ज्ञान की बातें ध्यान से सुनो..
#जहाँ_भी_ज्ञान_की_दो_बातें_मिले_ध्या_से_सुनो●●● इसलिए विरोध न करो कि ज्ञान की बातें कहने वाला गैर मजहबी है, दूसरे धर्म से है।इसलिए असहज मत हों कि वो आपके शास्त्रों से इतर ज्ञान बताता है. ज्ञान शास्त्रों में कैद नहीं है. बड़े तजुर्बे कार ज्ञान का ताया है. उसकी सुनें.ज्ञान रखने की चीज नहीं, उसे ब्यवहार में लायें. जहाँ भी ज्ञान की दो बातें मिले गौर से सुनो.जरूरी नहीं कि वक्ता तुम्हारे अनूकूल कहे.उसके शब्दों से जहाँ आप घायल हुए समझो ज्ञान पा लिया. बुझदिली है उससे अदावत रखना.उसके पांव छू लो जिसने आपको शब्दों से घायल किया है और उन्हें उसी दिन से अपना गुरू मान लो.अदावत रखोगे या तो उसे मार दोगे या तिल तिल आप मरोगे. दुनिया में एक शख्सियत ऐसी भी हुई कि जिसने तलवार से नहीं बल्कि प्यार से दुनिया जीत ली.खौफ दिखाकर नहीं बल्कि क्षमा के बल से परचम लहराया. खून करके नहीं बल्कि खून देकर अमन का बादशाह हुआ.दुनिया उसे रब्बी गुरु बुलाती है. जहाँ भी ज्ञान की दो बातें मिले ध्यान से सुनें क्योंकि...लिखा है....नीतिवचन 2:2-4,9-11 और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगा कर सोचे; और प्रवीणता और समझ के ल...