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Showing posts from August, 2021

अगर वर्तमान में श्रीकृष्ण होते तो●●●

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कृष्ण आज वर्तमान में होते तो पक्का एंटी रोमियो में धरे जाते... और ज्यादा ज्ञान देते तो खुद को हिन्दू साबित नहीं कर पाते जन्म स्थान जेल की जगह जलालाबाद साबित हो जाता अगर गलती से गाय चराते मिल जाते गाय की तस्करी करता है समझो लींचिंग तय●●● कंस को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती एक WhatsApp ग्रुप बनाता बाकी सब जागे हुए हिन्दू को सुलाकर ही दम लेते जय श्री राम बोल बोल जय श्री राम पिछड़ों का सारा हिस्सा तुम खा रहे हो क्रीमी लेयर में आके मक्खन चुराता है  अर्बन नक्सल है तू तब तू कहाँ था? तेरे घर की कुर्की होगी।

कृष्ण जी माखनचोर ही हैं.

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#दयापंथियों के स्वामी हिंदुत्व ही ना समझ पाये! फिर दयापंथी माखनचोर को कहाँ समझ पायेंगे.?? पौराणिक हिंदुओं में भ्रान्ति है. श्रीकृष्ण भगवान नहीं वेद विरोधी है पौराणिक एक तरफ श्रीकृष्ण को भगवान मानकर पूजते हैं तो दूसरी तरफ रास रचईय्या,माखनचोर वस्त्र चोर भी मानते हैं!!         #दयापंथियों भगवान क्या रास भी नहीं रचा सकते हैं भक्तों भगतिनो के साथ??? यह पूरे संसार ही भगवान के रास के सिवाय कुछ नहीं है।जो इस तथ्य को समझ लेता है वह भगवान को समझ लेता है। दागदार चरित्र जिनके होते हैं वे हमेशा दाग दाग करेंगे।भगवान का को चरित्र नहीं होता है।उनमें कोइ दाग नहीं लग सकता है। माखन चुराने की घटना को अगर दयापंथी दाग समझते हैं तो यह उनके मंदबुद्धि को जाहिर करता है। शायद वे मानसिक रूप से दीवालिया की तरह बातें करते हैं। जिसके घर में भी बच्चे खेलते हँसते हैं उन्हें तो दयापंथियों की मंदबुद्धिता पर तरस और हँसी ही आएगी। सभी बच्चे बाल्यावस्था में चोरी करते हैं(मूर्खों के अनुसार) क्योंकि बच्चे को अयं निजः का बोध कहाँ???माखन है बस खा लिया।कौन मटकी अपनी माँ का है कौन बगलव...

समुद्र चोर,हत्यारा दानी है..

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†समुद्र के किनारे जब एक लहर आयी तो एक बच्चे का चप्पल ही अपने साथ बहा ले गयी| बच्चा रेत पर अंगुली से लिखता है "समुद्र चोर है"|  उसी समुद्र के एक दूसरे किनारे एक मछुआरा मछली पकड़ रहा होता है! वह उसी रेत पर लिखता है "समुद्र मेरा पालनहार है"|  एक युवक समुद्र में डूब कर मर जाता है| उसकी मां रेत पर लिखती है "समुद्र हत्यारा है"|  एक दूसरे किनारे एक गरीब बूढ़ा टेढ़ी कमर लिए रेत पर टहल रहा था| उसे एक बड़े सीप में एक अनमोल मोती मिल गया| वह रेत पर लिखता है "समुद्र दानी है"|  अचानक एक बड़ी लहर आती है और सारे लिखे मिटा कर चली जाती है|  समुद्र अपनी लहरों में मस्त रहता है| अपने उफान और शांति वह अपने हिसाब से तय करता है|       हार जीत, खोना पाना, सुख-दुख,हंसना,रोना जिंदगी का ही हिस्सा है। अगर जिंदगी सुख शांति से ही भरी होती तो आदमी जन्म लेते समय रोता नहीं|            ★धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकलकर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिसकी प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करनेवालों को दी है। जब किसी की परीक्षा...

मैं येसु पर विश्वास नहीं करता. क्या मैं दोषी हूँ??

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: मेरे अजीज आर्य बंधु शशांक शर्मा द्वारा पूछा गया सवाल. "मैं यीशु पर विश्वास नहीं करता, क्या मैं दोषी हूँ? क्योंकि बाईबल कहती है जो यीशु पर विश्वास नहीं करता वह दोषी ठहराया जा चुका है....            ...........शशांक भाई यदि यह आपकी जिज्ञासा है तो हमारा उत्तर यह है.  शशांक जी आपके सवालों का जवाब अगले आयत में ही है.आप यीशू में विश्वास क्यों नहीं करते??      यीशु ने कहा है बीमारों को वैद्य की जरूरत नहीं होती. यदि आप बीमार नहीं तो वैद्य की जरूरत नहीं है.    यीशु ने ये भी कहा है मैं धर्मियों को नहीं विधर्मियों, पापियों को राह दिखाने आया हूँ.     यदि आप पाप रहित हैं, यदि आप निष्पाप,निष्कलंक हैं तो यीशु की जरूरत आपको नहीं हैं. आप दोषी नहीं.      दोषी वह है जो अंधेरे में रहकर रोशनी को ठुकराता है, दोषी वो है जो अधर्म नहीं छोड़ता. दोषी वो है जो विधर्मी है.दोषी वह ठहराया जायेगा जो गुनाहों से तौबा नहीं करता.       आप तो नेक हैं, जन्म से लेकर आजतक आपने कोई पाप नहीं किया है, आप अधर्म नहीं करते, आप धर्म ...

पशु का प्रकटन.बाईबल की भविष्यवाणियों को कैसे समझें??

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☦विनाश का पुत्र 🔯👹👿👿👿👿👹 Vol:32 पशु का प्रकटन(महाक्लेश काल का पूर्वाद्ध) आईये कुछ दर्शनों को देखें..'"एक स्त्री जो सूर्य ओढ़े हुए थी,और चांद उसके पाँवों तले था.और उसके सिर पर.......वह गर्भवती हुई और चिल्लाती थी।"(प्र.वाक्य12)      एक पशु समुद्र में से निकला जिसके दस सींग और सात सिर थे. उसके सिरों पर परमेश्वर की निंदा के नाम लिखे थे. यह भयानक पशु समुद्र में से निकला.प्रका.वाक्य के 17वें अध्याय में वर्णित पशु जंगल से निकला. यहाँ जंगल से आशय अधर्म, बुराई और शैतानी हरकतों से है. परमेश्वर की निंदा करनेवाला पशु समुद्र से निकला. समुद्र जाति और राष्ट्र को दर्शाता है. वह पशु छदम वेशी होगा. वह संसार में राष्ट्र और जाति का प्रतिनिधि बनकर प्रकट होगा. समुद्र एक सांकेतिक शब्द है जो राष्ट्र, जाति और विभिन्न भाषा-भाषी के लोगों को इंगित करता है. जबकि जंगल उस बियाबान कंटीले प्रदेश का प्रतीक है जो परमेश्वर की महिमा से रहित प्रदेश(यशा.35)        पशु के दस सींग,सात सिर,भयंकर शारीरिक बनावट चीते के समान, पंजे रीछ के और मुख सिंह के जैसे. इसका विस्तृत खुलासा मैंने पिछली क...

बाईबल भविष्यवाणियां कितनी झूठी कितना सच??

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☦विनाश का पुत्र⚛ कड़ी:33 👹👿👿👿👿👹 महाक्लेश काल का उत्तरार्द्ध...... महाक्लेश काल के शूरूआती साढ़े तीन साल में पूरा विश्व पशु(विनाश के पुत्र)की महाशक्ति देखेगा. बर्बरता, उपद्रव, तांडव, उत्पात की हदें लांघी जायेगी.       भविष्वाणियों का सातवाँ राज्य यूरोपीय संघ के अलग अलग शक्तिशाली राष्ट्र एकजुट होकर एक मत होकर उस पशु को जो जातियों का प्रतिनिधि बनकर छद्मवेश में आयेगा,सारी शक्तियां और अधिकार सौंप देंगे.(प्रका.वाक्य17:13)    इस प्रकार पशु यूरोपीय संघ की ताकत को शिथिल कर देगा और इस साढ़े तीन वर्षों में सात बड़े बड़े कामों को अंजाम देगा.....      #1:रूस मध्य एशिया, अफ्रीका और एशिया माइनर के मुस्लिम देशों को एकजुट करेगा और उसका अगुआ बनकर इस्राएल पर आक्रमण करेगा(यहेजकेल38:1-9)यहेजकेल नबी की पुस्तक38,39वें अध्याय में इन देशों की सूची इस प्रकार है... जो रूस से मिलकर इजरायल पर हमले करेंगे रोश(रूस),मेशक(मॉस्को)तूबल(तुबलस्क)फारस जो वर्तमान में ईरान कहलाता है, कूस(इथियोपिया),पूत(लीबिया)गोमर जो अभी जर्मनी कहलाता है, तोगमी के घराने(टर्की, अर्मेनिया, मध्य एशिया के ...

मूलशंकर तिवारी महर्षि कैसे हुए??

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वेदमंत्रों के अर्थ तीन प्रकार से किये जाते हैं-#आधिभौतिक, #आधिदैविक और #आध्यात्मिक. वेदों का भाष्य अति प्राचीन काल से होता आया है. सायणाचार्य के अतिरिक्त किसी भाष्यकार ने चारों वेदों का पूर्ण भाष्य नहीं कर पाया. प्राचीन वेद भाष्यकारों में स्कन्द स्वामी, उद्गीथ, बररूचि,वेंकटमाधव,आत्मानंद, भरतस्वामी आदि का नाम उल्लेखनीय है.  सायणाचार्य के वेद भाष्यों में व्याकरण का भी ध्यान रखा गया है. सायणाचार्य भाष्य के आधार पर ही कुछ भारतीय तथा पाश्चात्य विद्वानों ने वेद भाष्यों की रचना की है. यास्काचार्य ने #निरुक्त में वेद भाष्य के मार्ग लिया किन्तु मंत्रार्थ के अतिरिक्त किसी भी वेद का भाष्य उन्होंने नहीं किया.         सायणाचार्य ने "निरुक्त" का भी अपने वेद भाष्यों में प्रयोग किया है. सायणाचार्य ने प्राचीन परंपरागत अर्थ शैली को ही अपनाया है और उसकी पुष्टि के लिए श्रुति, स्मृति, पुराण तथा अन्यान्य धर्म ग्रंथों का प्रमाण भी उद्धृत किया है.        सायणाचार्य सभी भाष्यकारों में बड़े और प्रमाणिक हैं.      दयानंद जैसे संदिग्धज्ञानधारी उन्हीं के भाष...

बपतिस्मा क्या है? क्या इससे पाप क्षमा मिल जाता है?

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#बपतिस्मा क्या है?      १:बपतिस्मा से पाप क्षमा होती है? २:ईसाई मुझे गाली गलौच करते हैं तो उन्हें सजा मिलेगी या उनके पाप क्षमा हो जायेंगे?           मेरे अजीज़ आर्य मित्र हमसे यही सवाल दोहराते हैं. #बपतिस्मा एक संस्कार है. जिसमें बपतिस्मा लेनेवाला अपने अतीत के अपराधों पर पश्चताप करके नई शूरुआत करता है और अपने जीवन को ईश्वर के लिए समर्पित करता है.       वह पाप के लिए खुद को मरा हुआ और नेकी के लिए जिंदा जानता है.ईसाई कहलाना मात्र उद्धार की,पाप क्षमा की गारंटी नहीं है. बपतिस्मा एक अवसर है मन परिवर्तन का, नये जीवन की शुरुआत का. इसलिए उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नये जीवन के अनुसार चाल चलें। क्योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्‍वर के लिये जीवित है। ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्‍वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। इसलिए पाप तुम्हारे नाशवान शरीर में राज्य न करे, ...

आपको ईश्वर पर दे...

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#ईश्वर_आपको_पर_दे ◆◆◆ असली गुरू वही होता है जो अंधकार से प्रकाश में ले आये.'गु'नाम अंधकार और "रू"नाम प्रकाश, अर्थात जो अंधेरे से प्रकाश में ले आये. आज ऐसे ऐसे गुरूघंटालों की कमी.नहीं है जो उजाले में खड़े आदमी को भी अंधेरे में खींच ले आयें. आज जितने भी कथित धर्म, मत,संप्रदाय, मजहब के अनुयायी हैं. सभी किसी न किसी धर्म ग्रंथो में विश्वास रखते हैं. और तमाम अलग अलग दावे हैं.         कोई आसमान से उतरी किताब बताता है, कोई ईश्वर की वाणी बताता है, कोई देव वाणी तो कोई सनातन और पुरातन बताकर अपने धर्म ग्रंथों की प्रमाणिकता सिद्ध करने में लगा है. इसमें लिखा सब कुछ भगवान का कहा हुआ है.......           इनसे ऊपर उठकर एक राज आप जान लें.एक शास्त्र आपके ह्रदय में भी है. उसे भी बांचने का समय निकालें. इसे पढ़ने के लिए आपको पढ़ा लिखा होना,डिग्रीधारी होने की कतई जरूरत नहीं है. उसे पढ़ने के खुद को अकेला छोड़िये और रम जाईये. आप पायेंगे कि लिखी लिखाई ईश्वरीय ज्ञान और ईश वाणी तो सुप्त है जिसे पाने को उदिम चाहिए, प्रपंच चाहिए,कर्मकांड सा...

शास्त्रार्थ उनका

#शास्त्रार्थ उनका....       धार्मिक लफ्फाजों की कॉमन बदमाशी ये होती है की वे दूसरों की कमियाँ निकालकर खुद को बेहतर बताएँगे..लेकिन जब एक्सपोज हो जाते हैं तो उनका सब से पहला पैंतरा यही होता है कि हम गंदे हैं तो क्या हुआ तुम भी गंदे हो. जब कि शुरुआत वे खुद को पाक साफ बताने से करते हैं लेकिन बाद में शोर मचाकर उस बात पर ध्यान नहीं आने देते कि उन्होने खुद को  बेदाग बताया था।     सामनेवाले को मूर्ख बताकर स्वघोष विद्वान बनने की होड़ मची है.     शास्त्रार्थ और समीक्षा के नाम पर कुतर्क,आक्षेप और गलौच!!!     सामनेवाले को विधर्मी, राक्षस बताकर खुद के धर्मी बताने का विज्ञापन!!! #आज_बाजार_में_सोना_औंधे_मुँह_गिरा...इस पर समीक्षा हो तो..     🤣सोने का मुँह है ही कहाँ कि औंधे मुँह गिरेगा!!!??☺☺    बस यही है इनका शास्त्रार्थ और विद्वता का स्तर।।।।     हमारी बातें कुछ विद्वानों को कड़वी लग सकती है लेकिन कोई बात नहीं. सच्ची बातें कड़वी ही होती हैं....

प्रायश्चित्त करनेवालों ईश्वरीय अनुग्रह होती है.

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#ईसाइयों_का_ईश्वर_अन्यायी_है_पाप_क्षमा_करके_पाप_करने_को_प्रोत्साहित_करता_है●●●        #दयापंथी बंधुओं क्षमा इसलिए नहीं की जाती कि पाप या गलतियां फिर से दोहराई जायें.रिहाई इसी बिना पे होती है कि दोबारा गुनाह न करो.जहाँ क्षमा का विकल्प नहीं है वहाँ निर्ममता है, दयालुता नहीं. और ईश्वर दयालु है कृपालू है. क्षमा ईश्वर के न्यायी होने पर प्रश्नचिह्न खड़ी नहीं करता. क्योंकि ईश्वर के पास सारे उपाय और हल हैं.         हमने देखा है रेप पीड़ित मसीही बहन ने सजा याप्ता गैर मसीही भाई को जेल में राखी बांधते हुए. उसे माफ करते हुए.               कर्मों का फल निश्चित है मगर हमारे यहाँ प्रायश्चित और क्षमा का विकल्प भी है. क्षमा को गुनाह करने का लाईसेंस समझना बेईमानी है.क्षमा ईश्वरीय अनुग्रह है. प्रायश्चित का परिणाम या फल ईश्वरीय अनुग्रह है. ऐसा तो वेद भी बताता है.         .  बाईबल ईश्वर को देर से क्रोध करनेवाला अति करूणा मय,ईर्ष्या करनेवाला बताती है. यशायाह 30:18 तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब...

विनाश का पुत्र और 666 का अंक

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☦विनाश का पुत्र🔯 Vol:30 👹👿👿👿👿👹 आईये विनाश के पुत्र अर्थात ख्रीस्त विरोधी तानाशाही सातवें राज्य यूरोपीय संघ की दानिएल नबी की,पूरी होती भविष्वाणियों को खंगालें...        दरअसल रोमन साम्राज्य के पतन के पश्चात यह संघ अस्तित्व में आया जो भविष्वाणियों का सातवां राज्य है. जो यूरोप के शक्तिशाली विकसित राज्य जैसे ग्रेट ब्रिटेन,इटली, पुर्तगाल जैसे देशों का संघ है. वर्तमान में इस संघ में और 25छोटे बड़े देश शामिल हो चुके हैं. यह संघ वास्तव में यूरोप के एकीकरण की ओर बढ़ता कदम है. इन देशों के बीच ब्यापारिक,राजनैतिक एकता के लिए आवश्यक एक साझा पार्लियामेंट का निर्माण किया गया है. संघ के सदस्यों के प्रतिनिधि चुन कर यूरोपीय पार्लियामेंट में आते हैं और नीतिगत निर्णय लिये जाते हैं. ब्रूसेल्स में यह विशाल पार्लियामेंट भवन स्थित है. जिसमें यूरोपियन कामन मार्केट(ECC)और तीन मंजिल में सिर्फ विशाल काम्प्यटर स्थापित किया गया है जो पूरे विश्व को दस भागों में विभाजित कर उनकी समस्त जानकारियां एकत्रित करता है.       सन् 1977में यूरोपियन कामन मार्केट के प्रमुख विश्लेषक डॉ.हेन्ड्...

ईश्वर बूढ़े हो गए हैं!!??

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✨एक 6 साल का छोटा सा बच्चा अक्सर ईश्वर से मिलने की जिद किया करता था। उसे ईश्वर के बारे में कुछ भी पता नही था पर मिलने की तमन्ना भरपूर थी।उसकी चाहत थी कि ईश्वर मिले तो एक समय की रोटी वो ईश्वर के सांथ खायेगा। एक दिन उसने थैले में 5-6 रोटियां रखीं और परमात्मा को ढूंढने निकल पड़ा चलते चलते वो बहुत दूर निकल आया संध्या का समय हो गया। उसने देखा नदी के तट पर एक बुजुर्ग माता बैठी हुई हैं, जिनकी आँखों में  गजब की चमक थी, प्यार था,और ऐसा लग रहा था जैसे उसी के इन्तजार में वहां बैठी उसका रस्ता देख रहीं हों। वो 6 साल का मासूम बुजुर्ग माता के पास जा कर बैठ गया, अपने थैले में से रोटी निकाली और खाने लग गया। फिर उसे कुछ याद आया तो उसने अपना रोटी वाला हाँथ बूढ़ी माता की ओर बढ़ाया और मुस्कुरा के देखने लगा, बूढी माता ने रोटी ले ली , माता के झुर्रियों वाले चेहरे पे अजीब सी ख़ुशी आ गई आँखों में ख़ुशी के आँसू भी थे,,,, बच्चा माता को देखे जा रहा था , जब माता ने रोटी खा ली बच्चे ने 1 और रोटी माता को दी। माता अब बहुत खुश थी। बच्चा भी बहुत खुश था। दोनों ने आपस में बहुत प्यार और स्नेह के पल बिताये। जब रात घिरने लगी...

न घबरा ना फिकर कर..

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❇न घबरा, न फिकर कर...... ऐ इंसां किस बात का डर है तुम्हें?और चिंता किस बात की? क्या तुझे मौत डरा सकती है?क्या तुम्हें अपने जीवन की फिकर है?किससे तू घबराता है?किसकी चिंता है तुम्हें? तू ना डर,न घबरा, न फिकर कर । क्योंकि"जो कुछ हुआ वह इससे पहले भी हो चुका है और जो होने वाला है वह हो भी चुका है"सभो.3:15 मौत से क्या डरना जो तय है.... तू पैदा क्यूँ हुआ? पैदा हुआ तो तेरी मौत निश्चित है। तू अपनी चिंता करके अपने पकते बाल और गाल की चमक, भाल की झुर्रियां छुपा सकता है? अपने जीवन का आनंद कर..अपने जीवन की चिंता करना हवा को पकड़ना है,मृत्यु का खौफ ब्यर्थ है। सभो.3:12"मैंने जान लिया कि मनुष्य के लिए आनंद करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय कुछ भी अच्छा नहीं...।" भलाई कर भला होगा, बुराई कर बुरा होगा.। डरना है तो उस रब से डर.क्योंकि जिसने भी उससे डरा है फिर कभी किसी से नहीं डरा है।चिंता कर तो उसी की कर.क्योंकि तेरी फिकर वही करता है।

माँसाहार पर बाईबल क्या कहती है??

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ईसाईयत न कभी मांसाहार को गलत बताती है ना इसे पाप बताती है,बल्कि एक स्पष्ट बात कहती है""इसलिए जो सब कुछ खाता है उसे, उस व्यक्‍ति को नीचा नहीं समझना चाहिए जो सब कुछ नहीं खाता है; उसे दूसरे व्यक्‍ति की बुराई नहीं करनी चाहिए जो सब कुछ खाता है, क्योंकि परमेश्‍वर ने उसे भी स्वीकार किया है। अच्छा यह है, कि न मांस खाया जाए और न शराब पी जाए या ऐसी और कोई वस्तु जिसके सेवन से तुम्हारे भाई-बहन को ठोकर लगे, वह नाराज़ हो जाए या कमज़ोर बने। रोमियों 14:3, 21     भोजन को लेकर हिन्दू सनातन मत बहुत स्पष्ट रहा है। आपको जिस प्रकार के कार्य करने की आवश्यकता है वैसा ही भोजन आप खाएं। आप एक क्षत्रिय हैं, आपको युद्ध लड़ने हैं तो आप एक प्रकार का भोजन खाएं, आप एक विद्यार्थी हैं तो दूसरे प्रकार का भोजन खाएं, अगर आप एक योगी होना चाहते हैं तो एक अन्य प्रकार का भोजन आपको उचित पड़ेगा।       क्षत्रिय वैदिक काल से ही मांसाहार करते आये हैं. ब्राह्मण भोजन(शाकाहार)सभी पर थोपना जायज नहीं है.श्रीराम जी क्षत्रिय वर्ण से रहे तो क्या उन्होंने मांसाहार नहीं किया होगा?     देश काल और परिस्थियां भोज...

विनाश का पुत्र 28

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☦विनाश का पुत्र🔯 👹👿👿👿👿👹 Vol:28 ईसा के समय में भी अर्थात new testamentकाल में संपूर्ण यूरोप, अफ्रीका के उत्तरी देश और पूर्व में एशिया माइनर तथा पलिसतीन देश रोमन साम्राज्य के आधीन था.रोम के प्रशासन के अंतर्गत अलग अलग क्षेत्रों में उसी के गवर्नर नियुक्त होते थे.        रोमी गवर्नर अगस्तुस कैसर की आज्ञा से युसूफ और मरियम को नाम लिखाई के लिए गलील से पुरखों के मूल नगर बैतलहम आना पड़ा. हजारों साल की धार्मिक शास्त्रों की भविष्यवाणियों के अनुसार ईसा का जन्म बैतलहम में ही हुआ. हेरोदेस गवर्नर के आदेश कि दो साल से कम उम्र के बालकों का कत्ल हुआ था.ईसा को बचाने के लिए युसुफ को मिश्र(एजिप्ट)भागना पड़ा.     गवर्नर पिलातुस ने ही ईसा को सूली पर लटकाने आदेश न चाहते हुए दिया. रोमन साम्राज्य"पैशान" धर्म को मान्यता देता था. यूनानी राज्य हमेशा से रोमी साम्राज्य का विरोध करता रहा. यूनानी सभ्यता का प्रभाव सबसे अधिक होने के कारण यूनानी देवताओं को भी संरक्षण मिला. रोमी साम्राज्य में सभी देवताओं को संरक्षण मिला लेकिन ईसा पर ईश विरोधी होने का इल्जाम लगा.षड्यंत्र हुआ.    ...

सहोत्पन्न भाई बहन के वैवाहिक संबंध तब जायज थे..

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आदम हव्वा के संतानों के बीच वैवाहिक संबंध स्थापित हुए!?? परिस्थिति के अनुसार ऐसा होना लाजिमी था.यही तो #यमी बता रही है कि अमैथुनि सृष्टि के बाद भाई बहन संतान प्राप्ति के लिए पति पत्नी हो सकते हैं..       जब यमी यह बात कह रही है और यह ऋग्वेद में है जिसे सबसे पुरातन ग्रंथ माना जाता है तो यमी के बातों से स्पष्ट है कि यम यमी काण्ड आदम की संतानों के बाद हुआ..??🤔          प्रभु की अमैथुनी मानससृष्टि में उत्पन्न हुए-हुए प्रभु के अमृत पुत्रों ने इस सहोत्पन्न वैवाहिक संबंधों की कामना की.वे तो इस संबंध को और पत्नी में संतान के आधान को एक मनुष्य के निश्चय से त्याग को समझते हैं. संतान निर्माण के लिए यह वीर्य का दान तो सचमुच महान  त्याग है.      इसलिए हे #यम!तेरा मन हमारे मन में निहित हो.तू मेरी कामना करनेवाला हो,मुझे पत्नी रुप से चाहनेवाला बन.संतान को जन्म देनेवाला मेरा पति बनकर मेरे शरीर में प्रवेश कर..ऋग्वेद१०/१०/३        डामेज कंट्रोल करनेवाले रात दिन पति पत्नी बताने लगते हैं. ऐतिहासिक तथ्य सत्य कैसे बदल सकते हैं.!?...

कहे कबीर दीवाना●●●

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#कहे_कबीर_दीवाना●●●               ब्राहमण डरता है अगर क्षत्रिय ज्ञानी हो जाए तो उसके पास जाने से। क्षत्रिय डरता है अगर वैश्य ज्ञानी हो जाए, उसके पास जाने से। वैश्य डरता है अगर .शूद्र ज्ञानी हो जाए, उसके पास जाने से।        *चमार रैदास के पास कोई भी न गया। सेना नाई के पास कोई भी न गया। जुलाहे कबीर के पास कोई भी न गया। वे आखिरी हैं। उनके पास ऊंची श्रेणी के लोग भयभीत होते हैं।* स्वभावत: वे ही लोग गये, जो उसी श्रेणी के थे। इसलिए कबीर को मानने वालों की संख्या निम्न वर्ग के लोगों में मिलेगी। निम्नवर्ग के लोगों के पास न तो धन है, न पद है, न प्रतिष्ठा है। वे किसी को ऊपर आकाश में उठाना भी चाहें तो नहीं उठा सकते। सच तो यह है, उन के कारण ही कोई आकाश में हो तो वह भी जमीन पर उतर आएगा। उनके पास कुछ भी तो नहीं है। *इसलिए कबीर को माननेवाले कबीर को तो ऊपर नहीं उठा सके। कैसे उठाते? कोई उपाय न था। कोई सीढ़ियां न थीं उनके पास। बल्कि उनके मानने के कारण —चमार, भंगी, शूद्र और हरिजन कबीर को मानने लगे; उस कारण और भी अड़चन हो गई पंडित को, ब्राहमण को, क्षत्रि...

मैं हूँ●●●

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#मैं_हूँ◆◆◆ परमेश्वर संपूर्ण ब्रह्माण्ड का संगठित रूप है.वही सारी सृष्टि का कर्त्ता है,सारी ऊर्जाओं और ज्ञान का स्रोत वही है. "मैं हूँ" ही ईश्वर है.बाईबल में ईश्वर ने अपना परिचय यही बताया है.(यदि वे मुझसे पूछें,'उसका क्या नाम है?'तब मैं क्या बताऊँ?'परमेश्वर ने मूसा से कहा-"मैं जो हूँ सो हूँ"फिर उसने कहा -"तू इस्राईलियों से यह कहना 'जिसका नाम "मैं हूँ"है.....निर्गमन3:13-14) भारतीय दर्शनों में इसको अलग अंदाज में बयां किया गयाहै.ज्ञान को ही ईश्वर की वाणी बताया गया है. ज्ञान का स्रोत ईश्वर ही है. ज्ञान अर्थात वेद।।वेद अर्थात ईश्वर की वाणी. वेद में व्यवहारिक और औपचारिक ज्ञान और सहज ज्ञानों को भी ईश्वरीय ज्ञान बताया गया है.वेद का ज्ञान सांसारिक है इसे ब्यवहार में लाकर इंसान इंसान बन सकता है.यहाँ ज्ञान की महिमा है. ज्ञान के स्रोत का नहीं।स्तूति उसकी होनी चाहिए जो मूल हो,स्रोत हो.                  बाईबल उसी मूल शक्ति केंद्र,एक सर्वशक्तिमान सत्ता से उत्पन्न होने का अनुमान व विश्वास व सम्भावना और इतिहास को पुख्ता करता है. अब यदि संसार में एक सर्...

परमेश्वर एक है तो अलग अलग ईश्वरों के लिए झगड़े क्यों??

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पर्यावरण और इंसानी सभ्यता का संबंध सदियों पुराना रहा है. प्राचीन काल में हम बह्मांड के पंचतत्वों को ही भगवान मानते थे.   भ से भुमि ग से गगन व से वायु अ से अग्नि और  न से नीर.. इन्हीं पंच महाभूतों से हम सब और सार जीव जगत बना है. भगवान को किसी मंदिर, मस्जिद या गिरजे में कैद नहीं किया जा सकता.वह तो हमारे शरीर में ही है.हममें है.जबतक यह ज्ञान था सब ठीक था.        जटिलताएं तब आईं जब हमारा भरोसा हमसे ही उठ गया. हमें गलतफहमी हो गई कि भगवान हमसे कहीं दूर रहता है. हमने उसे मंदिरों के गर्भ गृह में, मस्जिदों और गिरजों में ताले जड़कर कैद लिया. यह हमारी गलतफहमी ही थी और है भी.             हम डरे डरे, सहमे हुए और दबे दबे रहने लगे.भगवान को हमसे अलग मानने लगे,डर की पूजा करने लगे,नदियों, पर्वतों, पत्थरों, पेड़ों, महापुरुषों को ही भगवान समझने की भूल करते रहे.         वेद शास्त्र, कुरान और बाईबल एकेश्वर का ही जिक्र करते हैं.     परमेश्वर एक ही है जो पंचभूतों और सारी सृष्टि का कर्ता है.विभिन्न धर्म शास्त्रों में चंद मतभ...

बाईबल लेखकों को कैसे मालूम हुआ मरियम गर्भवती होगी??

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मानव शरीर अतींद्रिय क्षमताओं का घर है. यदि उसे विकसित कर लिया जाये तो इंसान चमत्कारिक क्षमताओं से युक्त हो जाता है. अतींद्रिय क्षमताओं को विकसित करने के तरीक़े अलग अलग हो सकते हैं. भारतीय दर्शनों में इसे योग,अष्टांग योगादि कहा गया है. जितने भी चमत्कारिक क्षमताओं से युक्त महापुरुष हुए. किसी ना किसी रूप में अपनी क्षमताओं को उन्नत और समृद्ध कर लिया था.            नबी, ऋषि और पैगम्बर अतीन्द्रिय क्षमताओं से युक्त थे. राम,कृष्ण और जितने भी अतीन्द्रिय क्षमताओं से युक्त पुरूष हुए सब जनकल्याण के कामों से लोगों को ईश्वरोन्मुख करने का ही काम किया है.     ईसा मसीह इन सबमें अलग ही स्थान रखते हैं. ईसा ने अपनी अतीन्द्रिय क्षमताओं को जनसेवा में लगाया, सेवा,बीमारों,दीन दुखियों, असहायों,निसहायों,अंधेरे में जीने वालों को रोशनी में लाने में लगाया. नफरत पालने वालों को मुहब्बत सिखाया, बैरियों से भी मुहब्बत करना सिखाया, पड़ौसियों से अपने समान प्रेम करना सिखाया,         दया,क्षमा,प्रेम और परोपकार, धीरज,संयम,शांति और उद्धार मोक्ष का रास्ता बताया जिससे वो...

सूचना देने वाले को चालीस हजार ईनाम..

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#सूचना_देने_वाले_को_40_हजार_का_ईनाम◆◆◆                   गोपाल सिंह एक सेवानिवृत अध्यापक हैं।  सुबह दस बजे तक वे एकदम स्वस्थ प्रतीत हो रहे थे। शाम के सात बजते- बजते तेज बुखार के साथ-साथ, वे सारे लक्षण दिखाई देने लगे, जो एक कोरोना पॉजीटिव मरीज के अंदर दिखाई देते हैं। परिवार के सदस्यों के चेहरों पर खौफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था । उनकी चारपाई घर के एक पुराने बड़े से बाहरी कमरे में डाल दी गयी, जिसमें इनके पालतू कुत्ते "मार्शल" का बसेरा है। गोपाल जी कुछ साल पहले एक छोटा सा घायल पिल्ला सड़क से उठाकर लाये थे और अपने बच्चे की तरह पाला और इसका नाम दिया "मार्शल"। इस कमरे में अब  गोपाल जी, उनकी चारपाई और उनका प्यारा मार्शल है। दोनों बेटों -बहुओं ने दूरी बना ली और बच्चों को भी पास ना जानें के निर्देश दे दिए गयेl सरकार द्वारा जारी किये गये नंबर पर फोन कर के सूचना दे दी गयी। खबर मुहल्ले भर में फैल चुकी थी, लेकिन मिलने कोई नहीं आया। साड़ी के पल्ले से मुँह लपेटे हुए, हाथ में छड़ी लिये पड़ोस की कोई एक बूढी अम्मा आई और गोपाल जी की पत्नी से बोली - "अरे कोई इसके...

ईसाइयों का परमेश्वर मनोविकारी है..

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ईसाइयों के ईश्वर क्रोध करनेवाले हैं!!! यह तो मनोविकार है..              गुनाह के प्रति परमेश्वर की असहिष्णुता उसकी विशिष्ट हस्ती है; परमेश्वर का क्रोध उसका विशिष्ट स्वभाव है; परमेश्वर का प्रताप उसकी विशिष्ट हस्ती है। परमेश्वर के क्रोध के पीछे का सिद्धान्त उस पहचान और हैसियत को दर्शाता जिसे सिर्फ उसने धारण किया है।        ईश्वर के धर्मी स्वभाव के प्रदर्शन का एक पहलू है, फिर भी परमेश्वर का क्रोध अपने लक्ष्य के प्रति विवेकशून्य या सिद्धान्तविहीन बिलकुल भी नहीं है। इसके विपरीत, परमेश्वर क्रोध करने में बिलकुल भी उतावला नहीं है, न ही वह अपने क्रोध और प्रताप को जल्दबाजी में प्रकट करता है। इसके अतिरिक्त, परमेश्वर का क्रोध विशेष रूप से नियन्त्रित और और नपा-तुला होता है.          परमेश्वर का स्वभाव उसकी स्वयं की अंतर्निहित हस्ती है,जो अद्वितीय है. यह समय के गुज़रने के साथ बिलकुल भी नहीं बदलता है, उसका अंतर्निहित स्वभाव उसकी स्वाभाविक हस्ती है। इसके बावजूद कि वह किसी पर अपने कार्य को क्रियान्वित करता है, क्योंकि उसकी हस...

ईश्वर है तो वह दिखता क्यों नहीं??

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ईश्वर है तो वह दिखता क्यों नहीं??? हमने ईश्वर को देखा है.और आप? ईश्वर हमारे ही मध्य है.  बाईबल कहती है... "और सब का एक ही परमेश्‍वर और पिता है*, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है। इफिसियों 4:6       आँखों से जगत की सृष्टि को देखा जा सकता है, उसका अनुभव किया जा सकता है.लेकिन सृष्टि के कर्ता(ईश्वर)को देखने के लिए गहन अनुभूति चाहिए. ईश्वर पंचेन्द्रियों से नहीं देखा जा सकता. वह भावनुभूतियों से महसूस किया जा सकता है.          दृष्टि, ध्वनि, गंध,स्वाद और स्पर्श यह पंचेन्द्रिय आयामों से संबद्ध हैं. इसी से एक और पहलू जुड़ी है #अनुभूति।। लौकिक दुनिया में इसकी गिनती नहीं की जाती.        ध्वनि को आँखों से नहीं देखा जा सकता, प्रकाश को कानों से नहीं सुना जा सकता बल्कि आँखें इसे देख सकती हैं. गंध को स्पर्श नहीं किया जा सकता इसे नाक से ही सूंघा जा सकता है.        ईश्वरोन्मुख आत्मा ईश्वर की अनुभूति करती है. ईश्वर को देखने के लिए अलौकिक आँखें चाहिए. हमारे चारों तरफ अवसाद के कण,आवेश,क्रोध, नफरत, दंभ,झूठ के कण ह...

ईसाईयों के परमेश्वर की बीवियां बेटे बेटियाँ सास स्वसुर होते हैं...

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👹ईसाइयों से ये पूछना चाहिए कि ईश्वर के बेटे कौन हैं?       👿ईसाइयों के ईश्वर की पत्नी, सास,श्वसुर, साला और संबंधी कौन हैं.?      उत्पत्ति6:1-4 के संदर्भ में दुराग्रही तत्वों द्वारा अक्सर यही सवाल किये जाते हैं. बाईबल हरेक इंसान को ईश्वर की संतान बताती है.             और तुम्हारा पिता हूँगा, और तुम मेरे बेटे और बेटियाँ होंगे; यह सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर का वचन है।” (2 शमू. 7:14, यशा. 43:6, होशे 1:10) 2 कुरिन्थियों 6:18                 देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्‍वर की सन्तान कहलाएँ, और हम हैं भी; इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना। 1 यूहन्ना 3:1             बाईबल सारी मानव जाति को ईश्वर की संतान कहती है. इसका मतलब ये नहीं कि उसकी कोई बीवी है.या सैकड़ों वीवियां रही होंगी.या इसका यह कतई मतलब नहीं कि परमेश्वर इंसानों की तरह मानवीय संबधों में जीता है. हाँ संतानें बुरी या अच्छी हो सकती हैं. अच्छी संतानें ...

दयानंद और अंतिम सत्य..

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#दयानंद और अंतिम सत्य....।।    ...मूलशंकर तिवारी(दयानंद सरस्वती)इस भ्रांति में जीते रहे कि वह हिंदुत्व का भला कर रहे हैं, दरअसल उन्हें खुद हिदुत्व की पूरी समझ नहीं थी. ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि वे हिंदुत्व को केवल सतही, सरसरी तौर पर ही देखा था. उन्हें हिंदुत्व के पूजन विधान और कर्मकांड निरा दोषपूर्ण और पाखंड लगा.समाज सुधार की अपरिपक्व उत्तेजना में उन्हें भ्रम हो गया कि जिस बुनियाद पर हजारों वर्षों से हिंदुत्व टिका है,उसे अपने निजी कथित वैज्ञानिक विचारों से झटके भर में धता बताकर क्रांति लाने का प्रयोग किया. वे वेदों और तमाम ग्रंथों को अवैज्ञानिक करारते हुए उनमें अपने निजी विचारों की मिलावट कर उसे ही अंतिम सत्य या आर्षग्रंथ बताकर हिंदुत्व के ऊंचे आदर्शों को बौना करने का काम किया..                 ईसाईयत और इस्लाम के बढ़ते प्रभाव और लोकप्रियता को रोकने के लिए उन्होंने आर्य समाज की स्थापना कर अपनी महत्वकांक्षा के लिए हिंदुत्व को ही कमजोर और पाखंड बताकर शास्त्रार्थ और सभाएँ आयोजित कर खुद को स्वघोष विद्वान करने का प्रयोग किया. इसी उतावले...

स्वघोष विद्वान दयापंथि..

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#स्वघोष_विद्वान_दयापंथी●●◆ #दयापंथियों से पूछो कि.... आम को अंग्रेजी में क्या कहते हैं? तो इनका उत्तर इस तरह होता है.. 🤔केले को अंग्रेजी में बनाना कहा जाता है, लेकिन उसमें आम के पेड़ की तरह लकड़ी नहीं होती और लकड़ी न हो तो एप्पल जो तुम खाते हो उसे बनाना कैसे कहा जायेगा!बताओ??😊😊      बस यही #दयापंथियों की विद्वता का स्तर है. नंगा नहायेगा क्या और निचोड़ेगा क्या?? दयापंथियों की विद्वता का स्तर लोग जानते हैं. सामने वाले को मूर्ख बता दो और बन जाओ #स्वघोष_विद्वान😎😎   मूलशंकर चूहे के प्रसाद खा भर लेने से विचलित हो गये!!?       चूहा वेद को भी कुतर लेता तो मूलशंकर क्या करता??? वैसे चूहे के प्रसाद खा लेने से जो भाव मूलशंकर के मन में जागे वह भाव बाकियों पर क्यों नहीं जागते??जबकि अनेक ऐसे मंदिर हैं जहाँ चूहों को प्रसाद खिलाया जाता है.

जागते रहो...

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#जागते_रहो●●● #जीसस को सोये हुए लोगों ने इसलिए सूली पर लटका दिया क्योंकि जीजस उनकी नींद में खलल थे. जीजस का कसूर इतना था कि वो जागे हुए थे और सोये हुओं को जगाते थे.            जीवन बीत जाता है और आनंद की झलक भी नहीं मिलती। यह आदमी होश में नहीं कहा जा सकता है। दुख, चिंता, पीड़ा, उदासी और पागलपन सारे जन्म से लेकर मृत्यु तक की कथा है। लेकिन शायद हमें पता नहीं चलता, क्योंकि हमारे चारों तरफ भी हमारे जैसे ही सोए हुए लोग हैं। और कभी अगर एकाध जागा हुआ इंसान पैदा होता है, तो हम सोए हुए लोगों को इतना क्रोध आता है कि हम बहुत जल्द ही उस इंसान की हत्या कर देते हैं। हम ज्यादा देर उसे बर्दाश्त नहीं करते। सोए हुए लोगों को जाग्रित देखकर सोये हुए लोग परेशान होते हैं.जागने वालों की मौजूदगी सोये हुओं की नींद में बाधा डालती है।इसीलिए सोनेवाले अंधेरा पसंद लोग हत्या की षड्यंत्र रचते हैं.लोग आज भी जगाने वालों से चिढ़ते हैं.हम जागे हुए आदमियों के साथ वही व्यवहार करते हैं, जो पागलों की बस्ती में उस आदमी के साथ होगा, जो पागल नहीं है।कोई मानने को राजी नहीं...कि हमारे चारों तरफ सोए हुए ...

येसू नस्लभेदी था..

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#ईसा_मसीह_नस्ल_भेदी_था_ईसा_मसीह_पागल_सनकी_था. #ईसा_मसीह_काटने_वाला_पागल_कुत्ता_था.. #ईसा_मसीह_शैतान_था.                      गोस्पेल ऑफ़ मैथ्यू (15:21-26)  एक (गैर-यहूदी)कनानी  स्त्री आई को #कुत्ता कहा..  जब ईसा को ये पता चला कि ये महिला गैर-यहूदी है  तो उसने कहा,         कुत्तों के पिल्लों के आगे रोटी डालना ठीक नहीं । इससे ईसा के नस्लीय धृणा का पता चलता है ईसा का प्रेम मात्र अपनी नस्ल के लिये ही था!!         🔥दुराग्रह करनेवाले #दयापंथियों के पास लाख बहाने हैं ईसा को कोसने के....          ईसा को उस समय भी पागल,सनकी और ईशनिंदक कहा गया था.उसके अपने सगे भी सनकी कहते थे.....उनमें से बहुत सारे कहने लगे, “उसमें दुष्टात्मा है, और वह पागल है; उसकी क्यों सुनते हो?” औरों ने कहा, “ये बातें ऐसे मनुष्य की नहीं जिसमें दुष्टात्मा हो। क्या दुष्टात्मा अंधों की आँखें खोल सकती है?” यूहन्ना 10:20-21            आज भी अंधेरा पसंद लोग ईसा के ...

विनाश का पुत्र 【25】

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☦विनाश का पुत्र🔯 👹👿👿👿👿👿👹 विनाश और तानाशाही का पांचवां राज्य-#यूनानी साम्राज्य जो भविष्यवाणियों को पूरी करती हैं.दूसरा पशु रीछ के समान था। वह एक ओर तनकर खड़ा था। उसके दांतों के मध्‍य तीन पसलियां थीं। किसी ने उससे कहा, “उठ और बहुत मांस खा।” 6“तत्‍पश्‍चात् मैंने एक और पशु को देखा। वह चीते के समान था। पर उसकी पीठ पर पक्षियों के सदृश चार पंख थे। उसके चार सिर थे। उसे शासन करने का अधिकार दिया गया। 7“इसके बाद मैंने रात के दर्शनों में चौथा पशु देखा। वह देखने में भयानक, डरावना और अत्‍यन्‍त विशाल था। उसके मुंह में लोहे के बड़े-बड़े दांत थे। वह सब कुछ खाता और टुकड़े-टुकड़े कर देता था। जो उसके मुंह से बच जाता, उसको वह अपने पंजों से रौंद डालता था। वह पहलेवाले तीनों पशुओं से भिन्न था। उसके दस सींग थे।प्रक 12:3  8मैंने उसके सींगों को ध्‍यान से देखा। उसी समय उन सींगों के मध्‍य से एक और सींग निकला, जिसके कारण तीन सींग जड़ से उखड़ गए। यह सींग छोटा था, और इसमें मनुष्‍य की आंखों के समान आंखें थीं। इसमें मुंह भी था, जो बड़े बोल बोल रहा था।(दानिएल7)पढ़ें।।        यूनानी साम्राज...

Dead sea scroll..

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उन्‍नीस सौ चालीस के दशक के आखिरी सालों में, पैलिस्टाइन में मृत सागर के पास कुछ गुफाओं में चर्मपत्रों का एक बेहतरीन संग्रह पाया गया। ये चर्मपत्र मृत सागर चर्मपत्र (डॆड सी स्क्रोल्स्‌) के नाम से मशहूर हैं। माना जाता है कि इन्हें सा.यु.पू. 200 और सा.यु. 70 के बीच किसी वक्‍त लिखा गया था। इनमें सबसे जाना-माना है, यशायाह किताब का चर्मपत्र जो टिकाऊ और मज़बूत चमड़े पर, इब्रानी भाषा में लिखा हुआ है। इस चर्मपत्र पर यशायाह की लगभग पूरी किताब लिखी है और इसके पाठ और मसोरा-हस्तलिपियों के पाठ में बहुत मामूली-सा फर्क है, जबकि मसोरा-हस्तलिपियाँ इन चर्मपत्रों के लिखे जाने के 1,000 साल बाद लिखी गयी थीं। इस तरह यह चर्मपत्र इस बात का सबूत देता है कि बाइबल का पाठ हम तक बिना किसी फेर-बदल के बिलकुल सही-सही पहुँचाया गया है। यशायाह के मृत सागर चर्मपत्र के बारे में गौर करने लायक एक बात यह है कि इसके एक भाग के हाशिये पर “X” निशान लगा हुआ है जो स्पष्ट तरीके से लिखा नहीं गया। इस भाग को हम आज की बाइबल में यशायाह के 32वें अध्याय में पाते हैं। हम नहीं जानते कि नकलनवीस ने यह निशान क्यों लगाया, लेकिन हम इतना ज़रूर जानते...