दयानंद से पहले सारे भाष्यकार मूर्ख थे??
#मुण्डे_मुण्डे_मतिर्भिन्ना●●● एक ही वेद मंत्र भी एक और भावार्थ और भाष्य अनेक हो सकते हैं निर्भर करता है भाष्यकार और भावार्थ करनेवाले की मानसिकता पर क्योंकि वेद गेय है कविता है. इसीलिए जितने भाष्यकार उतने भाष्य हैं. अपनी जगह सभी भाष्यकार ठीक हैं. ऊवट,महिधर, सायणाचार्य, मैक्समूलर अपनी जगह ठीक हैं. दयानन्द अपनी जगह ठीक हो सकते हैं. दयानन्द ने तो नकल भर मारा है. हम सायणाचार्य के भाष्य को ही प्रमाणिक मानते हैं. सायणाचार्य ही एकमात्र ऐसे भाष्यकार थे जिन्होंने संपूर्ण वेद का भाष्य किया. वेदमंत्रों के अर्थ तीन प्रकार से किये जाते हैं-#आधिभौतिक, #आधिदैविक और #आध्यात्मिक. वेदों का भाष्य अति प्राचीन काल से होता आया है. सायणाचार्य के अतिरिक्त किसी भाष्यकार ने चारों वेदों का पूर्ण भाष्य नहीं कर पाया. प्राचीन वेद भाष्यकारों में स्कन्द स्वामी, उद्गीथ, बररूचि,वेंकटमाधव,आत्मानंद, भरतस्वामी आदि का नाम उल्लेखनीय है. सायणाचार्य के वेद भाष्यों में व्याकरण का भी ध्यान रखा गया है. सायणाचार्य भाष्य के आधार पर ही कुछ भारतीय तथा पाश्चात्य विद्वानों ने वेद भाष्यों की रचना की है. ...