैदिक अपूष्ठ संदिग्ध ज्ञान लोगों को भी कन्फ्यूज करता है. अथर्ववेद में भी कहा गया है. स्वर्गा लोका अमृतेन विष्ठा।।(१८/४/४) मने स्वर्ग लोक में अमरत्व प्राप्त हो जाता है. स्वर्गलोका अमृतत्वं भजयंते..कठो० शोकातिगो मोदते स्वर्ग लोके!![कठो०] शोकादि दुखों से पार पाया हुआ मनुष्य स्वर्ग लोक में आनन्द से रहता है. स्वर्गे लोके न भयं किन्चिनास्ति न तत्र त्वं न जरया बिभेति।। [कठो०] अर्थात स्वर्गलोक को प्राप्त करने वाले को भय तथा बूढ़ापादि नहीं होते. त्रिकर्मकृत् तरति जन्ममृत्यु।। 【कठो०】 यज्ञ,अध्ययन तथा दान करनेवाले जन्ममृत्यु को पार कर लेता है.पुनर्जन्म नहीं होता. यस्मिन् स्वर्गे देवानां पतिरिन्द्र: एक: सर्वानुपरि अधिवसति।।मुण्डको०१-२-५ स्वर्ग लोक में देवों का स्वामी ईन्द्र सर्वोपरि है. #सर्वे_ते_नरकं_यांति_दृष्टवा_कन्यां_रजस्वलाम●●     ...

Watch "महेंद्र पाल सच बोल गए.." on YouTube

Image
यह भ्रम फैलाया गया है कि पंडित महेंद्र पाल आर्य पूर्व में मौलवी महबूब अली थे, केवल मौलवी ही नहीं अपितु हाफिज-ए-कुरआन भी थे। ज्ञात हो कि मौलवी वह होता है जिसे कुरआन, हदीस, फिका, तफसीर, अकाइद, इल्म-ए-कलाम, मन्तिक, फलसफा आदि का पूर्ण ज्ञान हो। यह सब ज्ञान अरबी भाषा के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। अतः एक मौलवी अरबी भाषा का पूर्ण ज्ञानी होता है। यह कोर्स करीब पन्द्रह वर्षो का है।       कथित पंडित महेद्र पाल आर्य को ढंग की उर्दू पढ़ना, बोलना नहीं आता अरबी जुबान भी लड़खड़ाती है और वो इमाम थे.घोर आश्यर्च!!           मेहन्द्रपाल जी जिस प्रकार की अरबी लिखते हैं या अरबी का अनुवाद करते हैं उसे देख कर लगता है कि किसी गैर मुस्लिम ने बोझल मन से इस्लाम पर एतराज करने के लिये अरबी सीखी है मैं कई ऐसे गैर-मुस्लिम भाई हैं जो शौकिया या उर्दू अध्यापक की नौकरी पाने के लिये उर्दू सीखी है। परन्तु इस प्रकार कोई भाषा सीखी जाए कि न तो उसे पूरा समय दिया जा सके और न ही पूरे मन से उसे सीखा जाए, ऐसे व्यक्तियों द्वारा सीखी गई कोई भी भाषा पुख्ता नहीं हो सकती। उस व्यक्ति के बारे में...

ईसाईयों के परमेश्वर के बेटे बेटियाँ हैं तो सास ससुर और साला सालियाँ होंगी??

Image
👹ईसाइयों से ये पूछना चाहिए कि ईश्वर के बेटे कौन हैं?       👿ईसाइयों के ईश्वर की पत्नी, सास,श्वसुर, साला और संबंधी कौन हैं.?      उत्पत्ति6:1-4 के संदर्भ में दुराग्रही तत्वों द्वारा अक्सर यही सवाल किये जाते हैं. बाईबल हरेक इंसान को ईश्वर की संतान बताती है.             और तुम्हारा पिता हूँगा, और तुम मेरे बेटे और बेटियाँ होंगे; सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर का वचन है।” (2 शमू. 7:14, यशा. 43:6, होशे 1:10) 2 कुरिन्थियों 6:18                 देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्‍वर की सन्तान कहलाएँ, और हम हैं भी; इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना। 1 यूहन्ना 3:1             बाईबल सारी मानव जाति को ईश्वर की संतान कहती है. इसका मतलब ये नहीं कि उसकी कोई बीवी है.या सैकड़ों वीवियां रही होंगी... हाँ संतानें बुरी या अच्छी हो सकती हैं. अच्छी संतानें पिता की कद्र जानती है और बुरी पिता के विरुद्ध चलती हैं.       ...

बाईबल का परमेश्वर जंगली है. बलियाँ लेता है.!?

Image
आर्य समाजी लैव्यवस्था के विधानों और तात्कालिक कायदों को लेकर निम्न समीक्षा आक्षेप पेश करते हैं.. (समीक्षक) तनिक विचारिये!  कि बैल को परमेश्वर के आगे उसके भक्त मारें  और वह मरवावे  और लोहू को चारों ओर छिड़कें,  अग्नि में होम करें,  ईश्वर सुगन्ध लेवे, भला यह कसाई के घर से कुछ कमती लीला है?  इसी से न बाइबल ईश्वरकृत है और न वह जंगली मनुष्य के सदृश लीलाधारी ईश्वर हो सकता है.?   इस संदर्भ को समझने के लिए जरा पीछे आदम का पहला गुनाह नफरमानी और परमेश्वर की पाप क्षमा की युक्तियों को जानना होगा.आदम के द्वारा पाप हुआ.इस पाप का परिणाम यह हुआ कि आदम यह जान पाया वह नंगा है और अपने तन को छुपाने के लिए झुरमुटों का सहारा लिया. परमेश्वर ने उसके नग्नता को ढंपने के लिए उसके तन पर जानवर की  खाल प्रबंध किया. खाल का प्रबंध हुआ मतलब कोई जानवर मरा होगा.और मरा होगा तो निश्चय खून बहा होगा. इस तरह आदम के पहले पापों की क्षमा और उसकी नग्नता ढंपने के लिए लहू बहा.और आदम की सारी संतानों के पाप क्षमा और मेल के लिए निर्दोष मेमने, मेढ़े,बछड़े का लहू बहाने और यज्ञ का विधान लैव्यवस्था में...

क्या ईसा मसीह ईश्वर है??

Image
"तुम लोग यीशु को भगवान बोलते हो पर अगर वो भगवान होते' तो अपने आप को क्रूस पर चढ़ने से क्यों नही बचा पाए ? वो तुम्हें क्या खाक बचाएंगे जो अपने आप को नहीं बचा पाए!!  यह सवाल आज से २००० वर्ष पहले भी उठा था, क्रूस पर कीलों से जकड़े,  लहूलुहान मरते प्रभु यीशु के सामने खड़े, जन समूह ने उठाया था आज वही सवाल लोग सोशल मीडिया पर, फेसबुक ट्वीटर और तमाम मंचों पर उठा रहे हैं. लोग और सरदार भी ठट्ठा कर करके कहते थे, कि इस ने औरों को बचाया, यदि यह परमेश्वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले। सिपाही भी ठट्ठा करके कहते थे। यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आप को बचा।  जो कुकर्मी साथ में सलीब पर लटकाये गए थे, उन में से एक ने उस की निन्दा करके कहा; क्या तू मसीह नहीं तो फिर अपने आप को और हमें बचा।  - लूका २३:३५-३९ भाई हम भी, आपके समान प्रभु यीशु को मात्र एक आम 'इंसान' या एक 'गुरु' या उस समय के धार्मिक ठेकेदारों  की तरह 'धोखेबाज़, ही मान लेते।  यदि प्रभु यीशु मरने के बाद जीवित नहीं होते,और तब आप का कहना भी सच होता जो स्वयं कब्र में हैं वह किसी को कैसे बचाये वो क...

जाति जन्माधारित वर्ण कर्माधारित?

Image
कर्म तो पल पल में वैसे ही बदलते रहते हैं जैसे मन की चिरन्तन चिन्तन परम्परा बदलती रहती है. किस मीटर से हमारे बन्धु नापेंगे कि ...            अमुक व्यक्ति इतने से इतने समय तक ब्राह्मण रहा... इतने से इतने समय तक क्षत्रिय...  इतने से इतने समय तक वैश्य या शूद्र!!?? हल चलाने लगा तो कृषक,,,  भोजन पकाने लगा तो पाचक..,  कपड़े धोने लगा तो रजक...  दाढी बाल बनाने लगा तो नापित,,, पढाने लगा तो शिक्षक,,  जूता की पालिश करने लगा तो,,,,,,??कूड़े उठाने वाला हुआ तो?? एक दिन में विचारेंं की 10 जातियां बन और बिगड़ जायेंगी🤔🤔🤔 आप कहते हैं कि ये तो जाति नहीं हैं,,,हम कहते हैं कि कर्म से जाति मानने वालों को इससे क्या फर्क पड़ता है ??जैसा कर्म वैसा वर्ण तो वे मानते ही हैं,,,    कर्म से जाति मानने से तो लाख गुना बेहतर है कि जाति को मानो ही मत तो आपका निर्वाह हो जायेगा झगड़ा भी कोई नहीं,, परन्तु अर्ध कुक्कुटी न्याय उचित नहीं,,,, मनुस्मृति में लिखा है कि बाह्मण बालक का यज्ञोपवीत संस्कार गर्भ से आठवे वर्ष में करना चाहिए,(((गर्भाष्टमेब्दे कुर्वीत,ब्राह्मणस...

जीवन का शिखर

Image
     *दरअसल #मृत्यु जीवन के शिखर पर खिलने वाला फूल ही है. इस फूल की कद्र अलग अलग तरीकों से होती है.शवयात्रा में निकले लोगों की तादाद देखकर यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसने कितने रिश्तों की कमाई करी है लेकिन #कोरोना ने इस परंपरा को भी तोड़ दिया है. अब लोगों को हर परंपरागत पद्धतियों को भी बदलनी ही होगी.*        *अंतिम संस्कार, अस्थि कलश विसर्जन विधि,मृत्यभोज,विवाह भोज,धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन सारी विधियाँ #कोरोना ने बदल दिया है.*         *जब कोई मरता है तो हम सहानुभूति और संवेदना व्यक्त करते हैं और हमें लगता है बेचारा मर गया लेकिन हमारे मन में यह कभी नहीं आता उसकी मृत्यु हमारी भी मृत्यु है. बड़ी सूक्ष्म बातें हैं जहाँ तक हम पहुँचते भी नहीं हैं.*        *हमें लगता है हम बचकर निकल लेंगे.... हम सोचते हैं कुछ न कुछ हमें बचा लेगा.. कोई मंत्र,कोई साधना, कोई प्रार्थना,कोई चमत्कार..कुछ तो ऐसा लगता होगा जो हमें बचा लेगा...*       *हमें समझना होगा कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं वह तो जीवन का शिखर है.*   ...

बाईबल और सृष्टि विज्ञान

Image
।।बाईबल और सृष्टि विज्ञान।। उत्पत्ति की किताब में दिया ब्यौरा रहस्यमयी है जिसे बहुत ही सरल मगर दमदार शब्दों से शुरुआत किया गया है “आदि में परमेश्‍वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।” (उत्पत्ति 1:1) भूवैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि पृथ्वी करीब 4 अरब साल पुरानी है और खगोल वैज्ञानिकों ने हिसाब लगाया है कि विश्‍व करीब 15 अरब साल पुराना होगा। क्या विज्ञान की ये खोज, जिनमें आगे चलकर और भी फेरबदल हो सकते हैं, उत्पत्ति 1:1 में लिखी बात को काटती हैं? हरगिज़ नहीं.आईये जानें.    बाईबल में सृष्टि की रचना वृत्तांत में एक शब्द का बार बार जिक्र है... "#हो गया" इसी "हो गया"विस्फोटक शब्द को विज्ञान "बिग बैंग"कहता है.यही शब्द, वचन, तरंग ही सृष्टि का कारक है. (भारतीय दर्शन इसी वचन को #ऊँ बताती है) आदि में वचन ही था,जिसके द्वारा संपूर्ण ब्रह्मांड रचा गया.लेख को संक्षिप्त करते हुए आईये समझें.. किसी वस्तु को यदि टुकड़े टुकड़े किये जायें तो अणु से लेकर परमाणु से लेकर और टुकड़े किये जायें तो अंतिम सुक्ष्म टुकड़े चमकदार रश्मियों में परिवर्तित होंगी. आदि में सभी पदार्थ इन्हीं रश्मि पुंजो...

रामराज....

Image
#रामराज में.. #सभी_वैदिक_धर्मी_थे.. #सपने_में_भी_पाप_नहीं_करते_थे.. #कोई_गरीब_नहीं_था_कोई_अल्पायु_में_नहीं_मरता_था. तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में रामराज्य को निम्न प्रकार वर्णित किया है— चौपाई : दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥ सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥1॥ चारिउ चरन धर्म जग माहीं। पूरि रहा सपनेहुँ अघ नाहीं॥ राम भगति रत नर अरु नारी। सकल परम गति के अधिकारी॥2॥  अल्पमृत्यु नहिं कवनिउ पीरा। सब सुंदर सब बिरुज सरीरा॥ नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना॥3॥  #शेर_और_हिरण_मित्रवत_रहते_थे। फूलहिं फरहिं सदा तरु कानन। रहहिं एक सँग गज पंचानन॥ खग मृग सहज बयरु बिसराई। सबन्हि परस्पर प्रीति बढ़ाई॥1॥ #सभी_पुरुष_परोपकारी_और_एकपत्नीव्रती_थे. सब उदार सब पर उपकारी। बिप्र चरन सेवक नर नारी॥ एकनारि ब्रत रत सब झारी। ते मन बच क्रम पति हितकारी॥4॥ #लताएँ_बोलने_मात्र_से_मधु_टपकाते_थे. गायें मनचाहा दूध देती थीं. लता बिटप मागें मधु चवहीं। मनभावतो धेनु पय स्रवहीं॥ ससि संपन्न सदा रह धरनी। त्रेताँ भइ कृतजुग कै करनी #समुद्र_भी_बोलने से_रत्न_उ...

शूल या फूल..??

Image
अगर गड्ढे खोदने वालों के लिए गड्ढे खोदे जायें तो धरती गड्ढों से भर जायेगी, कांटे बिछाने वालों के लिए कांटे बिछाये जायें तो धरती कांटों से पट जायेगी.... ईसा मसीह उस समय इस धरती पर तशरीफ़ लाये जिस समय छोटी छोटी बातों के लिए घात किया जाता था, जरा सी बात के लिए पत्थर,लठैत, हथियार उठाये जाते थे. एक वाकया याद आता है नगरवधू व्याविचार करते पकड़ी गई. भीड़ उस महिला को ईसा के पास ले आई. परखने के लिए महिला पर पत्थर वाह की मांग करने लगे.ईसा ने कहा"जो निष्पाप हो वही पहला पत्थर चलाये"भीड़ एक एक करके सरकती गई. यहाँ कौन निष्पाप है??लेकिन तौभी हमें दूसरों की खामियां ढूंढने से फुर्सत नहीं. धर्म का दिखावा करके लोग किसे छल रहे हैं?ईसा को यही दिखावा करनेवाले ढोंगी कथित धर्म अगुवे षड्यंत्रों से सूली तक ले आये. लेकिन ईसा ने अपने लिए खुदे गड्ढे को नम्रतापूर्वक पाटने का काम किया, राहों पर बिछे कांटों का ताज अपने सर पर लिया,जलील हुआ पर श्राप नहीं दिया,बर्छे और तलवार के बदले प्यार दिया, दाढ़ी नोची गई और मुंह पर थूका गया. लेकिन हाय और उफ् के बदले माफी दी.       आ ज हम जिस दौर में हैं हलात् उससे भी बदतर है...

कुंवारी से जीजस का पैदा होना झूठ है!???

Image
यह मेरा प्रश्न नहीं है,लेकिन यह प्रश्न दो समूहों के बीच बहस के संदर्भ में आता है। मैं इस सबसे दिलचस्प धार्मिक विषय पर लिखना चाहता हूं, क्योंकि ये चर्चा करना बहुत आवश्यक है lइसे हाइलाइट करना अनिवार्य है, क्योंकि बहुत से महान व्यक्तियों ने या तो इसे बहुत दृढ़ता से विरोध किया या इसे अनुमोदित किया।यह चर्चा करना दिलचस्प है, क्योंकि इस मामले ने, कई लोगों को इस पर पूरे दिल से विश्वास करने के लिए आकर्षित किया है l  यह मानव जाति तक पहुंचने के लिए ईश्वर का सबसे बड़ा प्रयास माना जाता है। यह चर्चा आवश्यक है, क्योंकि इस कहानी ने विश्वास करने के कारण दिए हैं।दूसरी ओर,कई लोग इसे अंधविश्वास  के रूप में  देखते हैं , इस कहानी को खारिज कर दिया,और निंदा की है।मैं सोशल मीडिया पर देखता हूं कि कई लोग इस कहानी पर विश्वास करने के कारण ईसाइयों के खिलाफ कठोर शब्द लिख रहे हैं। मेरा प्रयास दोनों पक्षों का विश्लेषण करना है, और पाठकों को अपना निर्णय लेने के लिए छोड़ देना है। सबसे पहले, देखते हैं कि विरोधी दल क्या कह रहा है।  अदिति गर्ग, निम्नलिखित शब्दों में स्वामी दयानंद सरस्वती के विश्वास के बार...

दयानंद भ्रम में थे..

Image
#दयानंद_और_अंतिम_सत्य●●●    मूलशंकर तिवारी(दयानंद सरस्वती)इस भ्रांति में जीते रहे कि वह हिंदुत्व का भला कर रहे हैं, दरअसल उन्हें खुद हिदुत्व की पूरी समझ नहीं थी. ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि वे हिंदुत्व को केवल सतही, सरसरी तौर पर ही देखा था. उन्हें हिंदुत्व के पूजन विधान और कर्मकांड निरा दोषपूर्ण और पाखंड लगा.समाज सुधार की अपरिपक्व उत्तेजना में उन्हें भ्रम हो गया कि जिस बुनियाद पर हजारों वर्षों से हिंदुत्व टिका है,उसे अपने निजी कथित वैज्ञानिक विचारों से झटके भर में धता बताकर क्रांति लाने का प्रयोग किया. वे तमाम पुराने वेदभाष्यों और तमाम ग्रंथों को अवैज्ञानिक करारते हुए उनमें अपने निजी विचारों की मिलावट कर उसे ही अंतिम सत्य और आर्षग्रंथ बताकर हिंदुत्व के ऊंचे आदर्शों को बौना करने का काम किया..सनातनी हिंदुओं में फूट पैदा किया.हिंदुत्व को पाखंड और   पौराणिक शास्त्रों को गप्प बताया, कुल्ला कर मूर्तियों में थूकने की बात कही.           परिणाम स्वरूप हिंदू युवा धर्म च्युत होकर नास्तिक बनने लगे,ईश्वर के प्रति उनकी अनास्था बढ़ने लगी.आज भी हिंदू युव...

सत्य का प्रकाश◆◆◆

Image
#दयानंद_और_अंतिम_सत्य●●●    मूलशंकर तिवारी(दयानंद सरस्वती)इस भ्रांति में जीते रहे कि वह हिंदुत्व का भला कर रहे हैं, दरअसल उन्हें खुद हिदुत्व की पूरी समझ नहीं थी. ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि वे हिंदुत्व को केवल सतही, सरसरी तौर पर ही देखा था. उन्हें हिंदुत्व के पूजन विधान और कर्मकांड निरा दोषपूर्ण और पाखंड लगा.समाज सुधार की अपरिपक्व उत्तेजना में उन्हें भ्रम हो गया कि जिस बुनियाद पर हजारों वर्षों से हिंदुत्व टिका है,उसे अपने निजी कथित वैज्ञानिक विचारों से झटके भर में धता बताकर क्रांति लाने का प्रयोग किया. वे तमाम पुराने वेदभाष्यों और तमाम ग्रंथों को अवैज्ञानिक करारते हुए उनमें अपने निजी विचारों की मिलावट कर उसे ही अंतिम सत्य और आर्षग्रंथ बताकर हिंदुत्व के ऊंचे आदर्शों को बौना करने का काम किया..सनातनी हिंदुओं में फूट पैदा किया.हिंदुत्व को पाखंड और   पौराणिक शास्त्रों को गप्प बताया, कुल्ला कर मूर्तियों में थूकने की बात कही.           परिणाम स्वरूप हिंदू युवा धर्म च्युत होकर नास्तिक बनने लगे,ईश्वर के प्रति उनकी अनास्था बढ़ने लगी.आज भी हिंदू युव...